‘हमने ईरान पर असल में कब्जा कर लिया है…’ मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े दावे से दुनिया हैरान

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण सैन्य तनाव, अनिश्चितता और लगातार जारी जुबानी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा सनसनीखेज दावा कर दिया है, जिसने पूरी दुनिया के नीति-नियंताओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को वाशिंगटन डीसी के पास स्थित ‘जॉइंट बेस एंड्रयूज’ (Joint Base Andrews) पर पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि अमेरिका ने ईरान पर असल में कब्जा कर लिया है। तेहरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत में उम्मीद से कहीं ज्यादा समय लगने के सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने इस मौजूदा स्थिति की तुलना इतिहास में हुए अफगानिस्तान और वियतनाम के अमेरिकी युद्धों से कर डाली। इस दौरान अपने विशेष लहजे में ट्रंप ने कहा, “मैं यहां तीन महीने से हूं और इस दौरान ज्यादातर समय पूरी तरह से युद्धविराम (Ceasefire) रहा है। हमने ईरान पर असल में पूरी तरह कब्जा कर लिया है।”

हमलों से ठीक एक घंटे पहले रुक गया था अमेरिकी एक्शन

डोनाल्ड ट्रंप का यह चौंकाने वाला बयान एक ऐसे नाजुक समय में सामने आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी खतरनाक स्थिति बनी हुई है। हालांकि, इस भारी तनाव के समानांतर दोनों धुर विरोधी देशों के बीच पर्दे के पीछे से परोक्ष और सीधे संवाद की खबरें भी लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। इससे ठीक एक दिन पहले मंगलवार को भी राष्ट्रपति ट्रंप ने वाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए एक बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि वह ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू करने का अंतिम आदेश देने से महज एक घंटे की दूरी पर खड़े थे। अमेरिकी सेना पूरी तरह से एक्शन के लिए तैयार थी, लेकिन ऐन वक्त पर कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित अन्य मध्यस्थ देशों से एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश मिलने के बाद उन्होंने इस हमले के फैसले को फिलहाल टाल दिया। मध्यस्थों ने ट्रंप को आश्वस्त किया था कि शांति वार्ता की मेज पर तेहरान अब एक ‘उचित और सकारात्मक रवैया’ अपना रहा है।

अगर वो फोन कॉल नहीं आता, तो अब तक हो रहे होते विनाशकारी हमले

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए ट्रंप ने कहा, “मैं ठीक एक घंटे बाद अंतिम निर्णय लेने ही वाला था और हमारी सेना पूरी तरह मुस्तैद खड़ी थी। अगर मैंने वह आदेश दे दिया होता, तो शायद इस वक्त ईरान पर भीषण हमले हो रहे होते। शायद आज हम यहां किसी खूबसूरत बॉलरूम की चर्चा करने के बजाय उन विनाशकारी हमलों के बारे में बात कर रहे होते। हम बिल्कुल उसी अंतिम मोड़ पर पहुंच चुके थे, जहां मैं अपना मन बना चुका था, लेकिन तभी मध्यस्थों का फोन आ गया। उन्हें बखूबी पता चल गया था कि मैंने हमले का फैसला ले लिया है। उन्होंने मुझसे अनुरोध करते हुए कहा- ‘सर, क्या आप हमें कुछ और दिनों का समय दे सकते हैं? क्योंकि हमें पूरा भरोसा है कि वे (ईरान) अब सही और उचित रवैया अपना रहे हैं’।”

सऊदी, कतर और यूएई मिलकर खेल रहे हैं टीम गेम

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के हवाले से बताया कि पिछले दो दिनों के भीतर ईरान के साथ चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत में काफी बड़ी और सकारात्मक प्रगति देखी गई है। ट्रंप ने आगे कहा, “पिछले दो दिनों में वार्ताकारों ने मुझे फोन करके लगातार अपडेट दिया कि बातचीत में बहुत अच्छी प्रगति हुई है, क्योंकि हम उन्हें लगातार अपने साथ इस पूरी प्रक्रिया में शामिल किए हुए हैं। इस महावार्ता को सफल बनाने और युद्ध को टालने के लिए मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और कुछ हद तक बहरीन समेत कई अन्य खाड़ी देश लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। हम सभी इन देशों के साथ मिलकर काम करा रहे हैं और यह पूरी प्रक्रिया एक मजबूत टीम की तरह आगे बढ़ रही है।” हालांकि, ट्रंप के इस दावे के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ईरान इस ‘कब्जे’ वाले बयान पर अपनी क्या प्रतिक्रिया देता है।