शस्त्र लाइसेंस पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद गरमाई सियासत अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला

उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग और आपराधिक छवि वाले लोगों को हथियार जारी किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। अदालत ने सूबे की योगी सरकार सहित सभी जिलों के आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से इस पर विस्तृत जवाब तलब किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सूबे के रसूखदार नेताओं जैसे रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) और धनंजय सिंह सहित 19 प्रभावशाली लोगों के शस्त्र लाइसेंसों की पूरी कुंडली भी मांगी है।

हाईकोर्ट की इस बड़ी कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उनके सहयोगी संगठनों (संगी-साथियों) पर चौतरफा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर एक लंबा और तीखा पोस्ट साझा करते हुए अखिलेश यादव ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा है।

‘असली शस्त्र के तो लाइसेंस बनते हैं, पर अदृश्य शस्त्रों का क्या?’

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट की शुरुआत करते हुए लिखा कि असली शस्त्र के तो लाइसेंस बनते हैं, लेकिन कुछ अदृश्य शस्त्र भी हैं, जो गुप्त रूप से देश, समाज और आपसी प्रेम पर अंदर से बेहद घातक हमला कर रहे हैं। उनका इशारा सीधे तौर पर समाज में फैलाए जा रहे कथित विभाजन और नफरत की राजनीति की तरफ था।

भाजपाइयों के निर्माणों और चंदे की जांच की मांग

अखिलेश यादव ने कानूनी बिरादरी का हवाला देते हुए मांग की कि भाजपा से जुड़े लोगों की संपत्तियों की भी गहनता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि वकील कह रहे हैं कि लगे हाथों— भाजपाइयों के घर, दुकान, कार्यालय और प्रतिष्ठान के कागज़-नक्शे मंगाकर उनकी वैधता भी जांच ली जाए।

इसके साथ ही उन्होंने भाजपा और उनके सहयोगी संगठनों द्वारा विभिन्न आयोजनों, निर्माण कार्यों और आपदाओं के नाम पर इकट्ठा किए गए फंड पर भी सवाल उठाए। सपा प्रमुख ने कहा कि जगह-जगह से बटोरे गए ‘तरह-तरह’ के चंदे और फंड का पूरा हिसाब मांगा जाना चाहिए और उनका बकायदा सरकारी ऑडिट होना चाहिए।

बेनामी संपत्तियों और ‘खर्चे-पानी’ पर उठाए गंभीर सवाल

जनता की जिज्ञासा का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने पूछा कि इस बात का भी कानूनी पहलू साफ किया जाना चाहिए कि ‘अनरजिस्टर्ड’ लोग जमीन किसके नाम से लेकर अपना निर्माण कार्य करते हैं? ये संपत्तियां बेनामी संपत्तियों के दायरे में क्यों नहीं आती हैं?

उन्होंने आगे तीखा हमला बोलते हुए लिखा कि गुप्त गतिविधियों में संलिप्त भाजपाई संगी-साथियों के ऐसे निर्माणों को ‘कार्यालय’ कहा जाए या ‘अड्डा’? इन अवैध लोगों का रोजाना का ख़र्चा-पानी कौन उठाता है? इसका पूरा कच्चा चिट्ठा तलाशकर जनता के सामने खोला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल दागा कि ये तथाकथित स्वदेशी लोग आखिर बार-बार विदेश भ्रमण करने क्यों जाते हैं?

सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और साजिश रचने का लगाया आरोप

सपा मुखिया ने अपने पोस्ट के आखिरी हिस्से में भाजपा के वैचारिक संगठनों के इतिहास पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग औपनिवेशिक समय (अंग्रेजों के जमाने) से किसकी कठपुतली बने हुए हैं और इनका इतिहास मुखबिरी का क्यों रहा है?

अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि ये संगी-साथी जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम करते हैं। उन्होंने अंत में लिखा कि वकील अब यह भी पूछ रहे हैं कि ये लोग किस नई साजिश के तहत ‘मानस के मान’ पर लाठियां चलवा रहे हैं? हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को और ज्यादा गरमाने वाली है।