कोलकाता/बारासात। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुए चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आ गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) रहे चंद्रनाथ रथ की हत्या की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। मंगलवार को सीबीआई आधिकारिक तौर पर बंगाल पुलिस से इस केस की केस डायरी और तमाम दस्तावेज अपने हाथ में ले लेगी। गौरतलब है कि राज्य पुलिस ने खुद इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
CBI ने बनाई स्पेशल टीम, DIG करेंगे मॉनिटरिंग
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए कमर कस ली है। जांच के लिए डीआईजी (DIG) रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इसके साथ ही सात सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) भी बनाई गई है, जो मौके पर जाकर साक्ष्यों को दोबारा खंगालेगी।
यूपी और बिहार से दबोचे गए तीन आरोपी
सीबीआई जांच की खबर ऐसे समय में आई है जब बंगाल पुलिस की सीआईडी (CID) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने सोमवार को हत्या के सिलसिले में उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।
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मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य: इन्हें बिहार के बक्सर से हिरासत में लिया गया।
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राज सिंह: इसे उत्तर प्रदेश के बलिया से 10 मई को पकड़ा गया था। पूछताछ के बाद तीनों को आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया है। बारासात अदालत ने तीनों आरोपियों को 13 दिनों की पुलिस हिरासत (24 मई तक) में भेज दिया है। इन पर हत्या, अवैध हथियार रखने और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
कैसे हुई थी हत्या?
बीती 6 मई को उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में चंद्रनाथ रथ की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वे अपने घर से कुछ ही दूरी पर थे। बाइक सवार हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में उनके ड्राइवर को भी गोली लगी थी, लेकिन उसकी जान बच गई। चुनावी नतीजों के तुरंत बाद हुई इस वारदात ने राज्य में भारी राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया था। भाजपा ने सीधे तौर पर सत्ताधारी टीएमसी पर आरोप लगाए थे।
कौन थे चंद्रनाथ रथ?
चंद्रनाथ रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते थे। वे पूर्व में भारतीय वायु सेना (IAF) के जवान भी रह चुके थे। उनके पास न केवल प्रशासनिक अनुभव था, बल्कि वे शुभेंदु अधिकारी के राजनीतिक कामकाज को भी बारीकी से संभालते थे। उनकी हत्या को शुभेंदु अधिकारी के लिए एक बड़े व्यक्तिगत और राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
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