Mangla Gauri Vrat 2026: मंगला गौरी व्रत आज, अखंड सौभाग्य के लिए भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

धर्म एवं अध्यात्म डेस्क: पवित्र श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक मंगलवार जगत जननी माता पार्वती के स्वरूप ‘मां मंगला गौरी’ को समर्पित होता है। आज, 4 अगस्त 2026 को सावन का मंगलवार होने के कारण देश भर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य, संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि के लिए मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाहा और सुयोग्य वर प्राप्त करने के साथ-साथ कुंडली में मौजूद मंगल दोष (Mangal Dosh) के निवारण के लिए मां मंगला गौरी की विशेष पूजा-अर्चना कर रही हैं।

शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के मंगलवार को पूरी निष्ठा और विधि-विधान से मां मंगला गौरी की पूजा करने से दांपत्य जीवन के सभी कष्ट, तनाव और अनबन समाप्त हो जाते हैं। हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में यह भी स्पष्ट बताया गया है कि व्रत और पूजा का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। जाने-अनजाने में की गई छोटी सी भूल या चूक व्रत के पुण्य को क्षीण कर सकती है या पूजा को अधूरी छोड़ सकती है। यदि आप भी आज मंगला गौरी का व्रत रख रही हैं, तो आपको इन 5 मुख्य गलतियों से बचना चाहिए।

मंगला गौरी व्रत में भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां: पूजा-विधि और नियमों का रखें खास ख्याल

1. काले, नीले या भूरे रंग के वस्त्र न पहनें

धार्मिक मान्यताओं में लाल, गुलाबी, हरा और पीला रंग शुभता, सौम्यता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मंगला गौरी व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं व कन्याओं को भूलकर भी काले, नीले, स्लेटी या गहरे भूरे रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूजा के समय लाल या हरे रंग की साड़ी अथवा वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है, क्योंकि ये रंग मां पार्वती को अति प्रिय हैं।

2. क्रोध, वाद-विवाद और दूसरों का अपमान करने से बचें

व्रत का अर्थ केवल भोजन का त्याग करना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखना होता है। मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाओं को अपने मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष या क्रोध नहीं लाना चाहिए। आज के दिन अपने पति, सास-ससुर, बुजुर्गों या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचें। घर में क्लेश या वाद-विवाद करने से पूजा का फल निष्फल हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

3. पूजा सामग्री में अशुद्ध या वर्जित चीजों का प्रयोग

मां मंगला गौरी की पूजा में सामग्री की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। पूजा में कभी भी टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत), बासी फूल या कटे-फटे बेलपत्र अर्पित न करें। इसके अलावा, मां गौरी और भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल, तुलसी पत्र या हल्दी (विशेष रूप से केवल शिवलिंग पर सीधे अर्पित करना) के नियमों का ध्यान रखें। मां गौरी को लाल चुनरी, 16 श्रृंगार की वस्तुएं और शुद्ध घी का दीपक ही अर्पित करें।

4. तामसिक विचारों, लहसुन-प्याज और नियम तोड़ने से परहेज

मंगला गौरी व्रत के दिन पूरे घर का माहौल सात्विक होना चाहिए। व्रत रखने वाली महिला और परिवार के सदस्यों को भोजन में लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार के तामसिक पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप एकभुक्त (दिन में एक बार अन्न ग्रहण करने वाला) व्रत रख रही हैं, तो पूजा संपन्न होने और कथा सुनने के बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें। सूर्यास्त से पहले फलाहार या पारण के नियमों का सही पालन करें।

5. सुहाग सामग्री का अनादर या पुरानी चीजों का दान

मंगला गौरी व्रत में मां पार्वती को 16 श्रृंगार (सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, आलता आदि) चढ़ाने का विधान है। पूजा के पश्चात यह सुहाग सामग्री किसी योग्य ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को आदरपूर्वक दान की जाती है। कभी भी अपनी इस्तेमाल की हुई पुरानी या टूटी-फूटी श्रृंगार सामग्री का दान न करें। सुहाग की वस्तुएं हमेशा नई और स्वच्छ होनी चाहिए। मां पार्वती को अर्पित सिंदूर को अपने माथे पर लगाना न भूलें, यह अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देता है।

मंगला गौरी व्रत की सही पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (लाल या हरे) वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।

  • चौकी स्थापना: घर के मंदिर में या पूजा स्थल पर एक लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला गौरी (माता पार्वती) और भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

  • 16 चीजों का अर्पण: मां गौरी को 16 की संख्या में चीजें चढ़ाने का विशेष महत्व है—जैसे 16 चूड़ियां, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 सुपारी, 16 बेलपत्र और 16 प्रकार के फूल/फल।

  • कथा व आरती: मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें अथवा सुनें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर कपूर से मां गौरी की आरती उतारें और परिवार के साथ प्रसाद वितरित करें।