Modi Europe Visit: अगले महीने फ्रांस और स्लोवाकिया के ऐतिहासिक दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, G7 समिट के साथ दिखेगा भारत का दम

भारत और यूरोप के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक, कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों की दिशा में एक नया और बेहद बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने यानी जून 2026 में फ्रांस और स्लोवाकिया के बेहद अहम दौरे पर रवाना होंगे. अपने इस विदेशी दौरे के दौरान पीएम मोदी जहां फ्रांस में आयोजित होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के शीर्ष नेताओं के साथ वैश्विक संकटों पर महा-मंथन करेंगे, वहीं स्लोवाकिया पहुंचकर एक नया इतिहास भी रचेंगे.

फ्रांस में G7 समिट: वैश्विक दिग्गजों के बीच भारत की मजबूत आवाज

अंतरराष्ट्रीय मीडिया समूह ‘WION’ की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष और व्यक्तिगत आमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 17 जून तक फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियां-ले-बां (Evian-les-Bains) में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन में बतौर ‘आउटरीच पार्टनर’ शामिल होंगे. अपनी इस यात्रा के दौरान वह फ्रांस के प्रमुख शहरों नीस और पेरिस का भी दौरा कर सकते हैं.

गौरतलब है कि साल 2019 से ही भारत लगातार G7 समिट का एक अनिवार्य और मजबूत हिस्सा बनता रहा है. इस बार आउटरीच समिट के दौरान पीएम मोदी वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण रखेंगे, जिसमें मुख्य रूप से इन ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होनी तय है:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का वैश्विक नियमन और सुरक्षित उपयोग.

  • क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई चेन तैयार करना.

  • वैश्विक व्यापारिक तनाव, आर्थिक मंदी और जलवायु परिवर्तन (Climate Change).

  • ऊर्जा सुरक्षा और रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया (इजरायल-हमास) के कारण उपजे क्षेत्रीय विवाद.

क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होगी द्विपक्षीय वार्ता?

इस G7 समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हिस्सा ले रहे हैं. हालांकि, राजनयिक स्तर पर अभी तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो सका है कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई अलग से द्विपक्षीय (बोनहोमी) वार्ता होगी या नहीं. दोनों नेताओं के बीच आखिरी बार फरवरी 2025 में आमने-सामने की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद कई बार फोन पर बातचीत हो चुकी है.

बता दें कि मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता को लेकर ट्रंप के कुछ बयानों से दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी असहजता देखी गई थी. इसके अलावा ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने और देश को लेकर की गई एक तीखी टिप्पणी का समर्थन करने से भी दूरियां बढ़ी थीं. हालांकि, हालिया व्यापारिक समझौतों के बाद ये टैरिफ हटा लिए गए हैं. इसी महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी भारत दौरे पर आए थे, जहां क्रिटिकल मिनरल डील पर सहमति बनी थी और उन्होंने भारत में भारतीयों के खिलाफ किसी भी तरह के नस्लवाद की बात को सिरे से खारिज किया था.

स्लोवाकिया का ऐतिहासिक दौरा: 1993 के बाद पहले भारतीय पीएम

फ्रांस में वैश्विक कूटनीति का हिस्सा बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी सीधे स्लोवाकिया के द्विपक्षीय दौरे पर पहुंचेंगे. साल 1993 में स्लोवाकिया के एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने और भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद यह पिछले 33 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्लोवाकिया यात्रा होगी, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है.

दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में काफी सकारात्मक माहौल बना है. इससे पहले फरवरी 2026 में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेने भारत आए थे, जहां दोनों नेताओं के बीच इस ऐतिहासिक दौरे की रूपरेखा तैयार हुई थी.

“यूरोप का डेट्रायट” और भारतीय टाटा मोटर्स का बड़ा कनेक्शन

भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और हाल ही में यह 1.3 अरब यूरो के आंकड़े को पार कर गया है. स्लोवाकिया को अक्सर ऑटोमोबाइल की दुनिया में “यूरोप का डेट्रायट” कहा जाता है. यह देश हर साल लगभग 10 लाख कारों का उत्पादन करता है और प्रति व्यक्ति कार उत्पादन के मामले में पूरी दुनिया में नंबर वन है.

इस देश का भारत के साथ एक बेहद मजबूत औद्योगिक कनेक्शन है. स्लोवाकिया के निट्रा (Nitra) शहर में भारतीय दिग्गज कंपनी टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली ‘जगुआर लैंड रोवर’ (JLR) का 1.4 बिलियन यूरो की लागत से बना एक अत्याधुनिक और विशाल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थित है. साल 2018 से चालू इस प्लांट में वैश्विक बाजार के लिए मशहूर ‘लैंड रोवर डिफेंडर’ और ‘डिस्कवरी’ जैसी प्रीमियम गाड़ियां बनाई जाती हैं. यह मध्य यूरोप में किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा निवेश है.

यूरोप के साथ मजबूत होती भारत की रणनीतिक साझेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आगामी दौरा नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की उनकी हालिया सफल यात्राओं के बाद यूरोप के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी का एक और सीधा और स्पष्ट संकेत है. यह दौरा न सिर्फ वैश्विक सप्लाई चेन में चीन पर निर्भरता कम करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो सकता है.