
दुनिया के सामने खुद को शांतिदूत दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के असली इरादों की पोल खुल गई है। इजरायल के प्रतिष्ठित सी14 (C14) मीडिया संस्थान ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान जो लगातार अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने और शांति बहाली के लिए चिल्ला रहा है, उसके पीछे का असली मकसद विश्व शांति नहीं, बल्कि उसका अपना निजी स्वार्थ और कंगाली का डर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर इस समय 100 बिलियन डॉलर (100 अरब डॉलर) से अधिक का विदेशी कर्ज है और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है। यदि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव असहनीय हो जाएगा। यही वजह है कि इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द एक शांति समझौता कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। हालांकि, अतीत में भी पाकिस्तान ऐसी मध्यस्थता की नाकाम कोशिशें कर चुका है।
क्या है पाकिस्तान और ईरान के बीच की ‘सीक्रेट डील’?
सी14 मीडिया की रिपोर्ट में ईरान और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे हुई एक बड़ी सहमति का भी भंडाफोड़ किया गया है:
पाकिस्तान की भूमिका: पाकिस्तान ने ईरान को भरोसा दिया है कि वह अमेरिका (वाशिंगटन) के साथ उसकी एक बेहतरीन और सुरक्षित डील कराएगा।
ईरान का रिटर्न गिफ्ट: इस डील के बदले में, ईरान वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को कर्ज के दलदल से बाहर निकालने के लिए भारी मात्रा में फंड (पैसा) उपलब्ध कराएगा।
इसी सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री (आंतरिक मंत्री) मोहसिन नकवी इस समय तेहरान में डेरा डाले हुए हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख (आर्मी चीफ) जनरल आसिम मुनीर भी बहुत जल्द तेहरान पहुंच सकते हैं।
एक हफ्ते में दूसरी बार तेहरान पहुंचे गृह मंत्री मोहसिन नकवी
पाकिस्तान के समाचार चैनल ‘जियो न्यूज’ और ईरान की सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी बुधवार को एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से मिलने तेहरान पहुंचे हैं। इस्लामाबाद इस समय वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों का पूरी तरह नेतृत्व कर रहा है, ताकि उसे ईरान से मिलने वाले फंड का रास्ता साफ हो सके।
फोन पर भिड़े डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू, इजरायली पीएम बेहद खफा
एक तरफ जहां पाकिस्तान शांति वार्ता कराने की जुगत में है, वहीं दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर गहरी खाई नजर आने लगी है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ (Axios) ने बुधवार को एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है।
इसके अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के खिलाफ युद्ध की आगे की रणनीति को लेकर फोन पर बेहद तीखी और कड़क बातचीत हुई है।
नेतन्याहू की नाराजगी की वजह:
अमेरिका का रुख: वाशिंगटन अब ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले करने के बजाय डिप्लोमेसी और समझौते के जरिए मामले को शांत करने के पक्ष में दिखाई दे रहा है।
इजरायल का रुख: एक्सियोस की खबर के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू बेहद गुस्से में हैं। नेतन्याहू का मानना है कि यह ईरान पर पीछे हटने का नहीं, बल्कि दोबारा भीषण हमले शुरू करने का सही समय है। वह ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना चाहते हैं और उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (Infrastructures) को निशाना बनाकर वहां की सरकार को घुटनों पर लाना चाहते हैं।
अमेरिका के इस बदले हुए रुख और पाकिस्तान की बैकडोर एंट्री ने मिडल ईस्ट के इस युद्ध को एक बेहद दिलचस्प और जटिल मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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