उत्तराखंड में मौसम का ऑरेंज अलर्ट: भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी, चारधाम यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत का कड़वा रूप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण अगले 48 घंटों में राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में भीषण गर्जना, आसमानी बिजली गिरने और ओलावृष्टि (Hailstorm) की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं।

इन जिलों में दिखेगा मौसम का रौद्र रूप

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले जिलों में भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी दी गई है। वहीं, राजधानी देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी के साथ तेज बौछारें पड़ने के आसार हैं। प्रशासन ने इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और पेड़ या जर्जर इमारतों के नीचे शरण न लेने की सलाह दी है।

चारधाम यात्रा पर असर: यात्रियों के लिए नई एडवाइजरी

वर्तमान में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा अपने चरम पर है। खराब मौसम की चेतावनी को देखते हुए शासन ने चारधाम यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम की जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें। बर्फबारी और बारिश के कारण रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है और भूस्खलन (Landslides) का खतरा भी बना रहता है, इसलिए सुरक्षित स्थानों पर रुकना ही बेहतर होगा।

किसानों की बढ़ी चिंता, बागवानी को नुकसान का डर

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने उत्तराखंड के काश्तकारों की नींद उड़ा दी है। सेब, आड़ू और प्लम जैसे फलों की बागवानी के लिए यह समय बेहद संवेदनशील होता है। ओलावृष्टि से फलों के झड़ने और पेड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तैयार फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और ओलों से बचाव के लिए नेट (Net) का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों को आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। SDRF और पुलिस की टीमों को संवेदनशील रास्तों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा कर रहे लोगों को रात के समय सफर न करने की हिदायत दी गई है।