
देश में डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई के तेजी से बढ़ते चलन के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत, आपातकालीन फंड और पूंजी को बैंक के बचत खाते (Savings Bank Account) में रखना सबसे सुरक्षित मानते हैं। हालांकि, कई बार खाताधारकों के मन में यह सवाल उठता है कि बचत खाते में कितना पैसा रखा जा सकता है और क्या खाते में 10 लाख रुपये या उससे अधिक की रकम जमा होने पर आयकर विभाग (Income Tax Department) का नोटिस आ सकता है? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और आयकर अधिनियम के नियमों के अनुसार, बचत खाते में पैसे रखने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है, लेकिन यदि आप एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद (Cash) राशि जमा करते हैं, तो उस पर वित्तीय एजेंसियों और टैक्स विभाग की सीधी नजर रहती है।
क्या है ₹10 लाख का नियम और SFT रिपोर्टिंग?
आयकर अधिनियम की धारा 285BA और नियम 114E के अंतर्गत बैंकों और डाकघरों के लिए बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होता है।
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एसएफटी (Specified Financial Transaction): यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान अपने एक या एक से अधिक बचत खातों में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद (Cash) जमा करता है, तो बैंक स्वतः ही इसकी रिपोर्ट आयकर विभाग को ‘एसएफटी रिपोर्ट’ के माध्यम से भेज देता है।
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चालू खाते (Current Account) के लिए सीमा: करंट अकाउंट होल्डर्स के लिए यह कैश डिपॉजिट रिपोर्टिंग सीमा 50 लाख रुपये प्रति वर्ष निर्धारित है।
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डिजिटल लेनदेन पर छूट: यदि आपके खाते में 10 लाख या उससे अधिक की रकम ऑनलाइन माध्यमों जैसे एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS), चेक, या सैलरी क्रेडिट से आई है, तो यह कैश डिपॉजिट नियम के दायरे में नहीं आती, क्योंकि इसका डिजिटल ट्रेल पहले से मौजूद होता है।
किन परिस्थितियों में मांग सकता है आयकर विभाग हिसाब?
बैंक द्वारा जानकारी भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि आपको तुरंत टैक्स भरना पड़ेगा या छापा पड़ जाएगा। जब तक आपके पास जमा की गई रकम का वैध स्रोत (Legitimate Source of Income) है, तब तक घबराने की कोई बात नहीं है। लेकिन निम्नलिखित मामलों में आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है:
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आयकर रिटर्न (ITR) और जमा राशि में मिसमैच: यदि आपकी घोषित वार्षिक आय 3 लाख रुपये है, लेकिन आपके बचत खाते में 10-12 लाख रुपये नकद जमा किए गए हैं, तो विभाग आय के स्रोत को लेकर सवाल पूछ सकता है।
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आईटीआर फाइल न करना: यदि किसी व्यक्ति के खाते में बड़ी नकद राशि जमा होती है और वह आयकर रिटर्न दाखिल नहीं करता, तो विभाग धारा 148 या 68 के तहत नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांग सकता है।
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टुकड़ों में जमा (Structuring): कई लोग ₹10 लाख की सीमा से बचने के लिए अलग-अलग बैंक खातों में 2-2 लाख रुपये नकद जमा करते हैं। चूंकि सभी बैंक खाते पैन कार्ड से लिंक होते हैं, इसलिए विभाग का सिस्टम कुल मिलाकर इसे तुरंत पकड़ लेता है।
आय का स्रोत न बताने पर लग सकता है भारी टैक्स और जुर्माना
यदि आयकर विभाग द्वारा नोटिस दिए जाने पर खाताधारक जमा किए गए 10 लाख रुपये के स्रोत का वैध प्रमाण (जैसे प्रॉपर्टी बिक्री दस्तावेज, कृषि आय, वैध उपहार विलेख या बिजनेस बिल) प्रस्तुत करने में असमर्थ रहता है, तो उस राशि को आयकर अधिनियम की धारा 68 के तहत ‘अघोषित आय’ (Unexplained Income) मान लिया जाता है।
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इस स्थिति में उस पूरी रकम पर 60% फ्लैट टैक्स, 25% सरचार्ज और 4% सेस मिलाकर कुल लगभग 78% तक का टैक्स और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
बड़ी रकम जमा करते समय इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
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पैन कार्ड अनिवार्य: किसी भी बैंक में एक दिन में ₹50,000 से अधिक नकद जमा करने पर पैन कार्ड (PAN) देना अनिवार्य है।
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दस्तावेजी सबूत रखें: यदि आपने जमीन या पुश्तैनी संपत्ति बेची है, कोई पारिवारिक गिफ्ट मिला है या कानूनी कारोबार से नकदी मिली है, तो उसकी रसीदें, एग्रीमेंट या बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें।
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एआईएस (AIS) और 26AS चेक करें: आयकर रिटर्न भरते समय अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में रिपोर्ट किए गए सभी बड़े लेनदेन का मिलान अपने रिटर्न से जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे।
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