मुंबई/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देश की जनता से ईंधन बचाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देने की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। आम जनता ही नहीं, बल्कि देश के बड़े-बड़े मंत्री और मुख्यमंत्री भी अपनी लग्जरी गाड़ियों और सुरक्षा काफिले को छोड़कर वैकल्पिक साधनों का सहारा ले रहे हैं। महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली और बिहार तक, नेताओं के इस बदले अंदाज की काफी चर्चा हो रही है।
बुलेट से विधानसभा पहुंचे सीएम फडणवीस
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का एक अलग ही रूप तब देखने को मिला जब वे अपनी महंगी सरकारी कार के बजाय ‘रॉयल एनफील्ड 350’ बाइक चलाकर विधान भवन पहुंचे। खास बात यह थी कि उनके साथ संस्कृति मंत्री आशीष शेलार भी पीछे हेलमेट लगाकर बैठे नजर आए। मुंबई के भारी ट्रैफिक और ईंधन की बर्बादी को कम करने के संदेश के रूप में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
परिवहन मंत्री ने बस से किया निरीक्षण
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, जो अक्सर नई सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाने जाते हैं, पुणे में एक बस में सवार होकर सड़क परियोजनाओं का निरीक्षण करते नजर आए। गडकरी का यह कदम सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) के महत्व को दर्शाने की कोशिश है।
ई-रिक्शा, साइकिल और मेट्रो का बढ़ा क्रेज
देश के अन्य राज्यों में भी मंत्रियों ने पीएम की अपील को गंभीरता से लिया है:
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अर्जुन राम मेघवाल: केंद्रीय कानून मंत्री बीकानेर में एक साधारण ई-रिक्शा की सवारी करते दिखे।
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आशीष सूद: दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने स्कूल का निरीक्षण करने के लिए मेट्रो का चुनाव किया।
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अरविंद कुमार शर्मा: हरियाणा के मंत्री एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए साइकिल से पहुंचे।
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धर्मेंद्र भारद्वाज: मेरठ के MLC ने अपनी निजी गाड़ी छोड़ ई-रिक्शा से विकास भवन तक का सफर तय किया।
काफिले और सुरक्षा में भारी कटौती
केवल वाहन ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के नाम पर होने वाली फिजूलखर्ची पर भी लगाम लगाई जा रही है:
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बिहार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जो पहले 19 गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ चलते थे, अब केवल 3 गाड़ियों के साथ सफर कर रहे हैं।
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ज्योतिरादित्य सिंधिया: केंद्रीय मंत्री ने अपने सिक्किम दौरे के दौरान निर्देश दिए कि उनके साथ केवल न्यूनतम आवश्यक वाहन और अधिकारी ही मौजूद रहें।
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