
उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से जुड़ी इस वक्त की दो सबसे बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है और सभी प्रमुख दल उम्मीदवारों की छंटनी में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ गोंडा के बहुचर्चित उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है।
1. यूपी चुनाव 2027: टिकट के लिए पार्टियों का ‘सर्वे’ प्लान, विधायकों की बढ़ी धड़कनें
उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनावों में अभी समय हो, लेकिन राजनीतिक पार्टियों ने जमीनी स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) से लेकर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस आगामी चुनावों के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
भाजपा का विधायकों पर सर्वे: बीजेपी अपने मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में उनकी सक्रियता और जनता के बीच उनकी छवि को लेकर एक गुप्त सर्वे करवा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट खराब आएगी या जिनके खिलाफ जनता में नाराजगी (एंटी-इनकंबेंसी) दिखेगी, आगामी चुनाव में उनका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस का ‘प्राइवेट एजेंसी’ फॉर्मूला: कांग्रेस पार्टी ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। कांग्रेस ने मजबूत और संभावित चेहरों की पहचान करने के लिए बकायदा प्राइवेट एजेंसियों को काम पर लगाया है, जो जमीन पर जाकर जिताऊ उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार कर रही हैं।
सपा और अन्य दल भी अलर्ट: समाजवादी पार्टी (सपा) भी आगामी दंगल के लिए अंदरखाने सर्वे के जरिए उम्मीदवारों की छंटनी कर रही है। वहीं बसपा और अन्य क्षेत्रीय दल भी जातीय समीकरणों और जमीनी फीडबैक के आधार पर अपने पत्ते खेलने की तैयारी में हैं।
2. गोंडा कोऑपरेटिव बैंक घोटाला: ₹21.47 करोड़ के गबन मामले में एक और मैनेजर गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की गोंडा शाखा में हुए 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के बहुचर्चित घोटाले में गोंडा की कोतवाली नगर पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस मामले में शामिल बैंक के सहायक शाखा प्रबंधक (Assistant Branch Manager) सुशील कुमार गौतम को लखनऊ के आलोक नगर इलाके से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
क्या है पूरा घोटाला?
इस महाघोटाले का खुलासा तब हुआ था जब बैंक के स्पेशल ऑडिट में वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी। तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल ने बैंक के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी और कूट रचित (Forged) दस्तावेजों के सहारे बिना किसी पात्रता के अपने परिवार वालों और करीबियों के नाम पर करोड़ों रुपये के अनधिकृत लोन (ऋण) पास कर दिए थे। इस सिंडिकेट ने लगभग 205 खाताधारकों के खातों और बैंक के आंतरिक खातों में सेंध लगाकर कुल 21.47 करोड़ रुपये का गबन किया था।
पुलिस इस मामले के मुख्य सरगना और तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार पाल समेत तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। सुशील कुमार गौतम की गिरफ्तारी इस मामले में चौथी बड़ी कार्रवाई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घोटाले से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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