दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बाद उत्तराखंड को एक और बड़ा तोहफा, टिहरी में एशिया के सबसे बड़े PSP प्रोजेक्ट का होगा आगाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर उत्तराखंड की पावन धरा पर दस्तक देने वाले हैं। हाल ही में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के ऐतिहासिक उद्घाटन के बाद अब पीएम मोदी टिहरी गढ़वाल में 1000 मेगावाट की महत्वाकांक्षी पंप स्टोरेज प्लांट (PSP) परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर सकते हैं। लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे उत्तर भारत की बिजली समस्या का स्थाई समाधान बनेगी। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री इसी माह टिहरी पहुंच सकते हैं, जिसे लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट: क्या है टिहरी PSP?

टिहरी बांध की यह पंप स्टोरेज प्लांट परियोजना अपनी तकनीक और क्षमता के मामले में एशिया की सबसे बड़ी पीएसपी जल विद्युत परियोजना बनने जा रही है। इसकी कुल क्षमता 1000 मेगावाट है, जिसमें 250-250 मेगावाट की चार इकाइयां (Units) स्थापित की गई हैं। खास बात यह है कि इसकी तीन इकाइयों का संचालन पहले ही शुरू हो चुका है, जबकि चौथी यूनिट का औपचारिक लोकार्पण प्रधानमंत्री द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। यह भारत की पहली ‘वेरिएबल स्पीड’ पंप स्टोरेज सुविधा है, जो ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण में मील का पत्थर साबित होगी।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बाद दूसरा मेगा गिफ्ट

बीते 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, जिसने दिल्ली से दून की दूरी को महज 2.5 घंटे में समेट दिया है। असल में, टिहरी की इस बिजली परियोजना का लोकार्पण भी उसी दौरान होना था, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रोटोकॉल कारणों से इसे टाल दिया गया था। अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मिले संकेतों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के भव्य शुभारंभ के लिए कमर कस ली है। यह उत्तराखंड के विकास के लिए पीएम मोदी का दूसरा बड़ा ‘रिटर्न गिफ्ट’ माना जा रहा है।

बिजली संकट होगा दूर, पर्यावरण को मिलेगा लाभ

इस प्रोजेक्ट के पूरी तरह चालू होने से उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों को पीक आवर्स (जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है) में बिना किसी कटौती के बिजली मिल सकेगी। यह परियोजना कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में भी भारत का एक बड़ा कदम है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (THDCIL) द्वारा विकसित यह प्लांट सौर और पवन ऊर्जा के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए एक विशाल ‘बैटरी’ की तरह काम करेगा।

विकास की हैट्रिक और आध्यात्मिक जुड़ाव

प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव किसी से छिपा नहीं है। केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्राओं के बाद अब टिहरी झील और इस हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के जरिए वे राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का संदेश देंगे। स्थानीय लोगों में इस दौरे को लेकर खासा उत्साह है, क्योंकि इस मेगा प्रोजेक्ट से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि टिहरी झील क्षेत्र में पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है