कॉकरोच प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बड़ा कदम, 100 से अधिक शहरों में जेन-जी से सीधे संवाद करेंगे मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देश के बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को भांपते हुए एक बेहद अहम फैसला लिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत आगामी 6 अगस्त को देश भर के 100 से अधिक शहरों में जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) पीढ़ी के युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। यह विशेष कार्यक्रम ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टु यूनाइटेड नेशन्स’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ और वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर आयोजित किया जाएगा, जिसका मुख्य केंद्र मुंबई का अंबानी सेंटर होगा। इस अनूठी पहल के जरिए संघ का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं की आकांक्षाओं को समझना और उनके सवालों के दायरे से जुड़ना है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच प्रदर्शन’ के बाद बदली राजनीतिक रणनीति

हाल ही में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले हुए जोरदार प्रदर्शन में भारी संख्या में जेन-जी युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली थी। इस बड़े युवा आंदोलन और नीट यूजी पेपर लीक से उपजे आक्रोश के बाद देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव महसूस किया गया। इस राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपनी सक्रियता बढ़ाई और युवाओं से जुड़ने के लिए रील्स साझा कीं। अब इसी कड़ी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी आगे आकर नई पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित करने का बड़ा बीड़ा उठाया है, ताकि युवाओं की नब्ज को गहराई से समझा जा सके।

IIMUN की वर्षगांठ पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ेगी युवा शक्ति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंबई के अंबानी सेंटर में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में 15 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के स्टूडेंट्स हिस्सा लेंगे। मोहन भागवत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के 100 से ज्यादा शहरों में मौजूद 2,000 से अधिक युवाओं के साथ सीधा संवाद करेंगे। वर्ष 2011 में स्थापित IIMUN युवाओं का एक ऐसा वैश्विक मंच है जो आज 40 से अधिक देशों में फैल चुका है और इसका पूरा संचालन युवाओं द्वारा ही किया जाता है। संघ के इस मंच के माध्यम से नई पीढ़ी को वैचारिक रूप से जोड़ने और उनकी चिंताओं पर खुलकर चर्चा करने का बड़ा अवसर मिलेगा।

मोहन भागवत का संदेश: नई पीढ़ी सवाल पूछती है, उनसे बातचीत बेहद जरूरी

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में अपने बयानों में इस बात पर जोर दिया था कि समय के साथ बदलना और नई पीढ़ी की सोच को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा था कि परिवर्तन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और व्यक्ति को अपने अनुभवों के साथ-साथ युवाओं के दृष्टिकोण से भी सीखने की जरूरत है। भागवत का मानना है कि मां की ममता और भावनात्मक जुड़ाव की तरह ही युवाओं के मन की बात को जानने का प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि आज की जागरूक पीढ़ी अपने भविष्य और व्यवस्था को लेकर सवाल पूछने से पीछे नहीं हटती है।