मनरेगा का अंत, VB-GRAM JI का आगाज, 1 जुलाई से बदल जाएगी ग्रामीण भारत की तस्वीर

केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार की दिशा में एक युगांतकारी परिवर्तन की घोषणा की है। सोमवार को सरकार ने स्पष्ट किया कि बहुप्रतीक्षित ‘विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-GRAM JI अधिनियम, 2025 आगामी 1 जुलाई से देशभर में प्रभावी हो जाएगा। यह नया कानून दशकों पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का स्थान लेगा, जिसे सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की ओर एक बड़ा कदम बताया है।

100 नहीं, अब मिलेंगे 125 दिन के रोजगार की गारंटी

नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अब एक वित्तीय वर्ष में रोजगार की वैधानिक गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त 25 दिनों का रोजगार ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करेगा और पलायन को रोकने में मददगार साबित होगा।

चार श्रेणियों में बंटा काम, पंचायतों को मिली ज्यादा शक्ति

VB-GRAM JI के तहत कार्यों को आधुनिक जरूरतों के हिसाब से चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. जल संरक्षण परियोजनाएं

  2. बुनियादी ग्रामीण ढांचा (सड़क, भवन आदि)

  3. आजीविका संवर्धन से जुड़ी परियोजनाएं

  4. जलवायु परिवर्तन और मौसम चुनौतियों से निपटने के कार्य

खास बात यह है कि अब विकास की रूपरेखा ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के जरिए तय होगी। ग्राम पंचायतें अपनी जरूरतों के हिसाब से योजना बनाएंगी, जिसे ग्राम सभा से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

डिजिटल हाजिरी और ‘फेस रिकग्निशन’ से रुकेगी धांधली

भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए नए कानून में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए गए हैं। अब कार्यस्थल पर उपस्थिति चेहरे की पहचान (Face Recognition) प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। हालांकि, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों के लिए सरकार ने विशेष छूट का प्रावधान भी रखा है। इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि खेती के ‘पीक सीजन’ (बुवाई और कटाई) के दौरान इस मिशन के तहत अन्य कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा, ताकि कृषि कार्यों के लिए मजदूरों की कमी न हो।

क्या नहीं बदलेगा? श्रमिकों के अधिकार रहेंगे बरकरार

भले ही कानून का नाम और कलेवर बदल गया हो, लेकिन श्रमिकों के बुनियादी अधिकार सुरक्षित रखे गए हैं:

  • बेरोजगारी भत्ता: काम मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार न मिलने पर राज्य सरकार को बेरोजगारी भत्ता देना होगा।

  • डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): मजदूरी सीधे बैंक या डाकघर खाते में ही आएगी।

  • समय पर भुगतान: साप्ताहिक या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है, देरी होने पर मुआवजे का प्रावधान बरकरार है।

  • जॉब कार्ड: पुराने जॉब कार्ड (e-KYC पूर्ण होने पर) तब तक वैध रहेंगे जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं हो जाते।

विपक्ष और विशेषज्ञों की चिंताएं

एक तरफ जहां सरकार इसे आधुनिक ग्रामीण विकास का मॉडल बता रही है, वहीं विपक्षी दलों और श्रम अधिकार कार्यकर्ताओं ने मनरेगा को समाप्त करने पर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि डिजिटल प्रक्रिया और चेहरे के सत्यापन जैसी जटिलताएं तकनीकी रूप से पिछड़े श्रमिकों के लिए बाधा बन सकती हैं।