
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) से इस वक्त की बेहद विस्फोटक खबर सामने आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के दावों के बीच अब दोनों देश सीधे युद्ध के मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं. अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमलों से भड़के ईरान ने गुरुवार को बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पास स्थित एक अमेरिकी सैन्य एयरबेस पर बड़ा मिसाइल हमला कर दिया है. ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने खुद इस हमले की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि, अमेरिकी सेना का यह एक्टिव बेस कौन सा था, इसके नाम का खुलासा अभी सुरक्षा कारणों से नहीं किया गया है.
बता दें कि इससे ठीक पहले अमेरिकी नौसेना ने पिछले 48 घंटों में दूसरी बार होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके बाद से ही ईरान बदले की आग में सुलग रहा था.
तड़के 5 बजे मिसाइलों से कांपा अमेरिकी एयरबेस
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ (Tasnim) की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सुरक्षा बलों ने यह जवाबी कार्रवाई गुरुवार तड़के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:00 बजे की. IRGC द्वारा जारी एक कड़े बयान में कहा गया है कि उनके रॉकेट और मिसाइल दस्ते ने अमेरिकी सेना के एक एक्टिव एयरबेस को निशाना बनाकर कई मिसाइलें दागीं, जो सीधे अपने टारगेट पर जाकर लगीं.
IRGC ने साफ किया है कि यह हमला पूरी तरह से अमेरिकी सेना की उस हिमाकत का जवाब है, जिसके तहत उन्होंने ईरान के बेहद महत्वपूर्ण ‘बंदर अब्बास हवाई अड्डे’ (Bandar Abbas Airport) के पास बमबारी की थी.
3 महीने से जारी है खूनी जंग, सीजफायर हुआ तार-तार
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच इस भीषण युद्ध की शुरुआत इसी साल 28 फरवरी 2026 को हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पर सहमति बनी थी, ताकि शांति वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके. लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीजफायर के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं.
पेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने यह कार्रवाई पूरी तरह अपनी रक्षा में की है, जिसके तहत उन्होंने ईरान के कई आत्मघाती ड्रोनों को हवा में ही तबाह कर दिया. अमेरिकी दावों के मुताबिक, ये ईरानी ड्रोन और नावें होर्मुज के व्यापारिक मार्ग में अमेरिकी जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन चुके थे. हालांकि, ईरान के इस ताजा मिसाइल हमले ने पूरे क्षेत्र को एक बार फिर पूर्ण युद्ध की ओर धकेल दिया है.
ट्रंप का तीखा बयान “ईरान आखिरी सांसें गिन रहा है”
इस भीषण गोलाबारी के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत पूरी तरह खटाई में पड़ती नजर आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कैबिनेट की एक हाई-लेवल बैठक के बाद बेहद सख्त लहजे में कहा कि “ईरान इस वक्त अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है.” ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दबाव में आकर जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेंगे.
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच शांति वार्ता इस समय परमाणु सामग्री (Enriched Uranium) के मुद्दे पर आकर पूरी तरह अटक गई है:
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अमेरिका की जिद: राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपने भीतर मौजूद संवर्धित यूरेनियम का पूरा स्टॉक या तो अमेरिका को सौंप दे या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करे.
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ईरान का रुख: ईरान ने अमेरिका की इस शर्त को सिरे से खारिज करते हुए साफ कह दिया है कि वह अपनी संप्रभुता और परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी भी कीमत पर आत्मसमर्पण नहीं करेगा.
‘बंदर अब्बास’ बना महाशक्तियों की जंग का नया अखाड़ा
इस पूरे टकराव के बीच ईरान का ‘बंदर अब्बास’ शहर अब इस महाजंग का मुख्य केंद्र बन गया है. बंदर अब्बास ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक सैन्य व व्यापारिक पोर्ट सिटी (बंदरगाह शहर) है. इस पूरे इलाके को ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी सुरक्षा ग्रिड की लाइफलाइन माना जाता है.
अमेरिकी नौसेना ने इसी संवेदनशील इलाके में बारूदी सुरंगें बिछाने का आरोप लगाकर IRGC के युद्धपोतों और बंदर अब्बास में स्थित उनके मुख्य ड्रोन कंट्रोल स्टेशनों को हवाई हमलों में नष्ट कर दिया था. अमेरिका की इसी कार्रवाई का बदला लेने के लिए अब ईरान ने अमेरिकी एयरबेस को दहला दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए प्रसिद्ध ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के मार्ग पर मंडरा रहा खतरा और गहरा गया है.
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