
फिटनेस को लेकर सजग रहने वाले बहुत से लोग अपने वर्कआउट रूटीन को कभी मिस नहीं करना चाहते। कई बार हल्का बुखार, बदन दर्द या सर्दी-जुकाम होने पर भी लोग इस गलतफहमी में जिम चले जाते हैं या दौड़ने लगते हैं कि ‘पसीना बहाने से बुखार जल्दी उतर जाएगा’। हालांकि, मेडिकल साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन और फिजिशियन के अनुसार यह धारणा पूरी तरह गलत और जानलेवा साबित हो सकती है। बुखार कोई सामान्य शारीरिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आपका शरीर किसी बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से लड़ रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में एक्सरसाइज करना शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
बुखार में वर्कआउट करने से शरीर पर क्या पड़ता है असर?
जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तो हमारा इम्यून सिस्टम पूरी ऊर्जा संक्रमण को खत्म करने में लगा रहा होता है। ऐसे में भारी कसरत करने से शरीर में कई खतरनाक बदलाव होते हैं:
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हार्ट पर अत्यधिक दबाव और मायोकार्डिटिस का खतरा: बुखार के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और हृदय की धड़कन (Resting Heart Rate) पहले से ही बढ़ी रहती है। ऐसे में भारी वजन उठाने या कार्डियो करने से हृदय की मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव पड़ता है। कुछ वायरल संक्रमणों में एक्सरसाइज करने से दिल की मांसपेशियों में सूजन यानी ‘मायोकार्डिटिस’ (Myocarditis) का खतरा हो सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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गंभीर डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक: बुखार में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए पसीना पहले ही ज्यादा निकलता है। एक्सरसाइज करने से शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से खत्म हो जाते हैं, जिससे अचानक चक्कर आना, बेहोशी और हीट एग्जॉशन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
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कमजोर इम्यूनिटी और बीमारी का लंबा खिंचना: मांसपेशियों की टूट-फूट की मरम्मत के लिए शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है। यदि वर्कआउट से शरीर थक जाएगा, तो इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाएगा और जो बुखार 2 दिन में ठीक हो सकता था, वह कई हफ्तों तक खिंच सकता है।
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मांसपेशियों में खिंचाव और इंजरी: बुखार के समय मांसपेशियां पहले से ही कमजोर और दर्द से ग्रस्त होती हैं। ऐसे में समन्वय (Coordination) बिगड़ने से गंभीर लिगामेंट टियर या जोड़ों में चोट लग सकती है।
डॉक्टरों का ‘नेक रूल’ (The Neck Rule) क्या कहता है?
स्पोर्ट्स डॉक्टर बीमारी में एक्सरसाइज करने के लिए ‘नेक रूल’ यानी गर्दन के नियम का पालन करने की सलाह देते हैं:
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गर्दन से ऊपर के लक्षण (Above the Neck): यदि आपको केवल हल्की छींकें, बंद नाक या हल्का सिरदर्द है और शरीर में तापमान (बुखार) नहीं है, तो आप हल्की वॉक, योग या हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं।
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गर्दन से नीचे के लक्षण (Below the Neck): यदि आपको 100°F या उससे अधिक बुखार है, सीने में जकड़न, खांसी, उल्टी, दस्त या पूरे शरीर में जोड़ों व मांसपेशियों का दर्द है, तो एक्सरसाइज करना पूरी तरह वर्जित है। ऐसे समय में सिर्फ और सिर्फ ‘बेड रेस्ट’ करना चाहिए।
बुखार ठीक होने के बाद कब शुरू करें वर्कआउट?
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बुखार पूरी तरह उतरने और कोई भी दवा लिए बिना शरीर का तापमान सामान्य रहने के कम से कम 48 से 72 घंटे बाद ही वर्कआउट शुरू करना चाहिए।
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वापसी के पहले सप्ताह में इंटेंस वर्कआउट के बजाय केवल हल्की वॉक, धीमी साइकिलिंग या योग से शुरुआत करें और शरीर की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाएं।
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