यूक्रेन पर रूस का सबसे भीषण हमला: जेलेंस्की की ‘मदद’ की गुहार पड़ी फीकी, मिसाइल वर्षा से दहला पूरा देश

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अब एक बेहद खौफनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की लगातार वैश्विक मंचों से और विशेषकर अमेरिका से ‘मदद-मदद’ की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन पश्चिमी देशों की तरफ से मिल रही ठंडी प्रतिक्रिया के बीच रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा कहर बरपा दिया है। रूसी सेना ने यूक्रेनी शहरों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिसमें कम से कम 23 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है और दर्जनों लोग मलबे में दबे हुए हैं। इस हमले ने एक बार फिर पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है।

तबाही का वो मंजर जब आसमान से बरसी मौत

चश्मदीदों के मुताबिक, यह हमला इतना अचानक और भीषण था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। रूस ने यूक्रेन के रिहायशी इलाकों, अपार्टमेंट्स और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागीं। देखते ही देखते हंसते-खेलते शहर खंडहर में तब्दील हो गए। हर तरफ चीख-पुकार मच गई और आसमान काले धुएं के गुबार से ढक गया। स्थानीय प्रशासन और बचाव दल युद्ध स्तर पर मलबे को हटाने और घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबे से जैसे-जैसे शव निकाले जा रहे हैं, मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है।

जेलेंस्की की गुहार और डोनॉल्ड ट्रंप की खामोशी

इस भीषण तबाही के बीच यूक्रेन के सियासी गलियारों से जो खबर आ रही है, वो बेहद परेशान करने वाली है। राष्ट्रपति जेलेंस्की पिछले कई दिनों से अमेरिकी मदद की आस में हाथ-पैर मार रहे हैं। उन्होंने बार-बार रक्षा प्रणालियों और सैन्य मदद की मांग की है। हालांकि, अमेरिकी राजनीति में चल रही उथल-पुथल और विशेष रूप से डोनॉल्ड ट्रंप के रुख ने यूक्रेन की चिंताओं को बढ़ा दिया है। जानकार मान रहे हैं कि ट्रंप की तरफ से यूक्रेन को मिलने वाली मदद पर कोई ठोस आश्वासन न मिलने का फायदा उठाकर ही रूस ने अचानक अपने हमले तेज कर दिए हैं, जिससे यूक्रेन अब बेहद लाचार नजर आ रहा है।

क्या घुटने टेकने पर मजबूर हो जाएगा यूक्रेन

रूस के इस ताजा और क्रूर हमले ने यूक्रेन की कमर तोड़कर रख दी है। एक तरफ जहां देश के भीतर तबाही का मंजर है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य रसद की कमी यूक्रेन के हौसलों को पस्त कर रही है। जेलेंस्की ने वैश्विक नेताओं से भावुक अपील करते हुए कहा है कि अगर अब भी दुनिया नहीं जागी, तो बहुत देर हो जाएगी। अब देखना यह होगा कि इस नरसंहार के बाद क्या वैश्विक शक्तियां यूक्रेन की मदद के लिए आगे आती हैं या फिर यूक्रेन को रूस के इस कहर के सामने पूरी तरह घुटने टेकने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।