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अपर एकादशी 2026: व्रत कथा, महत्व और पूजा विधि जानें क्यों खास है यह व्रत और कैसे प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘अपर एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। इसे ‘अचला एकादशी’ भी कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है।

अपर एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था, जिसका छोटा भाई वज्रध्वज बेहद क्रूर और अधर्मी था। वज्रध्वज अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था। एक दिन उसने अवसर पाकर राजा महीध्वज की हत्या कर दी और उनके शव को जंगल में एक पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया।

अकाल मृत्यु के कारण राजा की आत्मा प्रेत बनकर उसी पीपल के पेड़ पर रहने लगी और राहगीरों को परेशान करने लगी। एक दिन धौम्य ऋषि उस रास्ते से गुजरे। उन्होंने अपनी तपोबल से राजा के प्रेत बनने का कारण जाना और दयावश उसे प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने का निर्णय लिया। ऋषि ने स्वयं अपर एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा को दान कर दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा प्रेत योनि से मुक्त होकर दिव्य देह धारण कर स्वर्ग लोक चले गए।

व्रत का महत्व

  • पापों का नाश: यह व्रत ब्रह्महत्या, परनिंदा और झूठ बोलने जैसे घोर पापों के प्रायश्चित के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

  • पुण्य फल: शास्त्र कहते हैं कि अपर एकादशी का फल कार्तिक स्नान या गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने के समान मिलता है।

  • सुख-समृद्धि: जो भक्त भक्तिभाव से यह व्रत रखते हैं, उनके जीवन में आर्थिक कष्ट दूर होते हैं और अपार धन-संपत्ति का आगमन होता है।

पूजा विधि और नियम

  1. संकल्प: सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजन: भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से अभिषेक कराएं। उन्हें पीले फूल, अक्षत, फल और तुलसी दल अर्पित करें।

  3. भोग: विष्णु जी को सात्विक भोग लगाएं (ध्यान रहे कि भगवान को तुलसी जरूर चढ़ाएं)।

  4. मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।

  5. आरती और चालीसा: कथा पढ़ने के बाद विष्णु चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें।

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे…