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शादी के 5 साल बाद भी नहीं हुई प्रेग्नेंसी, सभी रिपोर्ट थी नॉर्मल; डॉक्टर को 1 टेस्ट पर हुआ शक तो सामने आया चौंकाने वाला सच

शादी के पांच साल बीत जाने के बाद भी माता-पिता बनने का सपना अधूरा रह जाना किसी भी दंपत्ति के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कष्टदायी होता है। ऐसा ही एक जटिल और हैरान करने वाला मामला हाल ही में सामने आया, जहां एक महिला तमाम कोशिशों के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। सबसे ज्यादा उलझन भरी बात यह थी कि महिला और उसके पति द्वारा कराए गए शुरुआती मेडिकल टेस्ट, जिनमें रूटीन ब्लड वर्क, बेसिक हार्मोनल प्रोफाइल, सीमेन एनालिसिस और पेल्विक अल्ट्रासाउंड शामिल थे, सभी की रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य (नॉर्मल) आ रही थी। मेडिकल भाषा में जब सभी प्राथमिक रिपोर्ट्स ठीक होने के बावजूद गर्भधारण नहीं होता, तो इसे ‘अनएक्सप्लेन्ड इनफर्टिलिटी’ (Unexplained Infertility) की श्रेणी में रख दिया जाता है, लेकिन इस केस में सच्चाई कुछ और ही निकली।

जब यह दंपत्ति वरिष्ठ फर्टिलिटी एवं गायनेकोलॉजी एक्सपर्ट के पास पहुंचा, तो डॉक्टर ने पुरानी फाइलों का बारीकी से अध्ययन किया। बुनियादी अल्ट्रासाउंड गर्भाशय की बाहरी बनावट और ओवरीज में अंडों की स्थिति तो स्पष्ट कर रहा था, लेकिन फर्टिलाइजेशन की पूरी प्रक्रिया के आंतरिक मार्ग की पुष्टि नहीं हो पा रही थी। डॉक्टर को संदेह हुआ कि समस्या फैलोपियन ट्यूब्स या गर्भाशय की आंतरिक परत (Endometrial Cavity) के सूक्ष्म स्तर पर छिपी हो सकती है। सामान्य सोनोग्राफी में अक्सर ट्यूब्स की आंतरिक रुकावट या गर्भाशय के सूक्ष्म विकार पकड़ में नहीं आते हैं। इस संदेह को दूर करने के लिए विशेषज्ञ ने एक खास जांच कराने का फैसला किया, जिसे एचएसजी (Hysterosalpingography – HSG) और साथ में डायग्नोस्टिक हिस्टेरोस्कोपी कहा जाता है।

जब महिला का एचएसजी और हिस्टेरोस्कोपी टेस्ट किया गया, तो रिपोर्ट देखकर खुद मेडिकल टीम भी हैरान रह गई। दरअसल, महिला की फैलोपियन ट्यूब्स में एक बारीक ‘साइलेंट ब्लॉकेज’ (अदृश्य रुकावट) मौजूद थी, जो पिछले 5 सालों से किसी भी सामान्य टेस्ट में नजर नहीं आ रही थी। इसके अलावा गर्भाशय के भीतर एक बेहद बारीक पॉलीप और हल्का ट्यूबरकुलर एंडोमेट्रैटिस (पेल्विक टीबी का हल्का असर) पाया गया, जिसके कोई बाहरी लक्षण या दर्द महिला को कभी महसूस नहीं हुए थे। फैलोपियन ट्यूब ही वह स्थान होती है जहां पुरुष स्पर्म और महिला का एग मिलकर भ्रूण (Embryo) बनाते हैं। ट्यूब के आंशिक रूप से बंद होने और गर्भाशय की आंतरिक सतह में सूजन होने के कारण भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित (Implant) ही नहीं हो पा रहा था।

वजह साफ होते ही डॉक्टरों ने तुरंत एक सटीक ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया। सबसे पहले लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी की मिनिमली इनवेसिव तकनीक के जरिए गर्भाशय के भीतर मौजूद पॉलीप को हटाया गया और ब्लॉक्ड फैलोपियन ट्यूब को कैन्युलेशन प्रक्रिया से खोल दिया गया। इसके साथ ही पेल्विक इन्फेक्शन को खत्म करने के लिए एंटीबायोटिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी थेरेपी का एक निश्चित कोर्स शुरू किया गया। गर्भाशय का आंतरिक वातावरण पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य होने के कुछ ही महीनों के भीतर महिला ने स्वाभाविक रूप से (Naturally) गर्भधारण कर लिया, जिससे 5 साल का लंबा इंतजार एक खुशहाल परिवार के रूप में बदल गया।

फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लगभग 10 से 15 प्रतिशत दंपत्ति बांझपन की समस्या से जूझते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा बिना किसी स्पष्ट कारण के परेशान रहता है। यदि शादी के एक साल बाद (या 35 वर्ष से अधिक उम्र में 6 महीने बाद) नियमित प्रयासों के बावजूद गर्भधारण न हो, तो केवल बेसिक टेस्ट पर निर्भर न रहें।

  • ट्यूब पेटेंसी टेस्ट (HSG / HyCoSy): यह जांचना बेहद जरूरी है कि फैलोपियन ट्यूब्स खुली हैं या नहीं।

  • हार्मोनल विंडो (AMH, TSH, Prolactin): एग रिजर्व और थायरॉयड का सटीक स्तर जानना अनिवार्य है।

  • एडवांस अल्ट्रासाउंड (3D/4D TVS): गर्भाशय की संरचनात्मक बनावट का गहराई से अध्ययन करने के लिए।

  • पुरुष प्रजनन क्षमता की विस्तृत जांच: केवल स्पर्म काउंट ही नहीं, बल्कि स्पर्म मॉर्फोलॉजी और डीएनए फ्रैग्मेंटेशन इंडेक्स (DFI) की जांच भी आवश्यक होती है।