यूपी में मौसम का डबल अटैक कहीं 47.4 डिग्री की भयंकर भट्टी तो कहीं आंधी-बारिश का कोहराम

उत्तर प्रदेश में इस समय कुदरत के दो बेहद अलग और चौंकाने वाले रंग देखने को मिल रहे हैं। राज्य का एक हिस्सा जहां भीषण लू और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से भयंकर भट्टी की तरह तप रहा है, वहीं दूसरे हिस्से में धूल भरी तूफानी आंधी और मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा रखी है। मौसम के इस दोहरे मिजाज के बीच रुहेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक के लोगों को भीषण तपिश से थोड़ी राहत तो मिली है, लेकिन आंधी-बारिश के कारण राज्य में भारी नुकसान भी हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले 48 घंटे प्रदेश के लिए बेहद संवेदनशील हैं, क्योंकि एक नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने जा रहा है, जिससे तापमान में 8 डिग्री तक की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है।

कहीं पारा 47 के पार तो कहीं आंधी-तूफान: जिलों का हाल

मौसम के इन दो रंगों ने पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में ले रखा है। एक तरफ जहां बुंदेलखंड का बांदा जिला भीषणतम गर्मी का सामना कर रहा है, वहां का अधिकतम तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। पश्चिमी यूपी में भी सूर्यदेव का रौद्र रूप जारी है, जहां आगरा में तापमान 45.3 डिग्री दर्ज किया गया।

इसके ठीक उलट, पूर्वांचल और रुहेलखंड के इलाकों सहित मथुरा जैसे जिलों में तेज आंधी के साथ हुई झमाझम बारिश ने मौसम का रुख पूरी तरह बदल दिया और लोगों को तपती गर्मी से बड़ी राहत दिलाई। हालांकि, मौसम के इस जानलेवा यू-टर्न ने राज्य में भारी तबाही भी मचाई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आंधी, बारिश और दीवार/पेड़ गिरने की वजह से अब तक 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसमें संतकबीरनगर, बस्ती, सीतापुर, शाहजहांपुर, खीरी और गोंडा जैसे जिले शामिल हैं।

अगले 48 घंटे में पलटेगा पासा, 8 डिग्री तक गिरेगा पारा

तपिश और भीषण लू से झुलस रहे उत्तर प्रदेश के जिलों के लिए मौसम विभाग ने एक बड़ी और राहत भरी भविष्यवाणी की है। आईएमडी लखनऊ (IMD Lucknow) के अनुसार, अगले 48 घंटों के भीतर राज्य में एक नया और बेहद सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) दस्तक देने वाला है। इस नए मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने से प्रदेश के कई हिस्सों में तूफानी हवाओं के साथ जोरदार बारिश होने की पूरी संभावना है। इस बदलाव के कारण उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहरों में दिन के तापमान में 8 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे तपते हुए जिलों को बड़ी राहत मिलेगी।

आखिर क्यों एक साथ दिख रहे हैं मौसम के दो रंग? ये हैं 5 बड़े कारण:

1. चक्रवाती हवाओं का दबाव और बढ़ती तपिश मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय मध्य भारत के वायुमंडल के ऊपर एक विशेष चक्रीय चक्रवात (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) का सिस्टम बना हुआ है। यह सिस्टम ऊपर की बेहद गर्म हवाओं को नीचे जमीन की तरफ धकेल रहा है, जिससे मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।

2. सक्रिय मौसमी तंत्र का गायब होना यूपी के आसमान के ऊपर लंबे समय से कोई भी मजबूत या सक्रिय मौसमी तंत्र जैसे प्रति चक्रवात या पश्चिमी विक्षोभ मौजूद नहीं था। इसके चलते आसमान पूरी तरह साफ रहा और सूर्य की तेज किरणें सीधे धरती पर पड़ती रहीं, जिसने तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया।

3. भीषण गर्मी और नमी का टकराव (ट्रफ लाइन) जम्मू-कश्मीर के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ पहले से सक्रिय था। इधर यूपी के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण यहां की गर्म हवाएं तेजी से ऊपर उठने लगीं। जब ऊपर से आ रही ठंडी व नम हवाओं का इस गर्म हवा से टकराव हुआ, तो एक ट्रफ लाइन बन गई। इसी टकराव के कारण मध्य यूपी से लेकर पूर्वांचल तक अचानक तेज आंधी आई और बारिश शुरू हो गई।

4. राजस्थान की तरफ से आ रही सूखी ‘पछुआ’ उत्तर प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में पड़ोसी राज्य राजस्थान की तरफ से आने वाली बेहद गर्म और सूखी पछुआ हवाएं लगातार चल रही हैं। यह झुलसाने वाला मौसमी मिजाज तापमान को लगातार बढ़ा रहा है, जिससे पहले से तप रहे जिले और ज्यादा गर्म हो रहे हैं।

5. पुरवा हवाओं का कमजोर पड़ना बंगाल की खाड़ी से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने वाली नम ‘पुरवा’ हवाओं का असर इस बार बेहद कम और न्यूनतम रहा है। नमी न होने के कारण हवा पूरी तरह शुष्क हो गई है। उदाहरण के तौर पर, राजधानी लखनऊ में हवा की आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) घटकर महज 14 फीसदी तक पहुंच गई। हवा में नमी के इस बेहद निचले स्तर के कारण दिन के समय सूरज की रोशनी धरती को तेजी से तपा रही है।