
आज 9 मई 2026, शनिवार को वैशाख मास की मासिक कालाष्टमी है। हिंदू धर्म में कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार ‘काल भैरव’ को समर्पित होता है। तंत्र-मंत्र की साधना और कष्टों के निवारण के लिए यह तिथि अचूक मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से अज्ञात भय, गंभीर बीमारी या गुप्त शत्रुओं से परेशान है, तो कालाष्टमी के दिन किए गए कुछ विशेष दान उसे इन सभी समस्याओं से तत्काल राहत दिला सकते हैं।
काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए क्यों जरूरी है दान?
भगवान काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ और ‘दंडाधिकारी’ माना जाता है। वे न्याय के देवता हैं और अनिष्ट शक्तियों का नाश करते हैं। कालाष्टमी पर दान करने से न केवल कुंडली के अशुभ ग्रहों (विशेषकर राहु और शनि) का प्रभाव कम होता है, बल्कि व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का निर्माण होता है। आज शनिवार का संयोग होने से इस दान का महत्व और भी बढ़ गया है।
भय और शत्रुओं से मुक्ति के लिए करें इन चीजों का दान
कालाष्टमी के शुभ अवसर पर राशि और कष्टों के अनुसार इन वस्तुओं का दान करना लाभकारी रहता है:
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काले तिल और उड़द की दाल: यदि आप शत्रुओं से घिरे हुए हैं या कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंसे हैं, तो आज सवा किलो काले तिल और साबुत उड़द की दाल का दान किसी जरूरतमंद को या मंदिर में करें।
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सरसों का तेल: शनि और राहु के दोषों को दूर करने के लिए मिट्टी के दीये में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें (छाया दान) और फिर उसे मंदिर में दान कर दें।
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काले कपड़े और कंबल: रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए आज काले रंग के वस्त्र या कंबल का दान गरीब असहाय लोगों को करना चाहिए।
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काजल और कपूर: नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से बचने के लिए काल भैरव के मंदिर में काजल की डिब्बी और कपूर दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
कालाष्टमी पर ‘काले कुत्ते’ की सेवा का चमत्कार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला कुत्ता भगवान काल भैरव की सवारी है। कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को खिलाया गया भोजन सीधे भैरव बाबा को स्वीकार होता है। आज शाम के समय काले कुत्ते को मीठी रोटी या तेल लगाकर रोटी खिलाएं। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है। यदि काला कुत्ता न मिले, तो किसी भी कुत्ते की सेवा की जा सकती है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
कालाष्टमी के दिन सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है। आज के दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) और झूठ बोलने से बचें। काल भैरव की पूजा हमेशा सूर्योदय के बाद या मध्यरात्रि में करना फलदायी होता है। पूजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं’ मंत्र का जाप करने से असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिल सकती है।
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