डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश नाकाम फ्लोरिडा के महलनुमा घर का नक्शा लीक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा विशेष रूप से प्रशिक्षित एक खूंखार इराकी आतंकवादी ने इवांका ट्रंप की हत्या की पूरी साजिश रची थी। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में गिरफ्तार किए गए खतरनाक आतंकी मोहम्मद बाकिर साद दाऊद अल-सादी ने इवांका ट्रंप को जान से मारने की कसम खाई थी। सुरक्षा एजेंसियों को जांच के दौरान आतंकी के पास से इवांका के फ्लोरिडा स्थित आलीशान घर का पूरा नक्शा और रूट प्लान भी बरामद हुआ है।

क्यों निशाने पर थीं इवांका ट्रंप? कासिम सुलेमानी की मौत से जुड़ी हैं कड़ियां

सुरक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, इस खौफनाक साजिश के पीछे छह साल पुराना बदला है। जनवरी 2020 में बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के सबसे ताकतवर सैन्य प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हो गई थी। इराकी नागरिक अल-सादी को सुलेमानी की मौत का गहरा सदमा लगा था और वह उसे अपने पिता के समान मानता था।

वॉशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व उप सैन्य अताशे इंतिफाद कनबर ने खुलासा किया, “कासिम सुलेमानी की मौत के बाद अल-सादी हर जगह यह कहता फिरता था कि हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा, ताकि डोनाल्ड ट्रंप के घर को भी ठीक उसी तरह मटियामेट किया जा सके जैसे उसने हमारे घर (ईरान/इराक) को तबाह किया था।”

$24 मिलियन के महल का नक्शा किया था पोस्ट, दी थी सीक्रेट सर्विस को खुली चुनौती

अल-सादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर फ्लोरिडा के उस अति-सुरक्षित इलाके का बकायदा सैटेलाइट नक्शा पोस्ट किया था, जहां इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर का 24 मिलियन डॉलर (अरबों रुपये) का एक बेहद आलीशान महलनुमा घर है। अरबी भाषा में लिखी अपनी एक पोस्ट में उसने खुलेआम धमकी देते हुए लिखा था:

“अमेरिकियों, इस तस्वीर को गौर से देख लो और जान लो कि न तो तुम्हारे बड़े-बड़े महल और न ही तुम्हारी सीक्रेट सर्विस (VIP सुरक्षा) तुम्हें हमसे बचा पाएगी। हमारा बदला लेना बस वक्त की बात है।”

तुर्की में रूस भागते वक्त दबोचा गया, अमेरिका में 18 हमलों के हैं आरोप

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के आधिकारिक बयान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वांटेड अल-सादी को 15 मई 2026 को तुर्की में उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह चकमा देकर रूस भागने की फिराक में था। तुर्की की खुफिया एजेंसी के सहयोग से उसे तुरंत अमेरिका प्रत्यर्पित (Extradite) कर दिया गया है। अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों ने उस पर दुनिया भर में 18 आतंकी हमलों और हमलों की कोशिशों के गंभीर आरोप तय किए हैं।

आतंकी अल-सादी का खौफनाक ‘क्राइम प्रोफाइल’:

जांच एजेंसियों ने अल-सादी के हालिया हमलों का जो ब्योरा दिया है, वह बेहद डरावना है:

  • मार्च 2026: एम्स्टर्डम में ‘बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन’ के दफ्तर पर भीषण बमबारी।

  • मार्च 2026: टोरंटो (कनाडा) में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) पर अंधाधुंध गोलीबारी।

  • अप्रैल 2026: लंदन की सड़कों पर दो बेकसूर यहूदी नागरिकों पर चाकुओं से जानलेवा हमला।

  • अन्य वैश्विक हमले: बेल्जियम के लीज शहर में एक यहूदी प्रार्थना स्थल (सिनेगॉग) पर बमबारी और नीदरलैंड के रॉटरडैम में एक धार्मिक स्थल में भीषण आगजनी।

वह ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन ‘कताइब हिजबुल्लाह’ और ईरान की ‘IRGC’ दोनों के लिए एक साथ काम करता था। यही नहीं, उसने सुलेमानी के उत्तराधिकारी ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल कानी के साथ भी बेहद करीबी संबंध बना रखे थे।

सरकारी ‘सर्विस पासपोर्ट’ का दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर अय्याशी की तस्वीरें

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह है कि गिरफ्तारी के वक्त अल-सादी के पास इराक का आधिकारिक ‘सर्विस पासपोर्ट’ (Service Passport) बरामद हुआ था। यह एक विशेष कूटनीतिक यात्रा दस्तावेज होता है, जो केवल इराक के प्रधानमंत्री की लिखित सहमति पर बेहद खास सरकारी कर्मचारियों को ही मिलता है। इस पासपोर्ट की ताकत का फायदा उठाकर उसे दुनिया भर के हवाई अड्डों पर वीआईपी लाउंज और कड़ी सुरक्षा जांच से सीधे छूट मिल जाती थी, जिससे वह आसानी से पश्चिमी देशों का वीजा हासिल कर हमलों को अंजाम देता था। उसने फंडिंग के लिए एक डमी ट्रैवल एजेंसी भी खोल रखी थी।

एक वांटेड आतंकी होने के बावजूद अल-सादी सोशल मीडिया पर बेहद बेखौफ था। वह पेरिस के एफिल टॉवर और मलेशिया के पेट्रोनास ट्विन टॉवर्स जैसी मशहूर जगहों पर घूमते हुए अपनी तस्वीरें पोस्ट करता था। वह स्नैपचैट पर सुलेमानी के साथ गुप्त मिलिट्री ठिकानों पर नक्शे देखते हुए पुरानी तस्वीरें भी शेयर करता था और अपने टारगेट को डराने के लिए साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें इनबॉक्स में भेजता था।

ब्रुकलिन की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद, व्हाइट हाउस ने साधी चुप्पी

विशेषज्ञों का मानना है कि इवांका ट्रंप द्वारा साल 2009 में जैरेड कुशनर से शादी करने से पहले रूढ़िवादी यहूदी धर्म (Judaism) अपनाना भी इस कट्टरपंथी नेटवर्क की आंखों की किरकिरी बना हुआ था, जिसके चलते उन्हें मुख्य टारगेट बनाया गया। फिलहाल, अल-सादी को न्यू यॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर (MDC) के बेहद सख्त ‘एकांत कारावास’ (Solitary Confinement) में रखा गया है। इसी जेल में अमेरिका के कई हाई-प्रोफाइल कैदी बंद हैं। इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या टिप्पणी करने से परहेज किया है।