
देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर आगामी 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव और दो सीटों पर उपचुनाव के लिए बिगुल फूंक दिया गया है. निर्वाचन आयोग (ECI) के इस एलान के साथ ही देश का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है. इस चुनाव में सबसे दिलचस्प बात यह है कि विधानसभाओं में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं.
विपक्ष को सबसे बड़ा डर ‘क्रॉस वोटिंग’ और अपने ही विधायकों की संभावित बगावत का सता रहा है. अतीत में कई ऐसे मौके आए हैं जब आखिरी वक्त पर विपक्षी विधायकों ने पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों की झोली में जीत डाल दी थी. इस बार भी मध्य प्रदेश, झारखंड और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में समीकरण बेहद नाजुक मोड़ पर हैं.
झारखंड: नंबर गेम में झामुमो-कांग्रेस आगे, फिर भी ‘खेला’ होने का डर
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर होने जा रहा चुनाव बेहद दिलचस्प हो चुका है. सूबे की 81 सदस्यीय विधानसभा में एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता है. मौजूदा आंकड़ों के लिहाज से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. गणित बिल्कुल सीधा है गठबंधन आसानी से दोनों सीटें जीत सकता है.
लेकिन पेंच यहीं फंसता है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के पास 24 विधायक हैं. यदि बीजेपी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारकर चुनाव को त्रिकोणीय बनाती है, तो उसे अपनी सीट निकालने के लिए महज 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी. ऐसे में अगर विपक्ष के 3 से 4 विधायकों ने भी क्रॉस वोटिंग कर दी या वोट अमान्य हो गए, तो खेल पूरी तरह पलट जाएगा और मामला दूसरी वरीयता के वोटों पर चला जाएगा.
कर्नाटक: आंतरिक कलह के बीच 4 सीटों का मुकाबला हुआ रोचक
दक्षिण के द्वार कर्नाटक में भी राज्यसभा की 4 सीटों के लिए बिसात बिछ चुकी है. यहां सत्ताधारी कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान किसी से छिपी नहीं है. विधानसभा में कांग्रेस और उसके सहयोगियों के पास 135 विधायक हैं, जबकि बीजेपी-जेडीएस गठबंधन के पास 85 विधायक हैं. यहां एक सीट के लिए 45 वोटों का कोटा तय है.
देखा जाए तो कांग्रेस आसानी से 3 सीटें और बीजेपी 1 सीट जीत सकती है. लेकिन चर्चा है कि बीजेपी यहां एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस के असंतुष्ट विधायकों के सहारे बड़ा उलटफेर करने की ताक में है. यदि ऐसा हुआ तो कर्नाटक का चुनाव सबसे ज्यादा रोमांचक और हाई-प्रोफाइल हो जाएगा.
मध्य प्रदेश: दिग्विजय सिंह की सीट पर बीजेपी की ‘महा-घेराबंदी’
मध्य प्रदेश की 3 राज्यसभा सीटों पर मुकाबला कांटे का है, जहां एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. बीजेपी के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी 48 वोट अतिरिक्त बच रहे हैं. यानी तीसरी सीट पर कब्जा जमाने के लिए बीजेपी को सिर्फ 10 और वोटों का जुगाड़ करना होगा. दूसरी तरफ, विपक्षी दल कांग्रेस के पास 62 विधायक हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं.
गौरतलब है कि इस बार कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की सीट खाली हो रही है. कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि दिग्विजय सिंह दोबारा मैदान में उतरते हैं, तो बीजेपी उन्हें घेरने के लिए बड़ा दांव खेल सकती है. इतिहास गवाह है कि पिछली बार जब दिग्विजय सिंह के चलते राज्यसभा सीट को लेकर विवाद हुआ था, तब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ दी थी और कमलनाथ सरकार गिर गई थी. सिंधिया अब बीजेपी के बड़े सिपहसालार हैं, ऐसे में बीजेपी यहां विपक्ष को वॉकओवर देने के मूड में बिल्कुल नहीं है.
जानिए किस राज्य में कितनी सीटों पर होना है मतदान
18 जून को देश के जिन राज्यों में उच्च सदन के लिए वोट डाले जाएंगे, उनकी सूची इस प्रकार है:
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4-4 सीटें: आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक
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3-3 सीटें: मध्य प्रदेश और राजस्थान
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2 सीटें: झारखंड
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1-1 सीट: मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम
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उपचुनाव: महाराष्ट्र और तमिलनाडु की 1-1 सीट पर भी उपचुनाव होना है.
इन खाली हो रही सीटों में से फिलहाल 18 सीटें एनडीए (जिसमें 12 बीजेपी) के पास हैं. इस बार देखना होगा कि क्या बीजेपी अपनी रणनीति से विपक्ष के कुनबे में सेंध लगा पाती है या विपक्ष एकजुट रहकर अपना किला बचाने में कामयाब होता है.
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