Thursday , September 17 2026

FASTag OneTag: बिना नया स्टीकर खरीदे घर बैठे बदलें अपना बैंक, पुराना बैलेंस भी मिलेगा वापस; जानिए कैसे काम करती है यह नई पोर्टेबिलिटी सुविधा

राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए टोल भुगतान प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव आ चुका है। अक्सर देखा जाता था कि यदि किसी बैंक के फास्टैग वॉलेट में बार-बार सर्वर एरर आता, केवाईसी अपडेट में अड़चन आती या खराब ग्राहक सेवा मिलती, तो वाहन मालिक को अपना बैंक बदलने के लिए गाड़ी की विंडशील्ड से पुराना स्टीकर खुरचकर निकालना पड़ता था। इसके बाद पुराना खाता बंद कराकर नए बैंक से नया फिजिकल फास्टैग खरीदना पड़ता था।

वाहन चालकों की इसी बड़ी परेशानी को दूर करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के सहयोग से नई ‘OneTag’ पोर्टेबिलिटी सुविधा शुरू की है। ठीक वैसे ही जैसे आप अपना मोबाइल नंबर बदले बिना एयरटेल, जियो या वीआई में सिम पोर्ट करा लेते हैं, अब आपकी गाड़ी के शीशे पर लगा आरएफआईडी (RFID) स्टीकर और उसकी ‘टैग आईडी’ वही रहेगी, लेकिन उससे जुड़ा बैंक (इश्यूअर बैंक) पूरी तरह बदल जाएगा।

पोर्टेबिलिटी की इस नई व्यवस्था को एनईटीसी (NETC) नेटवर्क स्तर पर एकीकृत किया गया है। इसमें वाहन मालिक को मिलने वाले प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

विवरण पहले की व्यवस्था नई OneTag पोर्टेबिलिटी
फिजिकल स्टीकर पुराना स्टीकर उखाड़ना और नया लगाना पड़ता था वही पुराना स्टीकर काम करेगा (बदलने की जरूरत नहीं)
फास्टैग आईडी (Tag ID) हर नए टैग के साथ नई आईडी मिलती थी मौजूदा टैग आईडी पूरी तरह बरकरार रहेगी
बैंक बदलने की सुविधा लंबी कागजी प्रक्रिया और नया रजिस्ट्रेशन राजमार्गयात्रा ऐप से 4 स्टेप्स में ऑनलाइन पोर्ट
पुराना बैलेंस व सिक्योरिटी कई बार रिफंड में महीनों का समय लगता था पुराने बैंक खाते/वॉलेट में सीधे रिफंड सेटलमेंट

पोर्टेबिलिटी का अनुरोध पूरा होते ही पुराना जारीकर्ता बैंक आपके पिछले फास्टैग खाते का अंतिम वित्तीय निपटान (Financial Settlement) करेगा:

  • सिक्योरिटी डिपॉजिट व शेष बैलेंस: यदि आपके पुराने फास्टैग वॉलेट में ₹500 या ₹1,000 की शेष राशि या ₹200 की सिक्योरिटी डिपॉजिट फंसी है, तो पुराना बैंक सभी पेंडिंग टोल क्लीयरेंस के बाद उस पूरी राशि को सीधे आपके लिंक किए गए प्राथमिक बैंक बचत खाते या यूपीआई खाते में वापस (Refund) ट्रांसफर कर देगा।

  • नए बैंक में नई शुरुआत: आपका पुराना फास्टैग स्टीकर नए बैंक के सिस्टम में मैप हो जाएगा, जिसके बाद आप नए बैंक के ऐप, गूगल पे, फोनपे या पेटीएम के माध्यम से सामान्य तरीके से नया रिचार्ज शुरू कर सकेंगे।

‘OneTag’ पोर्टेबिलिटी प्रक्रिया को एनएचएआई के आधिकारिक ‘राजमार्गयात्रा’ (Rajmargyatra) मोबाइल ऐप में लाइव किया गया है। इसे पूरा करने के लिए नीचे दिए गए क्रम का पालन करें:

  1. ऐप में लॉगिन करें: अपने स्मार्टफोन पर ‘Rajmargyatra App’ इंस्टॉल करें और उसी मोबाइल नंबर से ओटीपी (OTP) डालकर लॉगिन करें जो आपके मौजूदा फास्टैग के साथ रजिस्टर्ड है।

  2. OneTag विकल्प चुनें: ऐप की होम स्क्रीन पर दिख रहे नए ‘OneTag’ आइकन पर टैप करें और ‘Check Portability’ पर क्लिक करें।

  3. गाड़ी का नंबर दर्ज करें: ‘Get Started’ पर क्लिक करके अपना वाहन पंजीकरण नंबर (Vehicle Registration Number) दर्ज करें। सिस्टम स्वचालित रूप से चेक करेगा कि आपका टैग पोर्ट किए जाने योग्य है या नहीं।

  4. विवरण सत्यापित करें: स्क्रीन पर प्रदर्शित मौजूदा बैंक और वाहन की जानकारी को क्रॉस-चेक करने के बाद ‘Proceed’ पर क्लिक करें और रजिस्टर्ड नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करके सहमति (Consent) दें।

  5. नया बैंक चुनें: एनईटीसी नेटवर्क से जुड़े भागीदार बैंकों की सूची में से उस बैंक का चयन करें जिसमें आप अपने फास्टैग को ट्रांसफर करना चाहते हैं।

  6. वेरिफिकेशन और एक्टिवेशन: पुराने बैंक से क्लीयरेंस और रिफंड रिक्वेस्ट प्रोसेस होते ही आपका मौजूदा फिजिकल टैग नए बैंक से सफलतापूर्वक लिंक हो जाएगा।

प्रक्रिया में किसी भी रुकावट या आवेदन निरस्त होने से बचने के लिए इन शर्तों की जांच पहले ही कर लें:

  • नेगेटिव बैलेंस न हो: मौजूदा फास्टैग वॉलेट में बैलेंस माइनस में नहीं होना चाहिए। यदि कोई टोल बकाया है, तो पहले सामान्य रिचार्ज कर लें।

  • कोई पेंडिंग चालान या विवाद न हो: वाहन पर किसी टोल प्लाजा का पेंडिंग चार्ज या गैर-कानूनी गतिविधि का नोटिस दर्ज न हो।

  • टैग ब्लैकलिस्ट या डैमेज न हो: यदि आपके फास्टैग की चिप भौतिक रूप से टूट-फूट चुकी है या ‘One Vehicle, One FASTag’ के तहत ब्लैकलिस्ट है, तो वह पोर्ट नहीं होगा; ऐसी स्थिति में नया टैग ही लेना पड़ेगा।

  • कूलिंग पीरियड: एक बार बैंक पोर्ट करने के बाद अगले कुछ महीनों (कूलिंग-ऑफ अवधि) तक उसी टैग को दोबारा किसी तीसरे बैंक में तुरंत ट्रांसफर करने पर रोक रहेगी।

देश भर में 13 करोड़ से अधिक जारी हो चुके फास्टैग्स के लिए यह सुविधा बैंकों के बीच बेहतर ग्राहक सेवा और आकर्षक ऑफर्स की प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा देगी।