IIT में एडमिशन का महामंत्र: कौन-सी ब्रांच चुनना रहेगा सबसे बेस्ट? काउंसलिंग के दौरान छात्र भूलकर भी न करें ये बड़ी गलतियां

जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced) परीक्षा की चुनौती को पार करने के बाद अब देश के हजारों मेधावी छात्रों के सामने अपने करियर का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पड़ाव आ चुका है। हर साल की तरह इस बार भी आईआईटी (IIT) की सीट पक्की करने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही घूम रहा है कि आखिर कौन-सी आईआईटी और कौन-सी इंजीनियरिंग ब्रांच को चुना जाए। जोसा (JoSAA) की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होते ही चॉइस फिलिंग को लेकर छात्रों के बीच असमंजस की स्थिति बन जाती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि परीक्षा पास करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी काउंसलिंग के दौरान सही फैसला लेना भी है, क्योंकि एक छोटी सी चूक आपकी सालों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर सकती है।

कंप्यूटर साइंस (CSE) का क्रेज या कोर इंजीनियरिंग: कैसे करें सही ब्रांच का चुनाव

आईआईटी काउंसलिंग के दौरान ज्यादातर छात्रों की पहली पसंद कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) होती है। टॉप आईआईटी की सीएसई ब्रांच बंद होने के बाद छात्र अक्सर इस बात को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं कि वे नए आईआईटी में सीएसई चुनें या फिर देश के टॉप और पुराने आईआईटी (जैसे आईआईटी बॉम्बे, दिल्ली, कानपुर) में मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल या केमिकल जैसी कोर ब्रांचेज को प्राथमिकता दें। करियर काउंसलर्स के मुताबिक, छात्रों को केवल प्लेसमेंट पैकेज या मौजूदा ट्रेंड को देखकर अपनी ब्रांच नहीं चुननी चाहिए। छात्रों को अपने पर्सनल इंटरेस्ट, कोडिंग में रुचि और उस विशेष आईआईटी के एलुमनाई नेटवर्क (Alumni Network) और इंफ्रास्ट्रक्चर को अच्छी तरह से समझने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेना चाहिए।

चॉइस फिलिंग में छात्र अक्सर कर बैठते हैं ये गंभीर गलतियां

काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान छात्र और पेरेंट्स अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बाद में भारी पड़ती हैं। सबसे आम गलती यह होती है कि छात्र पिछले साल के ओपनिंग और क्लोजिंग रैंक (Cut-off) का सही विश्लेषण किए बिना ही अपनी प्राथमिकताएं भर देते हैं। इसके अलावा, कई छात्र केवल ऊपरी तौर पर पसंद की ब्रांचेज ऊपर रख देते हैं और नीचे उन कॉलेजों या ब्रांच को भर देते हैं जिनमें उनकी बिल्कुल भी रुचि नहीं होती। यदि काउंसलिंग के किसी राउंड में उन्हें वह अनिच्छुक सीट अलॉट हो जाती है, तो उनके पास बेहतर विकल्प के रास्ते बंद हो जाते हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि छात्रों को अपनी चॉइस फिलिंग लिस्ट बहुत सोच-समझकर और घटते क्रम में पूरी सावधानी के साथ बनानी चाहिए।

नए आईआईटी वर्सेस पुराने आईआईटी: जानिए क्या है विशेषज्ञों की सटीक राय

सीट चुनते समय ‘कॉलेज बनाम ब्रांच’ (College vs Branch) की बहस हमेशा से सबसे ऊपर रहती है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको पुराने और स्थापित आईआईटी में अपनी मनपसंद ब्रांच नहीं मिल रही है, लेकिन किसी कोर ब्रांच में आपकी थोड़ी बहुत भी रुचि है, तो पुराने आईआईटी के टैग, वहां के माहौल और वहां मिलने वाले वैश्विक एक्सपोजर को प्राथमिकता देना एक बेहतर फैसला हो सकता है। दूसरी तरफ, अगर आपका लक्ष्य केवल कोडिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट या एआई (AI) के क्षेत्र में ही करियर बनाना है, तो आप नए या टियर-2 आईआईटी में कंप्यूटर साइंस या डेटा साइंस जैसी मॉडर्न ब्रांचेज को चुन सकते हैं। काउंसलिंग के हर राउंड में फ्रीज, फ्लोट और स्लाइड ऑप्शन्स का सही इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है।