बंगाल में बड़ा बवाल: अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद लोकसभा स्पीकर तक पहुंची जंग, इधर 60 विधायकों के ‘बागी’ तेवरों से हिली ममता सरकार?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कद्दावर नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का मामला अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की संसद और अदालत के गलियारों तक पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी 30 मई को हुई इस हिंसक घटना की विस्तृत जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपने वाले हैं। टीएमसी का मानना है कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पर हमला लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है, जिसे लेकर वे अदालत का दरवाजा भी खटखटाने जा रहे हैं।

संसद से न्यायपालिका तक लड़ाई की तैयारी
टीएमसी नेतृत्व इस पूरे मामले को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाया जाना कोई मामूली घटना नहीं थी। टीएमसी इस मुद्दे को न केवल सुरक्षा में चूक बल्कि विपक्षी दलों द्वारा फैलाई जा रही हिंसा के तौर पर पेश कर रही है। सांसद जल्द ही दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर उन्हें पूरी आपबीती बताएंगे, ताकि संसद स्तर पर इस मामले की जांच सुनिश्चित की जा सके।

आरोपों की जंग: बदले की राजनीति बनाम अंतर्कलह
इस हमले के बाद राज्य में राजनीतिक वार-पलटवार का दौर भी तेज हो गया है। टीएमसी ने सीधा हमला भारतीय जनता पार्टी पर बोलते हुए कहा कि भाजपा बदले की राजनीति के तहत हिंसक हमले करवा रही है। वहीं दूसरी तरफ, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया कि यह किसी विपक्षी पार्टी का काम नहीं बल्कि टीएमसी के भीतर बढ़ रही गुटबाजी का नतीजा है। बीजेपी का कहना है कि टीएमसी के लोग ही अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं।

कल्याण बनर्जी का हमला और गहराता विवाद
अभिषेक बनर्जी ही नहीं, बल्कि टीएमसी के एक और वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने भी खुद पर हमला होने का दावा किया है। उनका कहना है कि रविवार को हुगली में भाजपा समर्थकों ने उन पर हमला बोला जब वह कार्यकर्ताओं के साथ ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। टीएमसी नेताओं का तर्क है कि राज्य में एक सोची-समझी साजिश के तहत उनके सांसदों और विधायकों को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है, जो राज्य की कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश है।

विधायकों की बेरुखी: ममता बनर्जी की बढ़ी चिंता
पार्टी बाहर के हमलों से तो जूझ ही रही है, लेकिन अंदरूनी दरार ने हाईकमान की नींद उड़ा दी है। ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा झटका हालिया मीटिंग के दौरान लगा, जहां पार्टी के 80 विधायकों को तलब किया गया था लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि उनमें से केवल 20 विधायक ही पहुंचे। यानी करीब 60 विधायक मीटिंग से नदारद रहे। हालांकि पार्टी सूत्र इसे व्यस्तता बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस्तीफा दे रहे पार्षदों और अब विधायकों की यह गैर-हाजिरी टीएमसी के भीतर किसी बड़ी बगावत या टूट की आहट हो सकती है।