
उत्तर-पश्चिम भारत में सूरज की तपिश और भीषण गर्मी से हाहाकार मचा हुआ है। हर किसी की नजरें अब आसमान की ओर टिकी हैं और जुबां पर बस एक ही सवाल है आखिर मॉनसून कहां है और यह कब तक दस्तक देगा? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले अनुमान जताया था कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 26 मई के आसपास केरल के तट पर दस्तक दे सकता है। हालांकि, वह तारीख बीत जाने के बाद भी मौसम विभाग ने अभी तक मॉनसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, भले ही केरल के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून के आगमन में चार दिन की जल्दी या देरी होना बेहद सामान्य बात है। अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मॉनसून ने 24 मई को ही केरल में एंट्री कर ली थी, लेकिन इस बार स्थितियां थोड़ी बदली हुई नजर आ रही हैं।
आखिर क्यों सुस्त पड़ी मॉनसून की चाल?
आमतौर पर केरल में मॉनसून के पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। इस साल उम्मीद जताई जा रही थी कि यह समय से पहले आ जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, मॉनसून में इस देरी की मुख्य वजह मॉनसूनी हवाओं का कमजोर पड़ना है। इसके साथ ही केरल के तटीय इलाकों में जैसी लगातार और भारी बारिश होनी चाहिए, वैसी फिलहाल देखने को नहीं मिल रही है।
मौसम के जानकारों का यह भी मानना है कि बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात (Cyclone) के कारण मॉनसूनी हवाओं की दिशा और गति प्रभावित हुई है, जिससे इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि वैज्ञानिकों के अनुसार मॉनसून की यह सुस्ती ज्यादा चिंता का विषय नहीं है और यह जल्द ही दोबारा रफ्तार पकड़ेगा।
अभी कहां तक पहुंचा मॉनसून? जानिए ताजा स्थिति
आईएमडी (IMD) द्वारा गुरुवार को जारी किए गए ताजा बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अब पूरी तरह से अनुकूल बन रही हैं। आने वाले 2 से 3 दिनों के भीतर मॉनसून के अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी में तेजी से आगे बढ़ने की पूरी संभावना है।
आपको बता दें कि भारत में साल भर में होने वाली कुल बारिश का 70 फीसदी से अधिक हिस्सा इसी मॉनसून सीजन में बरसता है। यही वजह है कि देश की खेती-किसानी, पीने के पानी की सप्लाई, बिजली उत्पादन (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने के लिए इस मॉनसून का समय पर आना बेहद जरूरी माना जाता है।
दिल्ली-यूपी और राजस्थान में कब से मिलेगी गर्मी से राहत?
ताजा पूर्वानुमानों के मुताबिक, मॉनसून 1 जून तक केरल और तमिलनाडु में पूरी तरह सक्रिय हो सकता है, जो कि इसकी सामान्य तारीख भी है। लेकिन दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के लोगों को राहत की बूंदों के लिए अभी थोड़ा लंबा इंतजार करना होगा।
राजधानी दिल्ली में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 30 जून है। वहीं, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में 15 जून के आसपास और राजस्थान के रेतीले इलाकों में 25 जून तक मॉनसून के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। तब तक इन राज्यों को प्री-मॉनसून गतिविधियों और लोकल वेदर सिस्टम के भरोसे ही रहना होगा।
इन राज्यों में अगले 3-4 दिनों तक बारिश का अलर्ट
भले ही मुख्य मॉनसून आने में थोड़ा वक्त हो, लेकिन मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में बारिश की संभावना जताई है। आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 से 31 मई के दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
इसके अलावा, पहाड़ी राज्यों जैसे जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में 28 से 30 मई तक और हिमाचल प्रदेश में 28 व 29 मई को बारिश का अनुमान है। पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार में 28 और 29 मई, पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय इलाकों में 28 मई और ओडिशा में 29 व 30 मई को झमाझम बारिश होने के आसार जताए गए हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
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