
भारतीय रेलवे को दुनिया का सबसे बड़ा प्रदूषण-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन नेटवर्क बनाने के संकल्प के तहत उत्तर मध्य रेलवे (North Central Railway – NCR) ने सौर ऊर्जा के मोर्चे पर एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों (अप्रैल से सितंबर) के दौरान उत्तर मध्य रेलवे ने अपने विभिन्न स्टेशनों, प्रशासनिक भवनों, कार्यशालाओं और शेड्स पर स्थापित रूफटॉप सोलर पैनल्स के जरिए कुल 12.3 मिलियन यूनिट (kWh) सौर बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। इस हरित ऊर्जा के उपयोग से रेलवे को न केवल पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिली, बल्कि अपने बिजली बिलों में सीधे तौर पर ₹7.7 करोड़ के भारी राजस्व की सीधी बचत भी हासिल हुई है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के वर्ष 2030 तक ‘शून्य शुद्ध कार्बन उत्सर्जक’ (Net Zero Carbon Emitter) बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
उत्तर मध्य रेलवे का भौगोलिक विस्तार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के हिस्सों तक फैला हुआ है। इस पूरे जोन में सौर ऊर्जा का उत्पादन इसके तीनों प्रमुख रेल मंडलों—प्रयागराज, आगरा और झांसी—में व्यापक स्तर पर किया जा रहा है:
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स्टेशनों और प्लेटफॉर्म शेड्स का उपयोग: प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, आगरा कैंट, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, मथुरा जंक्शन, अलीगढ़ और सूबेदारगंज जैसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों की छतों और प्लेटफॉर्म टीन शेड्स पर उच्च-दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक (PV) पैनल्स लगाए गए हैं।
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रेलवे कार्यशालाएं और लोको शेड्स: झांसी वर्कशॉप, कानपुर लोको शेड, सूबेदारगंज वर्कशॉप और आगरा वैगन मरम्मत कारखानों की विशालकाय छतों का शत-प्रतिशत उपयोग सोलर ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जा रहा है।
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प्रशासनिक और आवासीय परिसर: जोनल मुख्यालय (सूबेदारगंज, प्रयागराज), मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालयों, रेलवे अस्पतालों और रेलवे कॉलोनियों की सार्वजनिक इमारतों पर ग्रिड-कनेक्टेड सोलर रूफटॉप सिस्टम पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं।
उत्तर मध्य रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस छमाही में दर्ज की गई प्रगति इस प्रकार है:
| विवरण (Parameter) | पहली छमाही का आंकड़ा (Achievement) |
| कुल उत्पादित सौर बिजली | 12.3 मिलियन यूनिट (Million kWh) |
| राजस्व में कुल शुद्ध बचत | ₹7.7 करोड़ |
| कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी | लगभग 10,000+ मीट्रिक टन |
| समतुल्य पारंपरिक कोयले की बचत | हजारों टन जीवाश्म ईंधन की बचत |
उत्पादित सौर बिजली का सीधा उपयोग स्टेशनों पर पंखे, एलईडी लाइट्स, वाटर कूलर, लिफ्ट, एस्केलेटर, कम्प्यूटरीकृत टिकटिंग काउंटर और प्लेटफॉर्म डिस्प्ले सिस्टम को 24 घंटे चलाने के लिए किया जा रहा है। इससे दिन के समय ग्रिड से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता लगभग समाप्त हो गई है।
उत्तर मध्य रेलवे द्वारा स्थापित अधिकांश सोलर संयंत्र ‘नेट मीटरिंग’ (Net Metering) प्रणाली से जुड़े हुए हैं। इसके तहत जब छुट्टियों के दिनों या दिन के शांत घंटों में रेलवे परिसरों में बिजली की खपत सौर उत्पादन से कम होती है, तो बची हुई अतिरिक्त सौर ऊर्जा सीधे राज्य बिजली बोर्ड (State Power Discoms) के ग्रिड में स्वतः फीड हो जाती है। इस अतिरिक्त बिजली का क्रेडिट रेलवे के मासिक बिजली बिलों में एडजस्ट किया जाता है, जिससे रेलवे को दोहरा वित्तीय लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही, ऑटोमैटिक सोलर पैनल क्लीनिंग रोबोट्स और नियमित मेंटेनेंस की बदौलत पैनलों की बिजली उत्पादन क्षमता में 15 से 20 प्रतिशत तक की निरंतरता देखी गई है।
रेलवे प्रशासन केवल छतों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और मुख्य विद्युत इंजीनियर (CEE) के नेतृत्व में अब रेलवे ट्रैक के दोनों किनारों पर खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि और यार्डों के आसपास मेगा ग्राउंड-माउंटेड सोलर पार्क स्थापित करने की विस्तृत कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है:
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ट्रैक्शन पावर के लिए सोलर ऊर्जा: भविष्य में ट्रेनों के इलेक्ट्रिक इंजनों (ओएचई लाइन) को सीधे सौर ऊर्जा से दौड़ाने के लिए रेलवे एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (REMCL) के साथ मिलकर 25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़ने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं।
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नई सौर क्षमताओं का विस्तार: वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में अतिरिक्त 5 मेगावाट से अधिक क्षमता के नए रूफटॉप व ग्राउंड माउंटेड सोलर पैनल्स जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
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पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश: भारतीय रेल का यह अभिनव प्रयोग न केवल वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से निपटने में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि यह साबित करता है कि सरकारी विभाग किस तरह आधुनिक हरित तकनीकों को अपनाकर अपने सार्वजनिक खर्च में करोड़ों की बचत कर सकते हैं।
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