3 Day Weekend Rule: कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! अब हफ्ते में मिलेगी 3 दिन की छुट्टी, लेकिन माननी होगी यह कड़क शर्त

देश के नौकरीपेशा कर्मचारियों और कॉर्पोरेट जगत के वर्किंग कल्चर (कामकाजी संस्कृति) को पूरी तरह बदलने के लिए सरकार ने नए लेबर कोड के नियमों में एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव प्रस्तावित किया है। इस नए लेबर कोड के दायरे में कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी, पीएफ (PF) कंट्रीब्यूशन, ग्रेच्युटी के साथ-साथ उनके साप्ताहिक काम के घंटों को लेकर दूरगामी प्रावधान किए गए हैं। इन बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा ‘3 डे वीकेंड रूल’ (3 Day Weekend Rule) यानी हफ्ते में 3 दिन की छुट्टी वाले खास नियम की हो रही है, जिसने निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। नए नियम के तहत कंपनियों में अब सिर्फ 4 दिन काम और पूरे 3 दिन की साप्ताहिक छुट्टी का नया मॉडल धरातल पर उतर सकता है।

3 दिन की छुट्टी के साथ हर दिन करना होगा 12 घंटे काम

लेबर कोड के इस नए ड्राफ्ट के अनुसार, 3 दिन की साप्ताहिक छुट्टी का यह कड़ा फायदा उठाने के लिए कर्मचारियों को कार्यस्थल पर अधिक समय देना होगा। यदि कोई कंपनी अपने यहाँ 4 दिन का वर्किंग वीक और 3 दिन का वीकेंड लागू करती है, तो कर्मचारियों को प्रतिदिन 12 घंटे की शिफ्ट में काम करना अनिवार्य होगा।

पंचांगीय और तकनीकी गणना के आधार पर देखा जाए, तो इस व्यवस्था में भी कर्मचारियों के पूरे सप्ताह के कुल वर्किंग आवर्स (काम के घंटे) 48 घंटे से ज्यादा नहीं होंगे। लेबर एक्सपर्ट्स (श्रम विशेषज्ञों) ने इस नियम की बारीकी स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था किसी भी कंपनी या संस्थान के लिए अनिवार्य (Mandatory) नहीं है। इसे केवल नियोक्ता (Employer) और कर्मचारियों के बीच आपसी लिखित सहमति और तालमेल के बाद ही ऑफिस में लागू किया जा सकेगा। कोई भी कंपनी या मालिक अपने कर्मचारियों पर इस 12 घंटे वाले सिस्टम को जबरदस्ती थोप नहीं सकता है।

48 घंटे से ज्यादा काम कराया तो देना होगा डबल ओवरटाइम

ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ वर्किंग कंडीशन रूल्स 2026 (Occupational Safety Health Working Conditions Rules 2026) के नए शर्तों के मुताबिक, सरकार ने दैनिक काम के घंटों की तुलना में पूरे सप्ताह के कुल वर्किंग ऑवर्स को नियंत्रित करने पर मुख्य फोकस रखा है। इसके तहत:

  • तय सीमा: कंपनियों को यह कड़ाई से सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी सामान्य परिस्थिति में कर्मचारियों से एक हफ्ते में 48 घंटे से अधिक काम न लिया जाए।

  • ओवरटाइम का कड़ा नियम: यदि कोई कंपनी 48 घंटे की इस तय सीमा के बाद भी कर्मचारियों से एक्स्ट्रा काम करवाती है, तो उसे उस अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) के लिए कर्मचारी को उसके सामान्य वेतन की दर से दोगुना (Double Overtime Payment) भुगतान करना पड़ेगा।

इस नए नियम से कंपनियों को अपनी शिफ्ट व्यवस्था और मानव संसाधन (HR) का शेड्यूल तय करने में पहले से कहीं ज्यादा लचीलापन और आसानी मिलेगी।

इन 7 महत्वपूर्ण सेक्टर्स के लिए काम नहीं करेगा यह नया सिस्टम

लेबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी वाला यह आकर्षक दिखने वाला फॉर्मूला देश के सभी उद्योगों और सेक्टर्स पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता। कुछ ऐसे क्रिटिकल और सेवा आधारित क्षेत्र हैं, जहां 24 घंटे और लगातार मैनपावर (स्टाफ) की भारी जरूरत बनी रहती है। इन सेक्टर्स में इस नियम को व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है:

छूट वाले प्रमुख क्षेत्र: हेल्थकेयर (चिकित्सा व्यवस्था), बड़े अस्पताल, होटल और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री, रिटेल आउटलेट्स, पब्लिक व प्राइवेट ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) और भारी मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) यूनिट्स।

इन विशिष्ट क्षेत्रों में लगातार काम चलने के कारण शिफ्ट्स को 12 घंटे तक खींचना और कर्मचारियों को लगातार 3 दिन की छुट्टी देना उत्पादन और नागरिक सेवाओं को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है। इसलिए इन सेक्टर्स में पारंपरिक 5 या 6 दिन वाले वर्किंग मॉडल को ही जारी रखने की सलाह दी गई है।