
मानसून की पहली फुहारें जहां राहत लेकर आती हैं, वहीं अपने साथ बीमारियों का अंबार भी लाती हैं। नमी और उमस भरे इस मौसम में फंगल इंफेक्शन, पेट खराब होना (उल्टी-दस्त) और वायरल बुखार जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। लखनऊ सहित पूरे उत्तर भारत में इन दिनों मौसमी बीमारियों का असर देखा जा रहा है। यदि आप भी इस बारिश में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो सेहत के प्रति बरती गई थोड़ी सी लापरवाही आपको अस्पताल तक पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं कि इस बरसात में किन बातों का ध्यान रखकर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
नमी है फंगल इंफेक्शन की जड़, ऐसे करें बचाव
बरसात में हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक होता है, जो फंगल संक्रमण को तेजी से पनपने में मदद करता है। पैर की उंगलियों के बीच, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों में पसीना और नमी जमा होने से दाद, खाज और खुजली की समस्या बढ़ जाती है। इससे बचने का सबसे आसान उपाय है—स्वच्छता। घर से बाहर से आने के बाद अपने हाथ-पैर अच्छे से धोएं और शरीर के उन हिस्सों को सूखा रखें जहां पसीना ज्यादा आता है। हमेशा सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि हवा का प्रवाह बना रहे। यदि गीले कपड़े पहनने की मजबूरी हो, तो उन्हें जल्द से जल्द बदल लें और अच्छी तरह सुखाए हुए कपड़ों का ही इस्तेमाल करें।
पेट को रखें दुरुस्त, खान-पान में बरतें सावधानी
मानसून के दौरान दूषित पानी और बाहर का खुला खाना सबसे ज्यादा उल्टी-दस्त का कारण बनता है। इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं, इसलिए सड़क किनारे मिलने वाले कटे फल, जूस या जंक फूड से पूरी तरह परहेज करें। घर में भी खाना ताजा ही खाएं और पीने के पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें। अपनी डाइट में अदरक, तुलसी, और काली मिर्च जैसी प्राकृतिक इम्यूनिटी बूस्टर्स को शामिल करें। यदि पेट में हल्का भी भारीपन या दस्त की शिकायत महसूस हो, तो तुरंत ओआरएस (ORS) का घोल लें और हल्के भोजन (जैसे खिचड़ी या दही-चावल) पर निर्भर रहें।
वायरल बुखार और सावधानी: कब लें डॉक्टर की सलाह?
लगातार भीगने या तापमान में अचानक बदलाव के कारण वायरल बुखार होना इस मौसम में सामान्य है। शरीर में कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और हल्का बुखार इसके मुख्य लक्षण हैं। ऐसे में खुद से एंटीबायोटिक लेने के बजाय आराम करें और गुनगुना पानी पिएं। यदि बुखार 102°F से ऊपर चला जाए या लगातार तीन दिनों तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी नजदीकी डॉक्टर से जांच कराएं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों का प्रजनन स्थल है, जो डेंगू और मलेरिया का कारण बनते हैं। स्वस्थ रहने की कुंजी केवल सतर्कता और खान-पान में अनुशासन ही है।
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