West Bengal Border: बंगाल में घुसपैठियों पर शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन,BSF को सौंपी 142 एकड़ जमीन

पश्चिम बंगाल में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को अभेद्य बनाने और अवैध घुसपैठ पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बेहद सख्त और बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण एलान करते हुए बताया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) की चौकियों और कंटीले तारों की फेंसिंग के निर्माण में आ रही अड़चनों को दूर कर दिया गया है. सरकार ने सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए BSF को अब तक कुल 142.79 एकड़ अतिरिक्त जमीन आधिकारिक रूप से सौंप दी है, ताकि भारत-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके.

9 सीमावर्ती जिलों में जमीन का आवंटन, मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा एक्शन

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस जमीन ट्रांसफर से जुड़े आधिकारिक आंकड़े साझा किए. उन्होंने बताया कि राज्य के 9 प्रमुख सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा ग्रिड को मजबूत किया जा रहा है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 38.805 एकड़ जमीन BSF को आवंटित की गई है. इसके बाद जलपाईगुड़ी में 35.165 एकड़ और कूचबिहार में 22.95 एकड़ जमीन सेना के इस विंग को सौंपी गई है. अन्य प्रभावित जिलों का आधिकारिक विवरण इस प्रकार है:

  • दक्षिण दिनाजपुर: 20.1701 एकड़

  • मालदा: 10.90 एकड़

  • दार्जिलिंग: 8.815 एकड़

  • उत्तर दिनाजपुर: 2.84 एकड़

  • उत्तर 24 परगना: 2.6 एकड़

  • नदिया: 0.55 एकड़

इस जमीन हस्तांतरण के तुरंत बाद सिलीगुड़ी सब-डिवीजन के फांसीदेवा इलाके में भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है, जहां सरकार ने हाल ही में BSF को 27 किलोमीटर लंबी भूमि का पैच सौंपा है.

‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति से खौफ, बांग्लादेश लौटने वालों की लगी कतार

पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो) की आक्रामक नीति अपनाई है. इस सख्त नीति का जमीनी असर अब साफ दिखने लगा है. उत्तर 24 परगना जिले में स्थित अंतरराष्ट्रीय सीमा क्रॉसिंग ‘हाकिमपुर चेकपोस्ट’ पर अचानक बांग्लादेश लौटने वाले अवैध प्रवासियों की भारी भीड़ जमा होने लगी है.

हावड़ा में मैकेनिक का काम करने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक ने सीमा पर अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि सख्त पाबंदियों के चलते अब उनका यहां टिकना नामुमकिन हो गया है. उसने बताया, “बंगाल में अब घुसपैठियों के खिलाफ भारी कड़ाई चल रही है, इसलिए हम खुद ही वापस जा रहे हैं. न तो अब कोई हमें काम दे रहा है और न ही कोई मकान मालिक हमें रुकने दे रहा है. हमें दो-तीन साल पहले एक दलाल के जरिए यहां लाया गया था.” जब उससे भारतीय पहचान दस्तावेजों के बारे में पूछा गया तो उसने साफ कहा कि कड़ाई के डर से उसने कोई भी स्थानीय पहचान पत्र या राशन कार्ड बनवाने की हिम्मत नहीं की थी.

हर जिले में बनेंगे ‘होल्डिंग सेंटर’, गृह मंत्रालय के फ्रेमवर्क पर काम शुरू

अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने की इस मुहिम के बीच पश्चिम बंगाल सरकार के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने 23 मई को एक नया आधिकारिक निर्देश जारी किया है. इसके तहत राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs) को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में ‘होल्डिंग सेंटर’ (Holding Centers) का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करें.

इन केंद्रों का उपयोग अवैध रूप से पकड़े गए विदेशियों और अपनी सजा पूरी कर चुके ऐसे विदेशी कैदियों को रखने के लिए किया जाएगा, जिन्हें वापस उनके देश डिपोर्ट किया जाना है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं के खिलाफ केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के तय नियमों और गाइडलाइंस के तहत ही त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए.