अल-नीनो बिगाड़ेगा भारत में मानसून का खेल, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने जारी की खतरे की बड़ी चेतावनी

भारत में मानसून की आहट के बीच दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों ने एक ऐसी डरावनी रिपोर्ट जारी की है, जिसने देश के किसानों से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने मंगलवार को अल-नीनो को लेकर एक बेहद गंभीर और नया अपडेट जारी करते हुए वैश्विक स्तर पर बड़ी चेतावनी दी है। प्रशांत महासागर में गर्म पानी के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण अल-नीनो का एक बेहद खतरनाक पैटर्न सक्रिय हो रहा है। वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि इस मौसमी बदलाव के चलते पूरी दुनिया के तापमान और बारिश के पारंपरिक पैटर्न पर बहुत गहरा और विनाशकारी असर पड़ेगा, जिसके चलते आने वाले महीनों में भीषण लू, सूखा और अप्रत्याशित मौसम संबंधी घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं।

जून से अगस्त के बीच 80 प्रतिशत तक खतरा, भारत का मानसून रहेगा बेहद कमजोर

डब्ल्यूएमओ (WMO) की इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आगामी जून से लेकर अगस्त के महीनों के बीच प्रशांत महासागर में अल-नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना 80 प्रतिशत से भी अधिक पाई गई है। इस अंतरराष्ट्रीय अनुमान के बाद अब यह लगभग पूरी तरह तय माना जा रहा है कि भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रदर्शन काफी कमजोर और निराशाजनक रह सकता है। इसके साथ ही, जून का पूरा महीना देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से बहुत अधिक गर्म और झुलसाने वाला रहेगा, जैसा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अपने शुरुआती पूर्वानुमानों में पहले ही साफ कर दिया था। हालांकि, अल-नीनो की वास्तविक रफ्तार और इसकी सटीक समयावधि को लेकर अभी भी मौसम के कई मॉडलों में थोड़ी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन अधिकांश वैश्विक मॉडल इसे कम से कम मध्यम से लेकर गंभीर श्रेणी का मान रहे हैं।

नवंबर तक रहेगा अल-नीनो का तांडव, खरीफ फसलों की बुवाई पर मंडराया संकट

मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि इस साल अल-नीनो का असर केवल मानसून की शुरुआत तक सीमित नहीं रहेगा। डब्ल्यूएमओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि इस अल-नीनो के आगामी नवंबर महीने तक लगातार जारी रहने की 90 प्रतिशत से अधिक प्रबल संभावना है। इसका सीधा और साफ मतलब यह हुआ कि भारत के पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन (जून से सितंबर) पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने वाला है। भारत के ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान देश भर में मुख्य खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का, सोयाबीन) की बुवाई का काम युद्धस्तर पर किया जाता है। बारिश में कमी आने से देश के अन्नदाताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इतिहास के पांच सबसे मजबूत अल-नीनो में शामिल, महासागरों से लेकर जमीन तक मचेगी हाहाकार

विश्व मौसम विज्ञान संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने इस वैश्विक संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एक बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने बताया कि साल 2023-24 का हालिया अल-नीनो मौसम विज्ञान के इतिहास में अब तक दर्ज किए गए पांच सबसे मजबूत और विनाशकारी अल-नीनो पैटर्नों में से एक साबित हुआ था। इसी खतरनाक प्रभाव के कारण साल 2024 में पूरी दुनिया ने रिकॉर्ड तोड़ और जानलेवा वैश्विक तापमान का सामना किया था। संगठन ने भारत सहित दुनिया भर की सरकारों को बेहद सख्त हिदायत दी है कि वे अपने-अपने देशों में आने वाले भयंकर सूखे, अचानक होने वाली भारी बेमौसम बारिश, जानलेवा लू (Heat Wave) और समुद्री व जमीनी दोनों ही क्षेत्रों में गर्मी के बढ़ते खतरों से निपटने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार रहें।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुलाई आपात बैठक, किसानों को सतर्क रहने के निर्देश

प्रशांत महासागर से उठी इस अंतरराष्ट्रीय चेतावनी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार भी तुरंत पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उच्च स्तरीय अध्यक्षता में कृषि मंत्रालय ने देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यवस्था की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक आपातकालीन हाई-लेवल बैठक बुलाई। बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने देश के करोड़ों किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन किसी को भी घबराने या पैनिक करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। उन्होंने किसानों को बेहद सतर्क रहने, मौसम के पूर्वानुमानों पर नजर रखने और केंद्र सरकार व अन्य संबंधित कृषि कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ लगातार मजबूत समन्वय बनाकर काम करने का कड़ा निर्देश दिया है, ताकि कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले इसके असर को कम किया जा सके।