उत्तर प्रदेश सूचना विभाग में संवेदनशीलता की मिसाल: 6 साल बाद बढ़ा 411 संविदा कर्मियों का पारिश्रमिक, कर्मचारियों की आंखें हुईं नम

पवन सिंह : जब आंखों में नमी तैर जाए और दिल में कृतज्ञता का भाव इतना गहरा हो कि जुबान से शब्द न फूटें, तो समझ लेना चाहिए कि किसी के बरसों पुराने दर्द को बहुत ही आत्मीयता से सहलाया गया है। कुछ ऐसा ही भावुक और सुकून देने वाला मंजर इन दिनों उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में देखने को मिल रहा है। विभाग के 411 संविदा कर्मी (Contractual Employees), जो पिछले छह सालों से एक अदद मानदेय बढ़ोतरी के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे, उनके जीवन की गाड़ी को अब एक नई गति मिली है।

महीने के आखिर में बच्चों की स्कूल फीस, राशन का खर्च, बिजली का बिल और हाथ में बची ‘शून्य’ सी मायूसी को झेलने वाले इन कर्मचारियों के दर्द को आखिरकार विभाग के मुखिया ने न सिर्फ समझा, बल्कि उस पर फौरन अमल भी किया।

पंचम तल से उतरी फाइल और मिनटों में हुआ फैसला

विभागीय सूत्रों के अनुसार, संविदा कर्मियों के पारिश्रमिक को बढ़ाने की यह फाइल पिछले छह सालों से ‘पंचम तल’ (शासन स्तर) पर बिना किसी अंतिम निर्णय के धूल फांक रही थी। हर बार उम्मीदें जगतीं और ढलते सूरज की तरह अस्त हो जाती थीं। कर्मचारियों को लगने लगा था कि शायद अब इसी तंगी के बीच जिंदगी की शाम भी ढल जाएगी।

लेकिन जैसे ही इस ‘किस्सा-ए-उजरत’ (पारिश्रमिक की व्यथा) की भनक सूचना निदेशक विशाल सिंह को लगी, उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत फाइल तलब की। चंद घंटों के भीतर ही एक ऐसा फैसला तैयार हुआ जिसने इन कर्मचारियों को सम्मान से जीने और अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने का हौसला दे दिया। इस ऐतिहासिक फैसले को मई 2026 से लागू किया गया है, यानी जून महीने में सभी 411 कर्मियों को पूरे महीने का बढ़ा हुआ वेतन मिल चुका है।

किस श्रेणी में कितनी हुई बढ़ोतरी? (New Salary Structure)

इस नए आदेश के बाद अलग-अलग श्रेणी के कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक में ₹2,000 से लेकर ₹8,000 तक की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नए वेतनमान का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

पर्दे के पीछे की टीम और मिठाई की वो मिठास

इस त्वरित और जनहितैषी फैसले को अमलीजामा पहनाने में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी दिन-रात एक कर दिया। एडिशनल डायरेक्टर (AD) अरविंद कुमार मिश्रा, पीसीएस अधिकारी आत्रेय मिश्रा और फाइनेंस कंट्रोलर संजय सिंह ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। आनन-फानन में सारी कानूनी और विभागीय औपचारिकताएं पूरी की गईं ताकि जून के वेतन में ही इसका लाभ कर्मचारियों को मिल सके।

इस फैसले का जश्न भी अनूठा था। आमतौर पर विभागों में मिठाई किसी बड़े प्रमोशन या खुद के लाभ पर बांटी जाती है, लेकिन सूचना विभाग में निदेशक के पीए मौर्य जी के कक्ष से लेकर फाइनेंस कंट्रोलर के दफ्तर तक जो मिठाइयां बंटीं, उनकी मिठास दूसरों के घरों में आए उजालों की थी।

✍️ लेखक की कलम से: एक भावुक मुलाकात

“जब इस फैसले के बाद मैंने विभाग परिसर में कुछ संविदा कर्मियों से बात की, तो उनकी आंखें छलक आईं। कुछ कहना चाहते थे, पर गला रुंध गया। उनकी लड़खड़ाती आवाज से सिर्फ दो ही नाम साफ सुनाई दिए— विशाल सिंह और संजय सिंह। इसके बाद उनके चेहरे की मुस्कान और कृतज्ञता के भाव ने सब कुछ बयां कर दिया। जहां आज के दौर में लोग लाखों कमाने के बाद भी असंतुष्ट रहते हैं, वहां ₹5,000 की यह बढ़ोतरी इन परिवारों के लिए किसी बड़े त्योहार जैसी खुशियां लेकर आई है।”

उदास चेहरों पर ऐसी बेसाख्ता मुस्कान बिखरने के अपने ही सुख होते हैं। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर मशहूर शायर निदा फ़ाज़ली साहब का एक शेर याद आता है:

“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें,‌”

“किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए।”

एक छोटी सी गुजारिश:

सूचना निदेशक विशाल सिंह जी, आपने अपने कर्मचारियों की ‘व्यथा कथा’ के मर्म को जिस तरह महसूस किया है, उसने हर किसी का दिल जीत लिया है। आज तमाम संविदा कर्मी बेहद अनुग्रहित हैं। उनकी एक छोटी सी ख्वाहिश है कि यदि आप समय निकालकर सूचना विभाग के परिसर में उनके साथ ‘एक वक्त का लंच’ साझा कर सकें, तो यह उनके इस सम्मान और खुशी को जीवनभर के लिए यादगार बना देगा।