
सनातन धर्म में हनुमान जी को कलयुग का जागृत देव माना गया है, जो अपने भक्तों की थोड़ी सी भक्ति से भी प्रसन्न होकर उनके सभी कष्टों को हर लेते हैं। हनुमान जी की आराधना के लिए ‘हनुमान अष्टक’ (Hanuman Ashtak) को एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी स्तोत्र माना गया है। इसमें बजरंगबली के बाल्यकाल की लीलाओं से लेकर लंका विजय, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने और अहिरावन के वध जैसी महान कथाओं का सुंदर वर्णन है। मान्यता है कि जो भी भक्त पूर्ण श्रद्धा के साथ इसका पाठ करता है, स्वयं हनुमान जी उसके संकटों के आगे ढाल बनकर खड़े हो जाते हैं।
हनुमान अष्टक का पाठ करने के 4 सबसे बड़े फायदे
शास्त्रों के अनुसार, हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से जातक को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
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भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति: यदि आपको अज्ञात भय सताता है, बुरे सपने आते हैं या अकेले रहने में डर लगता है, तो हनुमान अष्टक का पाठ आपके भीतर अद्भुत साहस का संचार करता है। इसे पढ़ने से भूत-प्रेत और सभी नकारात्मक ऊर्जाएं कोसों दूर रहती हैं।
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शत्रु बाधा और कोर्ट-कचहरी में विजय: अगर आप किसी छिपे हुए दुश्मन से परेशान हैं या लंबे समय से किसी कानूनी विवाद अथवा मुकदमे में फंसे हैं, तो मंगलवार या शनिवार को इसका पाठ करने से आपको न्याय और सफलता मिलती है।
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कर्ज और भारी आर्थिक संकट से राहत: यदि व्यापार ठप हो गया है या आप कर्ज के दलदल में धंसते जा रहे हैं, तो हनुमान अष्टक का पाठ धन संबंधी मार्ग की सभी बाधाओं को दूर कर नौकरी और व्यवसाय में उन्नति लाता है।
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डिप्रेशन और मानसिक तनाव का नाश: कमजोर इच्छाशक्ति, चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तोत्र एक मानसिक औषधि की तरह काम करता है, जिससे मन शांत और सकारात्मक रहता है।
कैसे करें पाठ? जानें पूजा के ये जरूरी नियम
हनुमान अष्टक का पूरा फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है:
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पाठ करने से पहले सुबह या शाम को स्नान कर पूरी तरह पवित्र हो जाएं।
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इस पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व है, इसलिए संभव हो तो लाल वस्त्र धारण करें और लाल आसन पर ही बैठें।
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हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उन्हें सिंदूर, लाल फूल व बूंदी के लड्डू का भोग अर्पित करें।
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विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए एक ही बैठक में इसका 3, 5, 11 या 21 बार पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
संकटमोचन हनुमान अष्टक (संपूर्ण पाठ)
बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात ना टारो । देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो । चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो । कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 2 ॥
अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो । जीवत ना बचिहौ हम सो जु, बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो । हेरी थके तट सिन्धु सबै तब, लाए सिया-सुधि प्राण उबारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 3 ॥
रावण त्रास दई सिय को सब, राक्षसी सों कही सोक निवारो । ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाए महा रजनीचर मारो । चाहत सीय असोक सों आगि सु, दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 4 ॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब, प्राण तजे सुत रावन मारो । लै गृह बैद्य सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो । आनि सजीवन हाथ दई तब, lछिमन के तुम प्रान उबारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 5 ॥
रावन युद्ध अजान कियो तब, नाग कि फाँस सबै सिर डारो । श्रीरघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो । आनि खगेस तबै हनुमान जु, बंधन काटि सुत्रास निवारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 6 ॥
बंधु समेत जबै अहिरावन, लै रघुनाथ पताल सिधारो । देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो । जाय सहाय भयो तब ही, अहिरावन सैन्य समेत संहारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 7 ॥
काज किये बड़ देवन के तुम, बीर महाप्रभु देखि बिचारो । कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसे नहिं जात है टारो । बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो । को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 8 ॥
दोहा
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर । वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥
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