
बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा जारी नोटिस और शुरू की गई कानूनी कार्रवाई के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य में गुटखा और पान मसाला की बिक्री तथा प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद विमल इलायची के नाम पर अप्रत्यक्ष यानी सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertising) चलाने का आरोप अभिनेताओं पर लगा है। एफडीए ने इस मामले में अजय देवगन के साथ-साथ शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अब इस नियामक कार्रवाई को चुनौती देने के लिए अजय देवगन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर राहत की गुहार लगाई है।
महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अभिनेता द्वारा हाई कोर्ट जाने पर अपनी दो-टूक प्रतिक्रिया दी है। तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के अदालत जाने से विभाग की वैधानिक प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगेगी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने पुष्टि की कि नोटिस पाने वाले तीनों अभिनेताओं ने अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा था और जवाब दाखिल किए थे। सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) स्तर पर जांच और प्राथमिक सुनवाई पूरी हो चुकी है, जिसमें यह पाया गया है कि इन विज्ञापनों के जरिए राज्य के नियमों और खाद्य सुरक्षा कानूनों का सीधा उल्लंघन किया गया है।
तुकाराम मुंढे के अनुसार, मामले की प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद अब इसे आधिकारिक तौर पर फैसले (Adjudication) के लिए जॉइंट कमिश्नर के पास भेजा जा रहा है। जॉइंट कमिश्नर इस पूरे प्रकरण में कानूनी रूप से सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) हैं, जो दोनों पक्षों के तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाएंगे और जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई तय करेंगे। मुंढे ने दोहराया कि विभाग कानूनी दायरे में रहते हुए अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा और हाई कोर्ट में भी विभाग अपना पक्ष मजबूती से पेश करेगा।
महाराष्ट्र में ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006’ (FSSA) तथा कोटपा (COTPA) के तहत स्वास्थ्य के लिए हानिकारक गुटखा और पान मसाला उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और विज्ञापन पर सख्त रोक है। एफडीए का आरोप है कि ‘विमल इलायची’ जैसे माउथ फ्रेशनर के प्रचार के बहाने असल में प्रतिबंधित ‘विमल पान मसाला’ ब्रांड की रिकॉल वैल्यू को बढ़ाया जाता है, जो सीधे तौर पर भ्रामक और गैर-कानूनी विज्ञापन की श्रेणी में आता है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के दिशा-निर्देशों के तहत मशहूर हस्तियों (सेलिब्रिटीज) के लिए भी किसी उत्पाद का प्रचार करने से पहले उचित जांच-पड़ताल (Due Diligence) करना अनिवार्य है। इसी आधार पर अभिनेताओं की जवाबदेही तय की जा रही है, जिस पर अब बॉम्बे हाई कोर्ट और एफडीए के जॉइंट कमिश्नर की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
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