
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और रोंगटे खड़े कर देने वाली युद्ध की खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक और विनाशकारी मोड़ पर पहुंच चुका है। बुधवार की अलसुबह ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी आक्रामकता का करारा जवाब देते हुए कुवैत में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेसों (US Military Bases) पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी (IRIB) ने इस महा-हमले का आधिकारिक दावा करते हुए कहा कि फारस की खाड़ी, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और केश्म द्वीप में अमेरिका की लगातार जारी दुश्मनी भरी हरकतों के जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज किया है कि उसके बेसों को कोई नुकसान पहुंचा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना का केश्म द्वीप पर भीषण हमला, बताया आत्मरक्षा
ईरान की इस अप्रत्याशित मिसाइल कार्रवाई को एक खुली आक्रामकता और उकसावे वाला कदम बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने बेहद आक्रामक और बड़ा पलटवार किया है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने संयुक्त रूप से ईरान के नियंत्रण वाले केश्म द्वीप (Qeshm Island) पर भीषण बमबारी की है। वाइट हाउस और पेंटागन की तरफ से जारी बयान में इस बड़ी सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से ‘आत्मरक्षा में उठाया गया कदम’ बताया गया है। इस जवाबी हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं और दोनों महाशक्तियों के बीच सीधा सैन्य टकराव शुरू हो चुका है।
कुवैत में गूंजे जोरदार धमाके, एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मनाना मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में उड़ाया
इस भीषण सैन्य टकराव के बीच कुवैत सरकार की तरफ से भी बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान सामने आया है। खाड़ी में बढ़ते अत्यधिक तनाव के बीच कुवैत के कई नागरिक इलाकों और शहरों में आसमान में बेहद जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे स्थानीय जनता में भारी दहशत फैल गई। कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि निवासियों द्वारा सुनी गई ये डरावनी आवाजें असल में कुवैती हवाई सुरक्षा इकाइयों (Air Defense Units) द्वारा दुश्मनाना हवाई लक्ष्यों को हवा में ही नष्ट करने के दौरान किए गए ऑपरेशनों की थीं। सेना ने साफ किया कि देश का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह अलर्ट पर है और उसने ईरान की तरफ से आ रहे कई घातक मिसाइल और ड्रोन हमलों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए उन्हें बीच रास्ते में ही मार गिराया।
कुवैती सेना ने जनता को दी सख्त चेतावनी, मलबे और अज्ञात खतरनाक चीजों से दूर रहने की हिदायत
हमले की गंभीरता को देखते हुए कुवैती सेना ने अपने देश के नागरिकों और निवासियों के लिए एक बेहद जरूरी और आपातकालीन सुरक्षा चेतावनी जारी की है। सेना के जनरल स्टाफ ने जनता को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने घरों के आस-पास या खुले इलाकों में गिरे किसी भी तरह के मिसाइल मलबे, छर्रों, अनफूटे गोलों या किसी भी अज्ञात चीज के पास बिल्कुल न जाएं और न ही उन्हें छूने की कोशिश करें। सेना के मुताबिक, आसमान में मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्ट होने के बाद गिरने वाला यह मलबा बेहद खतरनाक, विषैला और जानलेवा साबित हो सकता है। किसी भी ऐसी संदिग्ध चीज दिखने पर तुरंत सुरक्षा बलों को सूचित करने को कहा गया है।
यूएस सेंट्रल कमांड का बड़ा दावा: बीच रास्ते में ही टूटकर बिखर गईं ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें
दूसरी तरफ, पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ऑपरेशनों को संभालने वाली यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस पूरे युद्ध परिदृश्य पर एक बिल्कुल अलग और बड़ा दावा पेश किया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान ने पड़ोसी देशों और अमेरिकी ठिकानों की ओर एक के बाद एक कई खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें (Ballistic Missiles) दागी थीं, लेकिन अमेरिकी खुफिया और रक्षा तकनीक के चलते उनमें से कोई भी मिसाइल अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो सकी। सेंट्रल कमांड ने तकनीकी इनपुट साझा करते हुए दावा किया कि कुवैत में अमेरिकी बेस की ओर दागी गई दो प्रमुख ईरानी मिसाइलें या तो तकनीकी खराबी के कारण अपने तय लक्ष्य से काफी पहले ही समुद्र या रेगिस्तान में गिर गईं या फिर तीव्र गति से उड़ान भरने के दौरान हवा के दबाव में खुद ही टूटकर बिखर गईं।
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