
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बेहद संवेदनशील कूटनीतिक वार्ता (Diplomatic Talks) में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच महा-तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। तेहरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium) और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण को लेकर गतिरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। इस गहरे विवाद ने न केवल वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को संकट में डाल दिया है, बल्कि मध्य-पूर्व (Middle East) में एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष की आशंकाओं को हवा दे दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने हालिया बातचीत को लेकर सावधानी बरतते हुए कहा कि हालांकि वार्ता में कुछ अच्छे संकेत दिखे हैं, लेकिन किसी अंतिम समाधान पर पहुंचने से पहले पूरी सतर्कता जरूरी है। दूसरी तरफ, एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र का दावा है कि दोनों देशों के बीच मतभेद पहले के मुकाबले कुछ कम जरूर हुए हैं, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते (Final Agreement) पर मुहर नहीं लग सकी है।
यूरेनियम भंडार बना महा-विवाद, सर्वोच्च नेता खामेनेई का ट्रांसफर से इनकार
इस पूरे अंतरराष्ट्रीय विवाद की सबसे बड़ी जड़ ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का साफ आरोप है कि ईरान इस यूरेनियम का इस्तेमाल चोरी-छिपे परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) विकसित करने के लिए कर रहा है। हालांकि, तेहरान इन दावों को खारिज करते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऊर्जा जरूरतों के लिए बताता रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को इस खतरनाक भंडार पर नियंत्रण बनाए रखने की इजाजत नहीं देगा। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा:
“हम इसे हासिल कर लेंगे। हमें व्यक्तिगत रूप से इसकी कोई जरूरत नहीं है, लेकिन हम उन्हें (ईरान को) इसे अपने पास रखने नहीं दे सकते। अगर जरूरत पड़ी, तो हम इस यूरेनियम भंडार को पूरी तरह नष्ट भी कर सकते हैं।”
दूसरी तरफ, ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को देश से बाहर किसी अन्य देश में भेजने (हस्तांतरण) के लिए राजी नहीं है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने समृद्ध यूरेनियम के किसी भी तरह के विदेशी हस्तांतरण पर पूरी तरह रोक लगाने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी तनातनी: ट्रंप बोले- ‘नहीं चलेगा कोई टोल’
तनाव का दूसरा सबसे बड़ा मोर्चा ‘होर्मुज स्ट्रेट’ है, जिसे पूरी दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा गलियारा (Energy Corridor) माना जाता है। वैश्विक स्तर पर होने वाली तेल और गैस आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर किसी भी तरह का टैक्स, टोल या प्रतिबंध लगाने की ईरानी कोशिशों का कड़ा विरोध किया है। ट्रंप ने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग (International Waterway) है और इसे पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खुला एवं स्वतंत्र रहना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि यहां किसी भी तरह की ईरानी दादागिरी या टोल स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके उलट, तेहरान का तर्क है कि हालिया सैन्य तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा हालातों को देखते हुए उसे अपने समुद्री हितों और सीमाओं की रक्षा के लिए इस मार्ग पर कड़े कदम उठाने का पूरा संप्रभु अधिकार है।
वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप, 125 की जगह गुजर रहे सिर्फ 31 जहाज
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस टकराव का सीधा और जानलेवा असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। ‘अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ (IEA) ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो दुनिया एक भयानक ऊर्जा संकट (Energy Crisis) की गर्त में गिर जाएगी। एजेंसी के मुताबिक, जुलाई और अगस्त के महीनों में जब वैश्विक स्तर पर गर्मियों के कारण ईंधन की मांग चरम पर होगी, तब तेल बाजार सबसे बड़े खतरे के दौर में पहुंच सकता है।
इस तनाव के कारण समुद्री यातायात पहले ही बुरी तरह चरमरा चुका है। ईरानी मीडिया से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से होकर केवल 31 जहाजों ने ही सफर किया है, जबकि इस संकट से पहले यहां से रोजाना औसतन 125 से अधिक बड़े कमर्शियल और तेल टैंकर जहाज गुजरा करते थे। जहाजों की संख्या में आई इस भारी कमी से दुनिया भर में जरूरी सामानों की आपूर्ति चेन प्रभावित हो रही है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की मध्यस्थता की कोशिशें तेज
इस बेहद नाजुक और विस्फोटक स्थिति के बीच, पड़ोसी देश पाकिस्तान ने दोनों परमाणु संपन्न देशों (अमेरिका और ईरान) के बीच मध्यस्थता (Mediation) करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर जल्द ही तेहरान का एक अहम कूटनीतिक दौरा कर सकते हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही संवाद प्रक्रिया को तेज किया जाए ताकि युद्ध के खतरे को टाला जा सके।
हालांकि, इन कोशिशों के बावजूद जमीन पर हालात बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बने हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कूटनीतिक बातचीत से कोई ठोस और सही समाधान नहीं निकला, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा बड़ी सैन्य कार्रवाई (Military Action) शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा। वहीं, ईरान के शक्तिशाली संगठन ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि अमेरिका के किसी भी नए हमले का जवाब सिर्फ उसकी सीमा पर नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में फैले अमेरिकी ठिकानों पर भीषण हमले के रूप में दिया जाएगा। फिलहाल, दुनिया भर के बाजारों और देशों की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता के अगले दौर पर टिकी हैं।
girls globe