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आरोपी शरीफुल ने कोर्ट में जुर्म कबूल करने की जताई इच्छा, मांगी नरमी; अगली सुनवाई पर नजर

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर मुंबई के बांद्रा स्थित आवास में हुए जानलेवा चाकू हमले के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम ने मुंबई सेशंस कोर्ट में औपचारिक रूप से अपना जुर्म कबूल करने की इच्छा जाहिर की है। आरोपी की ओर से अदालत में एक विशेष याचिका दायर कर कहा गया है कि वह अपने सभी अपराधों को स्वीकार करना चाहता है और इसके साथ ही उसने अदालत से सजा में नरमी बरतने की मानवीय गुहार भी लगाई है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद मामले की दिशा पूरी तरह बदलती दिख रही है और अब सभी की निगाहें कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई हैं।

मुंबई की सत्र अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील विपुल दुशिंग के माध्यम से यह अर्जी दाखिल की गई। अर्जी में बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद शरीफुल इस्लाम ने स्पष्ट किया है कि वह लंबी कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल से गुजरने के बजाय अपने कृत्य को स्वीकार करने को तैयार है। उसने अदालत के समक्ष स्वीकारोक्ति दर्ज कराने की अनुमति मांगी है और निवेदन किया है कि फैसले के वक्त उसकी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसके प्रति सहानुभूति और नरमी दिखाई जाए। अदालत ने इस याचिका का संज्ञान लेते हुए अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है। अब इस पूरे मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 11 सितंबर को मुकर्रर की गई है, जिस दिन कोर्ट आरोपी के इस स्वीकारोक्ति पत्र पर अपना फैसला सुना सकती है।

यह खौफनाक वारदात पिछले साल जनवरी में उस वक्त सामने आई थी, जब आरोपी मुंबई के पॉश बांद्रा इलाके में स्थित सैफ अली खान के 12वीं मंजिल के लग्जरी अपार्टमेंट में अवैध रूप से दाखिल हो गया था। रात के सन्नाटे में फ्लैट के अंदर अनजान शख्स की मौजूदगी का अहसास होते ही जब सैफ अली खान ने उसे पकड़ने और बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो आरोपी ने अचानक धारदार चाकू से अभिनेता पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया था। इस अप्रत्याशित हमले में सैफ को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी आपातकालीन सर्जरी की और करीब पांच दिनों तक डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रहने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी।

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी घटनास्थल से भागने में सफल रहा था, जिसके बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय बांद्रा पुलिस स्टेशन ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तकनीकी सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर आरोपी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ था कि वह अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आया था और उसने जबरन वसूली व चोरी के इरादे से अभिनेता के घर में सेंध लगाई थी। पुलिस ने मामले में धारा 307 (हत्या का प्रयास), जबरन वसूली और गृह अतिचार सहित कई सख्त कानूनी धाराओं के तहत विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।

हाल ही में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जी. पी. देशमुख की अदालत ने आरोपी के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय किए थे। उस वक्त आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए ट्रायल का सामना करने की बात कही थी, जिसके बाद मामले में गवाहों के बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिस द्वारा जुटाए गए पुख्ता फॉरेंसिक सबूतों, चाकू की बरामदगी, फिंगरप्रिंट रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को देखते हुए आरोपी को अपनी सजा तय नजर आने लगी। यही वजह है कि अचानक उसने अपनी रणनीति बदलते हुए ‘प्ली गिल्टी’ (Plea Bargaining / Guilty Plea) का रास्ता चुना ताकि अदालत से न्यूनतम सजा की रियायत हासिल की जा सके।

फौजदारी मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई आरोपी किसी गंभीर मामले में स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार करता है, तो अदालत यह सुनिश्चित करती है कि यह फैसला किसी दबाव या लालच में नहीं लिया गया हो। 11 सितंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट आरोपी से व्यक्तिगत तौर पर सवाल-जवाब कर सकती है। यदि अदालत उसकी स्वीकारोक्ति को वैध और स्वैच्छिक मानती है, तो लंबा चलने वाला ट्रायल तत्काल समाप्त हो जाएगा और सीधे सजा की अवधि (Quantum of Sentence) पर बहस होगी। चूंकि मामला एक बड़े फिल्मी सितारे की सुरक्षा और जानलेवा हमले से जुड़ा है, इसलिए अभियोजन पक्ष आरोपी को अधिकतम सजा दिलवाने की मांग पर अड़ा हुआ है।