कोलकाता में अमेरिकी विदेश मंत्री, मार्को रूबियो की मदर हाउस यात्रा से क्यों गरमाया विदेशी चंदे का विवाद?

भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत करते हुए आज 23 मई को सीधे कोलकाता पहुंचे। पिछले 14 वर्षों में यह पहला मौका है जब अमेरिका का कोई शीर्ष राजनयिक और विदेश मंत्री कोलकाता की धरती पर उतरा है। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने यहां का दौरा किया था।

कोलकाता पहुंचते ही मार्को रूबियो और उनकी पत्नी जेनेट डी. रूबियो ने मध्य कोलकाता स्थित ‘मदर हाउस’ का रुख किया। यह सेंट टेरेसा द्वारा स्थापित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ का वैश्विक मुख्यालय है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने वहां संस्था के अधिकारियों से मुलाकात की और पास ही स्थित ‘चिल्ड्रन्स होम’ जाकर बच्चों से भी वक्त बिताया। हालांकि, रूबियो के इस दौरे के साथ ही ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ को मिलने वाले विदेशी चंदे (FCRA) को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

क्या है मिशनरीज ऑफ चैरिटी का FCRA विवाद और ममता बनर्जी का वह दावा?

विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) भारत का वह कानून है जो गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और चैरिटी संस्थानों को विदेशों से फंड लेने की कानूनी इजाजत देता है। साल 2021 के आखिर में भारत सरकार ने ‘प्रतिकूल इनपुट्स’ मिलने की बात कहकर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के FCRA लाइसेंस के रिन्यूअल (नवीनीकरण) पर रोक लगा दी थी, जिसे बाद में जरूरी दस्तावेज जमा होने पर बहाल कर दिया गया था।

इस मुद्दे पर उस वक्त सियासत तब गरमा गई थी जब पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला था। ममता बनर्जी ने ट्वीट कर आरोप लगाया था, “यह सुनकर मैं हैरान हूं कि क्रिसमस के दिन केंद्रीय मंत्रालय ने मदर टेरेसा के ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के भारत स्थित सभी बैंक खाते फ्रीज कर दिए। उनके 22,000 मरीज और कर्मचारी बिना भोजन-दवाइयों के रह गए हैं।”

इसी तरह का दावा सीपीआई(एम) के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने भी किया था। हालांकि, जल्द ही इस दावे की हवा निकल गई जब केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने साफ किया कि सरकार ने कोई खाता फ्रीज नहीं किया है, बल्कि खुद ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ ने अपने खातों को होल्ड पर रखने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को अनुरोध भेजा था।

मानसून सत्र में आएगा कड़ा FCRA संशोधन बिल 2026, संपत्तियों पर कब्जे की तैयारी?

यह विवाद इस समय इसलिए ज्यादा प्रासंगिक हो गया है क्योंकि भारत सरकार आगामी मानसून सत्र (जुलाई-अगस्त 2026) में FCRA कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए एक नया संशोधन बिल पेश करने जा रही है।

इस नए प्रस्तावित कानून के तहत एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) का गठन किया जाएगा। यदि किसी विदेशी फंडिंग पाने वाली संस्था का लाइसेंस रद्द होता है, रिन्यू नहीं होता या वे खुद उसे सरेंडर करते हैं, तो यह प्राधिकरण तुरंत उस संस्था की सभी संपत्तियों (जैसे- अस्पताल, स्कूल, बैंक खाते और इमारतें) को अपने सीधे नियंत्रण में ले सकेगा।

अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ की रूबियो से अपील: ‘मोदी और जयशंकर के सामने उठाएं यह मुद्दा’

मार्को रूबियो के भारत कदम रखने से ठीक दो दिन पहले, 21 मई 2026 को अमेरिकी कांग्रेसमैन (सांसद) क्रिस स्मिथ ने ‘वाशिंगटन एग्जामिनर’ में एक लेख लिखकर इस नए कानून पर गहरी चिंता जताई है। स्मिथ ने विदेश मंत्री रूबियो से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों में इस मुद्दे को पूरी ताकत से उठाएं।

अमेरिकी सांसद क्रिस स्मिथ ने इसके पक्ष में तीन बड़ी दलीलें दी हैं:

  • संपत्ति जब्त होने का डर: स्मिथ का कहना है कि अगर भारत का यह नया कानून लागू होता है, तो मामूली तकनीकी या अकाउंटिंग की गलती की वजह से भी मिशनरीज ऑफ चैरिटी जैसी संस्थाओं की अरबों की संपत्ति स्थायी रूप से जब्त हो सकती है।

  • धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट: उन्होंने इस बिल को भारत में काम कर रहे ईसाई चैरिटी समूहों, मिशनरी अस्पतालों और स्कूलों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया है।

  • रिश्तों में तल्खी का खतरा: स्मिथ का मानना है कि अगर भारत सरकार इस प्रस्तावित कड़े कानून को वापस नहीं लेती है, तो इससे भारत और अमेरिका के बीच के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।

बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बीच रूबियो का दौरा, आगे क्या है पूरा शेड्यूल?

मार्को रूबियो का यह कोलकाता दौरा राजनीतिक रूप से भी बेहद दिलचस्प समय पर हो रहा है। कुछ ही हफ्ते पहले पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में बड़ा सत्ता परिवर्तन हुआ है और राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार का गठन हुआ है। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री की इस यात्रा को कूटनीतिक हलकों में बेहद अहम माना जा रहा है।

कोलकाता के बाद मार्को रूबियो के सफरनामा में आगरा और जयपुर भी शामिल हैं, जिसके बाद वे देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचेंगे। आगामी 26 मई को नई दिल्ली में ‘क्वाड’ (QUAD) देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल बैठक होने जा रही है। इस बैठक में रूबियो भारतीय नेतृत्व के साथ रक्षा सहयोग, हाई-टेक तकनीक और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा जैसे रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूबियो भारतीय मंचों पर FCRA और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को उठाते हैं या नहीं।