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ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर कसेगा नकेल

डिजिटल इंडिया के इस आधुनिक दौर में 10 मिनट में घर की चौखट पर राशन और ग्रोसरी पहुंचाने वाले क्विक-कॉमर्स (Quick Commerce) ऐप्स जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट का इस्तेमाल दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ता जा रहा है। लोग अपने समय की बचत के लिए रोजाना दूध, ब्रेड, पैक्ड फूड और राशन ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे हैं। हालांकि, इस बढ़ती सहूलियत के बीच देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को एक गंभीर समस्या का सामना भी करना पड़ रहा है। कई बार ऑनलाइन ऑर्डर करने पर ऐसे सामान डिलीवर कर दिए जाते हैं जिनकी ‘बेस्ट बिफोर डेट’ (Best Before Date) या एक्सपायरी डेट बहुत नजदीक होती है या फिर ऐप पर ऑर्डर करते समय यह जानकारी गायब रहती है। इसी गंभीर जनसमस्या और ग्राहकों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार और उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में जुट गया है। सरकार के पास ऐसे कई सुझाव आए हैं जिनमें ‘बेस्ट बिफोर डेट’ न दर्शाने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने की सिफारिश की गई है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) को लंबे समय से इस बात की शिकायतें मिल रही थीं कि कई ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स लीगल मेट्रोलॉजी नियमों (Legal Metrology Rules) का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी पैक्ड फूड या किराना सामान को बेचते समय उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, वजन, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और मूल देश का नाम स्पष्ट रूप से दिखना अनिवार्य है। लेकिन ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स अक्सर इन जानकारियों को छुपा लेते हैं या फिर बहुत छोटे अक्षरों में दिखाते हैं। सरकार अब जिन सुझावों पर विचार कर रही है, उनके तहत अगर कोई प्लेटफॉर्म ऐप की लिस्टिंग में ‘बेस्ट बिफोर’ की स्पष्ट जानकारी नहीं देगा, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और उसका लाइसेंस भी रद्द करने जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को बासी, खराब या एक्सपायरी के कगार पर खड़ा सामान न थमाया जा सके।

10 से 15 मिनट की सुपरफास्ट डिलीवरी के इस बिजनेस मॉडल में कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने और डार्क स्टोर्स (Dark Stores) में रखे पुराने स्टॉक को खाली करने के लिए अक्सर कम शेल्फ-लाइफ वाले सामानों को पहले बेच देती हैं। जब कोई ग्राहक दुकान से जाकर किराना का सामान खरीदता है, तो वह पैकेट को पलटकर खुद एक्सपायरी डेट चेक कर लेता है, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह आजादी छीन ली जाती है। ग्राहक सामान हाथ में आने के बाद ही देख पाता है कि ब्रेड, पनीर, छाछ या स्नैक्स की डेट खत्म होने वाली है। कई मामलों में तो सामान घर पहुंचने तक एक्सपायर भी हो चुका होता है, जिसके बाद रिफंड पाने के लिए कस्टमर केयर से लंबी बहस करनी पड़ती है। सरकार का नया नियम लागू होने के बाद ग्राहकों को ऐप पर ही यह दिखेगा कि जो सामान वे कार्ट में जोड़ रहे हैं, उसकी शेल्फ लाइफ कितने दिन बची है, जिससे वे अपनी मर्जी से फैसला ले सकेंगे।

यदि सरकार इन सुझावों को अंतिम रूप देकर नए दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी कर देती है, तो इसका सीधा असर भारत के पूरे ई-कॉमर्स और रिटेल मार्केट पर पड़ेगा। कंपनियों को अपने टेक-सिस्टम और ऐप इंटरफेस में बड़े बदलाव करने होंगे, जहां हर लिस्टेड प्रोडक्ट के नीचे उसकी ‘बेस्ट बिफोर डेट’ रियल-टाइम में अपडेट होगी। इससे न केवल क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कंपनियों को अपने वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट को भी और अधिक पारदर्शी बनाना पड़ेगा। उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि यह आधुनिक डिजिटल दौर में भारतीय ग्राहकों को एक सशक्त और जागरूक खरीदार बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला साबित होगा। सरकार बहुत जल्द इस संदर्भ में सभी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अंतिम नियमों का ड्राफ्ट पेश कर सकती है।