हवाई सफर फिर होगा महंगा: 1 नवंबर से ATF की कीमतों में 1% का नया उछाल, लगातार चौथे महीने बढ़े दाम, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

त्योहारी सीजन और सर्दियों की छुट्टियों के ठीक मुहाने पर हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 नवंबर से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ (ATF) की कीमतों में 1% का ताजा इजाफा कर दिया है। यह लगातार चौथा महीना है जब देश में विमान ईंधन के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के बाद अब नवंबर में भी जेट फ्यूल के भाव चढ़ने से एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत में बड़ा इजाफा तय माना जा रहा है। चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च में अकेले ईंधन की हिस्सेदारी 40 से 45 प्रतिशत तक होती है, इसलिए तेल कंपनियों के इस ताजा फैसले का सीधा असर आगामी दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों की कीमतों पर पड़ना लगभग तय है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमत में प्रति लीटर लगभग ₹1.37 (लगभग 1%) की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद राजधानी में जेट फ्यूल का भाव बढ़कर ₹138.50 प्रति लीटर (लगभग ₹1,38,500 प्रति किलोलीटर) के स्तर पर पहुंच गया है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय बिक्री कर और मूल्य वर्धित कर (VAT) की भिन्न दरों के कारण मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में भी इसकी कीमतों में आनुपातिक उछाल देखा गया है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब एटीएफ की दरें बढ़कर लगभग ₹1,24,000 प्रति किलोलीटर के पार निकल गई हैं, जबकि कोलकाता और चेन्नई में भी स्थानीय करों के चलते एयरलाइंस को ईंधन के लिए अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही है। लगातार चार महीनों में हुई इस संचयी वृद्धि ने विमानन उद्योग के वित्तीय गणित को काफी हद तक प्रभावित कर दिया है।

घरेलू तेल कंपनियों द्वारा हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों (रुपया बनाम डॉलर) के आधार पर एटीएफ और वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों के दामों की समीक्षा की जाती है। वैश्विक बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के कारण रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में विमानन ईंधन के बेंचमार्क रेट्स में मजबूती दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के मूल्य में आई हलचल ने भी आयातित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की लैंडिंग लागत को बढ़ा दिया है। इन्हीं अंतरराष्ट्रीय कारकों को संतुलित करने के लिए तेल कंपनियों को घरेलू बाजार में एटीएफ की कीमतों में लगातार संशोधन करना पड़ रहा है।

त्योहारी सीजन में छठ, दिवाली के बाद की यात्राओं और साल के अंत में विंटर वेकेशन को लेकर उड़ानों की मांग पहले से ही अपने चरम पर है। ऐसे में जेट फ्यूल के महंगे होने से एयरलाइंस के मुनाफे पर सीधा दबाव बन गया है। एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट एयरलाइंस जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर के पास परिचालन लागत में हुई इस बढ़ोतरी को यात्रियों पर डालने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता। माना जा रहा है कि एयरलाइंस आगामी दिनों में बेस फेयर बढ़ाने के बजाय टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज (Fuel Surcharge) में ₹300 से ₹600 तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकती हैं। खासकर दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु, मुंबई-गोवा और दिल्ली-पटना जैसे व्यस्त रूट्स पर अंतिम समय में बुक होने वाले टिकटों के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक और महंगे हो सकते हैं।

भारतीय विमानन क्षेत्र पहले से ही कई ढांचागत चुनौतियों से जूझ रहा है। एक तरफ वैश्विक स्तर पर विमानों के इंजनों की सप्लाई चेन बाधित होने के कारण कई विमान ग्राउंडेड हैं, तो दूसरी तरफ एयरपोर्ट हैंडलिंग चार्ज और लीज रेंट में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में फ्यूल की कीमतों का लगातार चार महीने तक बढ़ना एयरलाइंस के कैश फ्लो पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आई, तो चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में एयरलाइन कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे विमानन उद्योग के त्वरित सुधार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

1 नवंबर को किए गए इस ताजा मूल्य संशोधन में तेल कंपनियों ने केवल हवाई ईंधन को ही महंगा नहीं किया है, बल्कि होटल, रेस्तरां और ढाबों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी ₹10 का इजाफा किया है। हालांकि, आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह रही कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें भी पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में ईंधन महंगाई का तात्कालिक झटका केवल एविएशन सेक्टर और बाहर खान-पान से जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रखा गया है।

यदि आप आगामी हफ्तों या नए साल के जश्न के लिए हवाई सफर की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा विशेषज्ञों की सलाह है कि टिकट बुकिंग में अब और देरी न करें। आमतौर पर जैसे-जैसे यात्रा की तारीख नजदीक आती है और फ्यूल की बढ़ी हुई कीमतें सिस्टम में पूरी तरह लागू होती हैं, वैसे-वैसे लास्ट-मिनट डायनामिक फेयर तेजी से आसमान छूने लगता है। इसके अलावा, यात्री मंगलवार या बुधवार जैसे नॉन-पीक दिनों की फ्लाइट्स चुनकर, कनेक्टिंग फ्लाइट्स का सहारा लेकर या विभिन्न क्रेडिट कार्ड्स व ट्रैवल पोर्टल्स पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स और डिस्काउंट कूपनों का उपयोग करके बढ़ी हुई टिकट दरों के असर को काफी हद तक कम कर सकते हैं।