ग्रूमिंग गैंग की पीड़ितों ने सुनाई रोंगटे खड़े करने वाली दास्तां, पाकिस्तानी मूल के अपराधियों का घिनौना चेहरा आया सामने

ब्रिटेन के राजनैतिक केंद्र वेस्टमिंस्टर हॉल से इस वक्त की एक बेहद विचलित और हैरान करने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। ब्रिटिश संसद में इस सोमवार को ग्रूमिंग-गैंग (Grooming Gangs) के चंगुल से किसी तरह जिंदा बची पीड़ित महिलाओं और बच्चियों ने जो गवाहियां दी हैं, उसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इन दिल दहला देने वाले बयानों में साफ तौर पर बताया गया है कि कैसे मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के पुरुषों के संगठित गिरोहों ने ब्रिटिश बच्चियों को मानव तस्करी, सामूहिक बलात्कार और अमानवीय यातनाओं का शिकार बनाया। संसद में गूंजी इन खौफनाक दास्तानों ने ब्रिटिश सरकार और वहां की सुरक्षा एजेंसियों को दशकों की उस संस्थागत नाकामी और लापरवाही पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है, जिसके चलते इस घिनौने सच को सालों तक दबाकर रखा गया था।

रोंगटे खड़े कर देने वाली दरिंदगी, ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लो ने पढ़कर सुनाई पीड़ित की आपबीती

इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर बहस की शुरुआत करते हुए ‘रिस्टोर ब्रिटेन’ के प्रखर सांसद रूपर्ट लो ने एक पीड़ित महिला की रिकॉर्ड की गई लाइव गवाही को संसद के पटल पर पढ़कर सुनाया। उस बयान में पीड़िता ने आरोप लगाया कि कैसे बलात्कारियों के एक क्रूर गिरोह ने एक बार उसे एक कमरे में बंद कर दिया था, जहां कई हिंसक कुत्ते मौजूद थे। अपराधी इस बात पर सट्टा लगा रहे थे कि क्या जानवर भी इस घिनौनी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इस दर्दनाक घटना को बयां करते हुए पीड़ित महिला ने रोते हुए गवाही दी कि अपराधियों ने उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं।

लगभग पूरी तरह से गोरी और ईसाई लड़कियों को बनाया जाता था निशाना, नस्लीय नफरत का हुआ खुलासा

अदालत और संसद के सामने आई गवाहियों में एक और बेहद परेशान करने वाला पैटर्न खुलकर सामने आया है। पीड़ितों ने बताया कि ये अपराधी लगभग पूरी तरह से केवल स्थानीय गोरी और ईसाई लड़कियों को ही अपनी साजिश का शिकार बनाते थे। एक अन्य पीड़िता ने अपनी गवाही में बताया कि वह महज 13 साल की थी, जब इस नरक की शुरुआत हुई और केवल तीन साल के भीतर करीब 600 से 700 पुरुषों ने उसके साथ दरिंदगी की। इसके अलावा, एक और पीड़िता ने बताया कि जब वह सिर्फ 12 साल की बच्ची थी, तब हमलावरों ने उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल डालकर उसे अंदर ही तोड़ दिया था, जिसने उसकी जिंदगी को पूरी तरह तबाह कर दिया।

ईद और त्योहारों के दौरान बढ़ जाती थी हिंसा, पुलिस अधिकारियों पर भी लगे गंभीर आरोप

एक पीड़िता ने ब्रिटिश व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए दावा किया कि इन बेसहारा गोरी लड़कियों की तस्करी उन सरकारी बच्चों के घरों (Care Homes) के जरिए की जाती थी, जिन्हें असल में उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए बनाया गया था। उसने बताया कि पाकिस्तानी मूल के इन अपराधियों की पार्टियां ईद और अन्य छुट्टियों के आस-पास बहुत ज्यादा बड़ी, हिंसक और बदतर हो जाती थीं, जिनमें देश के अलग-अलग हिस्सों से भारी संख्या में पुरुष और कई नई लड़कियां शामिल की जाती थीं। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला दावा यह सामने आया कि देश के कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों ने भी पीड़ितों की मदद करने के बजाय उनके साथ इस अपराध को अंजाम दिया।

‘गोरी लड़कियों को कमतर और मुस्लिम लड़कियों को गरिमापूर्ण बताते थे’, मानसिक प्रताड़ना का खेल

सांसद रूपर्ट लो द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र जांच समिति के सामने गवाही देते हुए एक पीड़िता ने अपराधियों की सोच का पर्दाफाश किया। उसने बताया कि शोषण के दौरान लगातार ऐसी नस्लीय और धार्मिक टिप्पणियां की जाती थीं, जिससे पीड़ित लड़कियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाए। अपराधी अक्सर कहते थे कि गोरी और ईसाई लड़कियां कम नैतिक मूल्य वाली और कम अहमियत वाली होती हैं, जबकि मुस्लिम लड़कियों को ऊंचे नैतिक स्तर वाला बताया जाता था। इन तुलनाओं का इस्तेमाल केवल ब्रिटिश लड़कियों को मानसिक रूप से जलील करने, उन पर पूर्ण नियंत्रण पाने और उनके साथ किए जा रहे इस भयानक बर्ताव को जायज ठहराने के लिए किया जाता था।

अपराधियों की राष्ट्रीयता और धर्म दर्ज करने की उठी मांग, 2.6 लाख लोगों ने किया याचिका पर हस्ताक्षर

संसद में इस गंभीर बहस की शुरुआत एक राष्ट्रव्यापी याचिका के साथ हुई थी, जिस पर ब्रिटेन के करीब 2 लाख 60 हजार नागरिकों ने अपने आधिकारिक हस्ताक्षर किए थे। इस याचिका में ब्रिटिश परिषदों, पुलिस, और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य करने की मांग की गई है कि वे बच्चों को निशाना बनाने वाले ऐसे यौन अपराधियों की राष्ट्रीयता, जातीयता, इमिग्रेशन की स्थिति और उनके धर्म का पूरा डेटा आधिकारिक रूप से दर्ज करें। इस पर रोदरहैम क्षेत्र की सांसद सारा चैंपियन ने भी चिंता जताते हुए कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में बच्चों का शोषण करने वाले गिरोह मुख्य रूप से पाकिस्तानी मूल के ही थे। उन्होंने साफ कहा कि अगर हमने शुरुआत में ही राजनीतिक तुष्टिकरण से ऊपर उठकर इस सच्चाई को पहचान लिया होता, तो शायद हम इस भयानक शोषण को बहुत पहले ही रोक पाते।