
अक्सर लोग अपनी गाढ़ी कमाई को बचत खाते में यूं ही पड़ा रहने देते हैं, जहां उन्हें नाममात्र का ब्याज मिलता है। यदि आपके पास ₹2 लाख या उससे अधिक का अतिरिक्त फंड है, जिसकी आवश्यकता आपको आगामी एक या डेढ़ महीने में किसी काम, यात्रा, व्यापारिक लेन-देन या स्कूल-कॉलेज की फीस भरने के लिए पड़ने वाली है, तो उस पैसे को साधारण सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय बैंक की शॉर्ट-टर्म फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पार्क करना एक समझदारी भरा वित्तीय कदम साबित हो सकता है। देश के सबसे बड़े वाणिज्यिक बैंक ‘भारतीय स्टेट बैंक’ (SBI) द्वारा 7 दिनों से लेकर 45 दिनों तक की अत्यंत अल्पकालिक अवधि के लिए भी एफडी की सुविधा दी जाती है। इस समयावधि पर बैंक आम ग्राहकों को 3.50% से 3.55% तक और वरिष्ठ नागरिकों को इससे भी अधिक ब्याज दर की पेशकश करता है। ऐसे में यदि कोई निवेशक ₹2 लाख की राशि इस योजना में 7 दिन, 15 दिन, 30 दिन या पूरे 45 दिनों के लिए जमा करता है, तो उसे वास्तविक रूप से कितने रुपये का मुनाफा होगा, इसका पूरा सटीक हिसाब-किताब जानना बेहद दिलचस्प है।
बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले रिटर्न की गणना वार्षिक दर और दिनों की वास्तविक संख्या के आधार पर साधारण ब्याज (Simple Interest) के फॉर्मूले से की जाती है। यदि आप एसबीआई में ₹2,00,000 की मूलधन राशि 3.55% प्रतिवर्ष की ब्याज दर पर जमा करते हैं, तो एक वर्ष यानी 365 दिनों में कुल ब्याज ₹7,100 बनता है, जो प्रतिदिन के हिसाब से लगभग ₹19.45 बैठता है। अब यदि आप इस पैसे को न्यूनतम 7 दिनों के लिए जमा करते हैं, तो आपको 7 दिनों में लगभग ₹136 का शुद्ध ब्याज प्राप्त होगा और मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹2,00,136 हो जाएगी। यदि आप इसे 15 दिनों के लिए रखते हैं, तो आपका कुल ब्याज ₹292 बनेगा और कुल मैच्योरिटी राशि ₹2,00,292 होगी। इसी तरह 30 दिनों (एक माह) की अवधि चुनने पर आपको लगभग ₹584 का ब्याज मिलेगा, जिससे कुल राशि ₹2,00,584 हो जाएगी। वहीं इस बकेट की अधिकतम अवधि यानी पूरे 45 दिनों के लिए ₹2 लाख जमा रखने पर आपको ₹875 का कुल ब्याज हासिल होगा और मैच्योरिटी पर आपके बैंक खाते में ₹2,00,875 क्रेडिट किए जाएंगे।
भारतीय स्टेट बैंक अपने वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen) ग्राहकों को सभी अवधियों की एफडी पर 0.50% (50 बेसिस प्वाइंट) का अतिरिक्त ब्याज प्रदान करता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जहां सामान्य नागरिकों को 7 से 45 दिनों की एफडी पर 3.55% की दर मिलती है, वहीं 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को इसी अवधि पर 4.05% वार्षिक दर से ब्याज दिया जाता है। इस बढ़ी हुई ब्याज दर के आधार पर ₹2 लाख के निवेश पर वरिष्ठ नागरिकों का एक दिन का ब्याज लगभग ₹22.19 बनता है। यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 7 दिनों के लिए ₹2 लाख जमा करता है, तो उसे ₹155 का ब्याज मिलेगा। 15 दिनों की अवधि पर यह ब्याज बढ़कर ₹333 हो जाता है। यदि वे 30 दिनों के लिए यह एफडी रखते हैं, तो उन्हें ₹666 का ब्याज प्राप्त होगा, और पूरे 45 दिनों की अवधि पूरी होने पर उन्हें ₹999 का कुल ब्याज मिलेगा, जिससे उनकी कुल वापसी राशि ₹2,00,999 हो जाएगी। यद्यपि यह रकम देखने में बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन जोखिम-मुक्त तरीके से मात्र कुछ ही हफ्तों में अतिरिक्त आय अर्जित करने के लिहाज से यह बेहद सुरक्षित विकल्प है।
ज्यादातर बैंक बचत खातों (Savings Account) पर सालाना 2.70% से 3.00% के आसपास ही ब्याज देते हैं। एसबीआई के बचत खाते में सामान्यतः 2.70% प्रतिवर्ष का ब्याज दिया जाता है। यदि आप ₹2 लाख की राशि अपने सेविंग्स खाते में 45 दिनों तक यूं ही छोड़ देते हैं, तो आपको 2.70% की दर से केवल ₹665 के आसपास ब्याज मिलेगा। वहीं उसी पैसे को 7 से 45 दिन की शॉर्ट-टर्म एफडी में ट्रांसफर कर देने पर आपको ₹875 से लेकर ₹999 तक का ब्याज मिलता है। इसका मतलब यह है कि बिना किसी अतिरिक्त जोखिम के, केवल एक क्लिक पर पैसे को एफडी में बदलने से आपको सीधे ₹210 से ₹334 तक का अतिरिक्त फायदा हो जाता है। वित्तीय योजनाकारों का मानना है कि आपातकालीन फंड (Emergency Fund) का वह हिस्सा जिसे तुरंत खर्च नहीं करना है, उसे इस तरह की छोटी अवधि की एफडी में रोल-ओवर करते रहना पैसे के क्षरण को रोकने का बेहतरीन तरीका है।
अक्सर छोटे निवेशकों के मन में यह संशय रहता है कि बैंक एफडी के ब्याज पर टीडीएस कटने से उनका मुनाफा कम तो नहीं हो जाएगा। आयकर अधिनियम की धारा 194A के तहत बैंकों द्वारा एफडी के ब्याज पर टीडीएस तभी काटा जाता है जब एक वित्तीय वर्ष के दौरान एक ही बैंक की सभी शाखाओं को मिलाकर कुल ब्याज आय सामान्य नागरिकों के लिए ₹40,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 की निर्धारित सीमा को पार कर जाए। चूंकि ₹2 लाख की 45 दिन की एफडी पर मिलने वाला कुल ब्याज अधिकतम ₹875 से ₹1,000 के भीतर ही रहता है, इसलिए इस पर बैंक द्वारा किसी भी प्रकार का टीडीएस (TDS) काटने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, आयकर नियमों के अनुसार यह ब्याज आपकी कुल वार्षिक आय में ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) के तहत जुड़ता है और निवेशक को अपने संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार इस पर स्वैच्छिक टैक्स अदा करना होता है।
शॉर्ट-टर्म एफडी का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी तरलता (Liquidity) होती है, परंतु निवेशकों को समय से पहले एफडी तोड़ने के नियमों से भी अवगत होना चाहिए। एसबीआई के नियमों के मुताबिक, 7 दिन की न्यूनतम लॉक-इन अवधि से पहले किसी भी एफडी को तोड़ा नहीं जा सकता। यदि कोई ग्राहक 7 दिन पूरे होने से पहले ही पैसा निकाल लेता है, तो बैंक द्वारा कोई ब्याज देय नहीं होता है। 7 दिन पूरे होने के बाद यदि आप मैच्योरिटी से पहले एफडी बंद करते हैं, तो बैंक लागू ब्याज दर पर 0.50% तक की पेनल्टी काटता है। इसके अलावा, एफडी बनवाते समय ऑटो-रिन्यूअल (Auto-Renewal) विकल्प को लेकर भी सतर्क रहना चाहिए। यदि आपने ऑटो-रिन्यूअल टिक कर दिया है और 45 दिन पूरे होने पर आपने पैसा नहीं निकाला, तो बैंक स्वतः ही उस रकम को अगले 45 दिनों के लिए फिर से लॉक कर देगा। इसलिए यदि आपको 45 दिन बाद पैसे की तत्काल आवश्यकता है, तो ‘क्रेडिट टू अकाउंट’ (Credit to Account) का विकल्प चुनना सबसे सुरक्षित रहता है।
आज के डिजिटल युग में शॉर्ट-टर्म एफडी खोलने के लिए बैंक की शाखा में जाकर कतार में लगने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। यदि आपके पास एसबीआई की इंटरनेट बैंकिंग या योनो (YONO) ऐप की सुविधा है, तो आप इसे चंद मिनटों में सक्रिय कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले योनो ऐप में लॉगिन करें और ‘Deposits’ वाले विकल्प पर जाएं। वहां ‘Open Fixed Deposit’ पर क्लिक करें और जितनी राशि जमा करनी है (जैसे ₹2,00,000) वह दर्ज करें। इसके बाद अवधि के चयन में ‘Days’ का विकल्प चुनें और 7 से 45 के बीच जितने भी दिन के लिए आप निवेश करना चाहते हैं, वह संख्या भरें। ब्याज भुगतान के विकल्प में ‘On Maturity’ का चयन करें ताकि पूरा ब्याज अवधि खत्म होने पर मूलधन के साथ सीधे आपके बचत खाते में आ जाए। अंत में नॉमिनी और नियमों की पुष्टि करते ही आपकी ई-एफडी (e-FD) तत्काल बन जाएगी, जिसका डिजिटल रसीद पत्र आप तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं।
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