
भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों के बीच एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आई है। अपने पहले आधिकारिक दिल्ली दौरे पर रवाना होने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और बाजार की दिशा बदल सकता है। रूबियो ने भारत की जमकर तारीफ करते हुए उसे अमेरिका का सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद साझेदार बताया है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बेहद बड़ा और खुला ऑफर दे दिया है।
जितनी मर्जी उतना ईंधन खरीदें: अमेरिका का खुला ऑफर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ऊर्जा सहयोग (फ्यूल सप्लाई) के मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका भारत को उतनी ऊर्जा और ईंधन बेचना चाहता है, जितनी भारत की जरूरत है या जितनी भारत खरीदना चाहे। इस समय अमेरिका ऐतिहासिक स्तर पर ऊर्जा का उत्पादन और दुनिया भर में निर्यात कर रहा है। रूबियो ने साफ किया कि अमेरिका की नजर भारत के तेजी से बढ़ते ऊर्जा पोर्टफोलियो पर है और वे इसमें अपनी हिस्सेदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाना चाहते हैं।
वेनेजुएला के तेल पर हुआ सबसे बड़ा खुलासा
इस रणनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण संकेत भी दिया। उन्होंने वेनेजुएला के तेल को लेकर कहा कि इस क्षेत्र में भी दोनों देशों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं। रूबियो ने एक बड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि वेनेज़ुएला के अंतरिम राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। कूटनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि इस आगामी यात्रा के दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल आपूर्ति और ऊर्जा व्यापार को लेकर कोई बहुत बड़ा समझौता हो सकता है।
सबसे तेजी से बढ़ते बाजार के साथ दीर्घकालिक साझेदारी
दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र को लेकर बातचीत का सिलसिला नया नहीं है, लेकिन अब इसे एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, भारत और अमेरिका इस दिशा में बड़े स्तर पर नई संभावनाओं को तलाश रहे हैं। अमेरिका भारत के साथ एक मजबूत और दीर्घकालिक (Long-term) ऊर्जा साझेदारी बनाना चाहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे तेजी से विकसित होते और बढ़ते हुए ऊर्जा बाजारों में सबसे आगे खड़ा है।
पहली बार भारत आ रहे हैं रूबियो, ‘क्वाड’ पर भी रहेगी नजर
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मार्को रूबियो 23 से 26 मई के बीच अपनी पहली भारत यात्रा पर रहेंगे। अपनी इस बेहद खास यात्रा के दौरान रूबियो दिल्ली में ‘क्वाड’ (Quad) देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी एक महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इस साल के अंत में भी भारत में एक और बड़ा वैश्विक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है, जो दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को और ज्यादा मजबूती देगा।
चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच बेहद अहम है यह दौरा
मार्को रूबियो का यह पहला भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया और विशेष रूप से पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) के क्षेत्र में भारी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और वैश्विक हलचल का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आयात पर पड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा भारत के लिए रणनीतिक, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा के मोर्चे पर बेहद निर्णायक साबित होने वाला है
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