
वैश्विक बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से इस समय रोजगार और आधुनिक टेक्नोलॉजी को लेकर एक बेहद कड़क व चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। लंदन मुख्यालय वाले दिग्गज बहुराष्ट्रीय बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered Bank) ने आगामी चार वर्षों के भीतर, यानी साल 2030 तक, अपने वैश्विक नेटवर्क से 7,000 से अधिक नौकरियां खत्म करने की एक व्यापक और कड़े पुनर्गठन (Restructuring) योजना की घोषणा की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक अपनी परिचालन दक्षता (Efficiency) को बढ़ाने, मानवीय चूकों को कम करने और मुनाफे को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वचालन (Automation) तकनीक का तेजी से और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर चुका है। इसी तकनीकी बदलाव के तहत बैंक का लक्ष्य 2030 तक अपने मुख्य कॉर्पोरेट विभागों में लगभग 15% पदों को पूरी तरह से समाप्त करना है।
कॉर्पोरेट विभागों के 52,000 से अधिक कर्मचारी होंगे प्रभावित
रॉयटर्स के कड़े आंकड़ों और विश्लेषण के अनुसार, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के इन प्रभावित होने वाले विशेष कॉर्पोरेट विभागों में वर्तमान में दुनिया भर के लगभग 52,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 7,000 से अधिक लोगों की छंटनी या विस्थापन होना तय माना जा रहा है। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर इस समय बैंक के कुल कार्यबल (Staff) की संख्या लगभग 82,000 के करीब है।
लागत कटौती नहीं, तकनीकी क्रांति है: सीईओ बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बिल विंटर्स ने इस कड़े फैसले पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि यह कदम केवल तात्कालिक लागत में कटौती (Cost Cutting) का एक जरिया नहीं है। बल्कि यह बैंक के एक बहुत बड़े और दीर्घकालिक तकनीकी परिवर्तन (Technological Transformation) का अभिन्न हिस्सा है।
सीईओ ने कर्मचारियों को ढांढस बंधाते हुए यह भी कहा कि जो कर्मचारी समय के साथ अपने कौशल को निखारने (Upskilling) और तरक्की करने के इच्छुक हैं, उन्हें बैंक के भीतर ही सृजित होने वाले नए तकनीकी पदों पर स्थानांतरित होने का पूरा अवसर दिया जाएगा। बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित होने वाले कई कर्मचारियों को एआई टूल्स के संचालन के लिए पुनः प्रशिक्षित (Retrain) भी किया जाएगा।
भारत के बेंगलुरु और चेन्नई बैक-ऑफिस पर पड़ेगा सबसे कड़ा असर
प्रौद्योगिकी और स्वचालन के इस कड़े रोटेशन का सबसे बड़ा और सीधा प्रभाव उन देशों और शहरों पर पड़ने की उम्मीद है, जहां बैंक के बड़े प्रशासनिक और तकनीकी बैक-ऑफिस केंद्र (Data Processing Centers) स्थित हैं। बैंक के आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत के चेन्नई और बेंगलुरु, मलेशिया के कुआलालंपुर और पोलैंड के वारसॉ में स्थित बैक-ऑफिस पूरी तरह से इस एआई क्रांति के केंद्र में रहेंगे और यहीं सबसे ज्यादा पदों में कटौती देखी जाएगी।
बिल विंटर्स के मुताबिक, कई रूटीन और मैन्युअल कार्यों में कम मूल्य वाले मानव संसाधन (Human Resource) को आधुनिक वित्तीय और निवेश एआई एल्गोरिदम से बदलना बैंक के बिजनेस मॉडल को बेहद मजबूत और सटीक बना देगा।
वैश्विक बैंकिंग उद्योग में चल रहा है पीढ़ीगत बदलाव
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का यह कड़ा फैसला कोई अकेला या इकलौता मामला नहीं है। यह वर्तमान में संपूर्ण वैश्विक वित्तीय जगत में चल रहे एक बड़े पीढ़ीगत और तकनीकी बदलाव (Generational Shift) का प्रतीक है।
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जापान के मिज़ुहो ग्रुप का उदाहरण: जापान की अग्रणी और शीर्ष वित्तीय संस्था, मिज़ुहो फाइनेंशियल ग्रुप (Mizuho Financial Group) ने भी कुछ समय पहले ही एक आधिकारिक घोषणा में कहा था कि वे स्वचालन और डिजिटल बैंकिंग टूल्स के बढ़ते उपयोग के चलते अगले 10 वर्षों में अपने स्टाफ की कुल संख्या में 5,000 कर्मचारियों की भारी कटौती करने जा रहे हैं।
मुनाफा और इक्विटी पर रिटर्न बढ़ाने का दृष्टिकोण
इस बड़े और कड़े बदलाव के माध्यम से स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने निवेशकों के लिए अपने दीर्घकालिक लाभ के दृष्टिकोण (Profit Outlook) को और अधिक मजबूत कर लिया है। आधुनिक तकनीकों के सहारे बैंक को पूरी उम्मीद है कि उसका मूर्त इक्विटी पर प्रतिफल (Return on Tangible Equity) जो वर्तमान में सामान्य स्तर पर है, वह साल 2028 तक बढ़कर 15% से अधिक और 2030 तक लगभग 18% के कड़े और ऐतिहासिक आंकड़े को छू लेगा।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के इस कड़े दौर में भी बैंक पूरी तरह से हाई-नेट-वर्थ (धनी) खुदरा बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे उच्च लाभ वाले व्यवसायों पर अपना ध्यान केंद्रित रखना जारी रखेगा, जहां एआई टूल्स डेटा का सटीक विश्लेषण करके ग्राहकों को बेहतर वित्तीय सेवाएं दे सकते हैं।
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