Thursday , October 29 2026

वाराणसी में समाजवादी पार्टी की जीत पर ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सुभासपा (SBSP) प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने वाराणसी में हाल ही में संपन्न हुए एक चुनाव परिणाम को लेकर बेहद तीखा और सियासी सरगर्मी बढ़ाने वाला बयान दिया है। वाराणसी में समाजवादी पार्टी (SP) की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि यह आम जनता का नहीं, बल्कि केवल पढ़े-लिखे और खास वर्ग के लोगों का वोट है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। एनडीए (NDA) गठबंधन के प्रमुख घटक दल के नेता राजभर के इस कटाक्ष को विपक्षी दल समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला माना जा रहा है, जिस पर राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं।

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र बिंदु माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी की हालिया चुनावी सफलता ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। इस जीत के बाद जब पत्रकारों ने सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से उनकी प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि इस चुनाव में जो मतदान हुआ है, वह आम गरीब, मजदूर और वंचित वर्ग का नहीं बल्कि शहरी व पढ़े-लिखे तबके का वोट था। राजभर के इस बयान को विरोधी दलों द्वारा आम जनता और शिक्षित वर्ग का अपमान बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजभर का यह बयान शहरी मतदाताओं के मिजाज और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर उनकी खास रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह एनडीए के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

ओमप्रकाश राजभर के इस बयान के सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया है। सपा प्रवक्ताओं और स्थानीय नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि ओमप्रकाश राजभर अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने से बौखला गए हैं और अब वे जनता का अपमान करने पर उतर आए हैं। सपा का कहना है कि वाराणसी की जनता ने भाजपा और उसके सहयोगियों की नीतियों से त्रस्त होकर बदलाव के पक्ष में मतदान किया है और यह जीत आम आदमी, किसान, युवा और शोषित वर्ग की सच्ची जीत है। विपक्षी नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव हार जाते हैं तो जनता पर सवाल उठाए जाते हैं और जब जीत जाते हैं तो उसे पढ़ा-लिखा वर्ग बताकर खारिज करने की कोशिश की जाती है।

ओमप्रकाश राजभर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी स्थानीय निकाय और अन्य राजनीतिक गतिविधियों की सुगबुगाहट तेज है। एनडीए गठबंधन के भीतर भी राजभर के इस तरह के बयानों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। अपने बयानों से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले राजभर ने इस बार जिस तरह से मतदाताओं के वर्ग विशेष को लेकर टिप्पणी की है, उससे जातिगत और वर्गगत राजनीति की बहस एक बार फिर से केंद्र में आ गई है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस बयान पर अन्य राजनीतिक दल किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और यह बयान यूपी की राजनीति में कितना तूल पकड़ता है।