
उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा और पसंदीदा इंडस्ट्रियल हब बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट को अब एक नई और बेहद मजबूत रफ्तार मिलने वाली है। सूबे की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर (One Trillion Dollar Economy) के जादुई आंकड़े तक पहुंचाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास की दिशा में एक और बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। उत्तर प्रदेश में देश-विदेश से आने वाले भारी-भरकम पूंजी निवेश (UP Investment) को और अधिक सुगम, सुरक्षित और तीव्र बनाने के लिए देश की राष्ट्रीय निवेश संवर्धन एजेंसी ‘इन्वेस्ट इंडिया’ (Invest India) और राज्य की नोडल एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ (Invest UP) ने एक साथ हाथ मिला लिया है। इन दोनों दिग्गज संस्थाओं ने मिलकर एक ऐसी अभूतपूर्व और आधुनिक संयुक्त रणनीति तैयार की है, जो न केवल वैश्विक निवेशकों को यूपी की ओर खींचेगी बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखेगी।
क्या है इन्वेस्ट इंडिया और इन्वेस्ट यूपी की संयुक्त जुगलबंदी का मुख्य एजेंडा
इस नई और बेहद पावरफुल रणनीति का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में व्यापार करने की सुगमता यानी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को अगले स्तर पर ले जाना है। इस नए गठजोड़ के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश करने वाले बड़े कॉर्पोरेट घरानों को उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, सब्सिडी और उपलब्ध लैंड बैंक (Land Bank) के बारे में सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए रीयल-टाइम जानकारी दी जाएगी। इन्वेस्ट इंडिया अपने वैश्विक नेटवर्क और दूतावासों के जरिए विदेशी निवेशकों को यूपी की निवेश संभावनाओं से रूबरू कराएगा, वहीं इन्वेस्ट यूपी राज्य स्तर पर जमीन आवंटन से लेकर सभी जरूरी एनओसी (NOC) और प्रशासनिक मंजूरियों को बिना किसी देरी के क्लीयर कराने की जिम्मेदारी संभालेगा। इस जुगलबंदी से निवेशकों का समय बचेगा और वे बिना किसी लालफीताशाही के यूपी में अपने प्रोजेक्ट्स धरातल पर उतार सकेंगे।
इन सेक्टर्स पर रहेगा विशेष फोकस, एक्सप्रेसवे और डिफेंस कॉरिडोर बनेंगे मुख्य हथियार
दोनों एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश के उन सेक्टर्स की पहचान की है जहां निवेश की सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं और जो राज्य को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला सकते हैं। इस रणनीति के तहत ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV Manufacturing), इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और एयरोस्पेस-डिफेंस सेक्टर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। उत्तर प्रदेश में बने एक्सप्रेसवे के विशाल नेटवर्क (पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे) के किनारों पर विकसित हो रहे औद्योगिक गलियारों और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के पास बनने वाले नए ‘नोएडा’ यानी बीडा (BIDA) को प्रमुख इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में पेश किया जाएगा। इसके अलावा, यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में वैश्विक रक्षा कंपनियों को आकर्षित करने के लिए विशेष रोड शो और इन्वेस्टर मीट आयोजित करने की योजना पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है।
विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए दुनिया के प्रमुख देशों में होंगे रोड शो
इन्वेस्ट इंडिया और इन्वेस्ट यूपी की नई रणनीति सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक बेहद आक्रामक ग्राउंड मार्केटिंग प्लान भी तैयार किया गया है। आने वाले महीनों में अमेरिका, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और यूएई (UAE) जैसे प्रमुख देशों के औद्योगिक केंद्रों में हाई-लेवल बिजनेस डेलीगेशन भेजे जाएंगे। इन रोड शोज के जरिए वैश्विक कंपनियों को उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, सुधरे हुए बुनियादी ढांचे और यूपी सरकार की निवेशक-अनुकूल नीतियों से अवगत कराया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों का यह साझा प्रयास ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन के विकल्पों की तलाश कर रही विदेशी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने के लिए पूरी तरह से आश्वस्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।
लाखों युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार, पूर्वांचल और बुंदेलखंड को मिलेगा नया जीवन
इस महा-निवेश नीति के धरातल पर उतरने से न केवल राज्य के राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के लाखों स्थानीय युवाओं के लिए उनके गृह राज्य में ही वर्ल्ड-क्लास नौकरियों और स्वरोजगार के बंपर अवसर पैदा होंगे। अब तक औद्योगिक रूप से पिछड़े माने जाने वाले पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों को इस रणनीति में विशेष तरजीह दी जा रही है। इन क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष रियायतें और वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पूरी तरह खत्म होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई ताकत मिलेगी। इस नए कदम ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश न केवल भारत का ‘ग्रोथ इंजन’ बनेगा, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा औद्योगिक पावरहाउस बनकर उभरेगा।
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