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भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर कस्टम्स के नए नियम 20 अक्टूबर से होंगे लागू, जानें किन सामानों को मिलेगी टैरिफ और ड्यूटी में छूट

भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से आधिकारिक रूप से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते के जमीनी क्रियान्वयन के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) तथा दोनों देशों के सीमा शुल्क प्राधिकारियों ने कस्टम्स के नए संचालन नियमों को अंतिम रूप दे दिया है। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात होने वाले उत्पादों को निर्धारित रियायती सीमा शुल्क (Preferential Tariff) का लाभ पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से मिले। दशहरे के त्योहारी अवसर से लागू हो रहा यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच वस्तुओं के व्यापार को विस्तार देगा, बल्कि न्यूजीलैंड द्वारा अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के प्रस्तावित निवेश के लिए भी एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करेगा।

सीमा शुल्क विभाग द्वारा 20 अक्टूबर से लागू किए जा रहे इन नए प्रावधानों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ (Rules of Origin) यानी उत्पत्ति के नियम हैं। इसके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि किसी भी सामान पर रियायती या शून्य सीमा शुल्क का दावा केवल तभी स्वीकार किया जाएगा जब आयातक वैध ‘सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन’ (Certificate of Origin) प्रस्तुत करेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि तीसरे देशों के सामान को केवल न्यूजीलैंड या भारत के रास्ते डायवर्ट करके टैक्स छूट का अनुचित लाभ उठाने (Round-tripping या Transshipment) की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। भारतीय सीमा शुल्क नियम (CAROTAR) के कड़े प्रावधानों के तहत आयातकों को माल के वास्तविक निर्माण, मूल्य संवर्धन (Value Addition) और सीधे परिवहन (Direct Shipment) के पुख्ता प्रमाण अपने बिल ऑफ एंट्री में दाखिल करने होंगे।

इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय उद्योग जगत और निर्यातकों के लिए है। 20 अक्टूबर 2026 से न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश करने वाले भारत के 100 प्रतिशत निर्यात उत्पादों पर सीमा शुल्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत से जाने वाले वस्त्र, परिधान, चमड़े के उत्पाद, जूते, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, फार्मास्यूटिकल्स, हस्तशिल्प और रत्न-आभूषण अब न्यूजीलैंड में बिना किसी कस्टम ड्यूटी के पहुंचेंगे। इससे भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मकता ऑस्ट्रेलियाई, चीनी और यूरोपीय सामानों के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी। विशेष रूप से भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-intensive sectors) जैसे कपड़ा और चमड़ा उद्योग को न्यूजीलैंड के प्रीमियम बाजार में बड़ा विस्तार मिलने की उम्मीद है।

न्यूजीलैंड से भारत में आयात होने वाले सामानों के मामले में भारत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। समझौते के तहत 20 अक्टूबर से न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत मौजूदा आयातों पर तत्काल प्रभाव से शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 82 प्रतिशत तक ले जाया जाएगा। भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले उच्च गुणवत्ता वाले वूल (ऊन), लकड़ी के उत्पाद, पल्प, चुनिंदा औद्योगिक रसायन, मशीनरी और उन्नत तकनीकी उपकरणों पर सीमा शुल्क घटाने या समाप्त करने की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, चुनिंदा बागवानी उत्पादों और फल-सब्जियों पर भी शर्तों के साथ टैरिफ रियायतें दी गई हैं। हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील घरेलू डेरी उद्योग (दूध, मक्खन, पनीर) और स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रमुख कृषि उत्पादों को शून्य शुल्क की इस खुली छूट से पूरी तरह बाहर रखा है।

नए कस्टम्स फ्रेमवर्क के तहत व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को प्राथमिकता दी गई है। सीमा शुल्क विभाग ने डिजिटल ‘ट्रेड पोर्टल’ और ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन की व्यवस्था को मान्यता दी है ताकि बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर कागजी कार्रवाई के कारण कार्गो क्लीयरेंस में देरी न हो। दोनों देशों के सीमा शुल्क ब्रोकरों और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों को सलाह दी गई है कि वे 20 अक्टूबर से पहले नए हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS Code) टैरिफ वर्गीकरण की जांच कर लें। यदि किसी खेप में उत्पत्ति के नियमों या मूल्य संवर्धन की शर्तों में विसंगति पाई जाती है, तो कस्टम अधिकारी रियायती शुल्क को खारिज कर सामान्य लागू दर (Basic Customs Duty) वसूल सकते हैं और मामले की जांच शुरू कर सकते हैं।

वर्तमान में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार अपेक्षाकृत सीमित दायरे में रहा है, लेकिन 20 अक्टूबर से लागू होने वाले इस एफटीए से दोनों देशों का व्यापारिक आकार अगले पांच वर्षों में दोगुना से अधिक होने की उम्मीद है। शुल्क मुक्त पहुंच मिलने से न केवल वस्तुओं की आवाजाही सुगम होगी, बल्कि पेशेवरों, सेवा क्षेत्र और तकनीकी सहयोग को भी नया संबल मिलेगा। विशेष रूप से भारतीय आईटी कंपनियों, परामर्शदाताओं और छात्रों के लिए न्यूजीलैंड में अवसर सुगम होंगे। सीमा शुल्क विभाग के नए नियमों का समयबद्ध क्रियान्वयन इस समझौते को कागजी दस्तावेज से निकालकर दोनों देशों के कारोबारियों के लिए वास्तविक वाणिज्यिक मुनाफे में तब्दील करने का निर्णायक आधार बनेगा।