
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की मूल्यांकन प्रक्रिया पर लगा विवादों का ग्रहण हटने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) की स्कैन कॉपी जारी होने के बाद अब गड़बड़ियों का एक नया और बेहद गंभीर दौर शुरू हो गया है। देश भर के सैकड़ों छात्रों और उनके परेशान अभिभावकों ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर मोर्चा खोल दिया है।
छात्रों का आरोप है कि बोर्ड द्वारा भेजी गई डिजिटल कॉपियों से महत्वपूर्ण पन्ने गायब हैं, बिल्कुल सही उत्तरों और सूत्रों (Formulas) पर भी ‘शून्य’ अंक थमा दिए गए हैं और भारी फीस चुकाने के बाद भी समय पर स्कैन कॉपियां उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। यह विवाद ऐसे समय में तूल पकड़ रहा है जब छात्र उच्च शिक्षा के लिए कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया (Admission Process) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
कॉपियों से 22वां पन्ना गायब, सही MCQ पर भी दिए शून्य अंक: अभिभावकों का फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया पर इस अव्यवस्था के खिलाफ कई जाने-माने चेहरों और अभिभावकों ने प्रामाणिक स्क्रीनशॉट साझा कर सीबीएसई को घेरा है:
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गीतू मोजो (अभिभावक): इन्होंने ‘एक्स’ पर अपनी बेटी की आपबीती साझा करते हुए लिखा कि उनकी बेटी को चार विषयों की स्कैन कॉपियां तो मिल गईं, लेकिन एक उत्तर पुस्तिका का मुख्य 22वां पन्ना ही गायब था। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि कई ऐसे उत्तरों पर भी अंक काट दिए गए जो सीबीएसई की आधिकारिक उत्तर कुंजी (Official Answer Key) से हूबहू मेल खाते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि 30-35 अंकों का यह भारी अंतर किसी भी छात्र के पूरे भविष्य और कॉलेज एडमिशन को बर्बाद कर सकता है।
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अनुराधा तिवारी (यूजर): इन्होंने एनसीईआरटी (NCERT) पुस्तकों के पन्नों का स्क्रीनशॉट अटैच करते हुए बोर्ड की तकनीक पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि सीबीएसई की तथाकथित ओएसएम (OSM) मूल्यांकन प्रणाली छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। आधिकारिक तौर पर बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के बिल्कुल सही उत्तर देने के बावजूद छात्रों को ‘0’ अंक दिए गए हैं और सही सूत्र (Formula) लिखने पर भी अनिवार्य ‘स्टेप मार्किंग’ नहीं दी गई।
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अक्षय गुप्ता (अभिभावक): इन्होंने शिकायत की कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी बेटी की फिजिक्स की आंसरशीट के लिए आवेदन किया और पूरा भुगतान भी कर दिया, लेकिन पोर्टल पर वह अब तक ‘उपलब्ध नहीं’ दिखाई दे रही है, जबकि अन्य विषयों की कॉपियां मिल चुकी हैं।
“मैं पूरी तरह टूट गया हूं, आंसरशीट मेरी है ही नहीं”: पीड़ितों का दर्द आया सामने
बोर्ड की इस कथित लापरवाही के कारण मानसिक तनाव झेल रहे कई परीक्षार्थियों ने अपना दर्द और कॉपियों की पेंडेंसी से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए हैं:
आशीष (कक्षा 12वीं के छात्र): “मैं पूरी तरह टूट चुका हूं। फिजिक्स में उम्मीद से कम नंबर आने के बाद मैंने री-इवैल्यूएशन प्रोसेस के जरिए आंसरशीट की फोटोकॉपी मांगी थी। आज जब मैंने पोर्टल से अपनी कॉपी डाउनलोड की, तो मेरे होश उड़ गए। सीबीएसई ने जो फिजिक्स की आंसरशीट अपलोड की है, वह मेरी है ही नहीं! वह किसी दूसरे उम्मीदवार की कॉपी है।”
कृष कुमार (रोल नंबर: 22617312): “मैंने 22 मई को ही 3 प्रमुख विषयों के लिए फीस का पेमेंट कर दिया था, लेकिन मुझे सिर्फ 2 कॉपियां मिली हैं और 1 अभी भी गायब है। पहले पोर्टल पर ‘सबमिट’ और ‘पेंडिंग’ का स्टेटस दिख रहा था, लेकिन अब वहां कुछ भी प्रदर्शित नहीं हो रहा है। मैं चाहता हूं कि मुझे मेरी कॉपी जल्द से जल्द मिले।”
इसी तरह छात्र अनिमेष घोष और भव्या सैनी ने भी 200 रुपये का भुगतान करने के बाद भी अब तक स्कैन कॉपी न मिलने की बात कही है। वहीं छात्र कृष राज ने मार्किंग स्कीम का हवाला देते हुए बताया कि उनके 9 में से सिर्फ 3 सही MCQs के नंबर जोड़े गए हैं, जबकि प्रश्न संख्या 29(D) और 30(D) बिल्कुल सही होने के बाद भी जांचे नहीं गए। पीड़ित छात्रा खनक का कहना है कि सीबीएसई को इस तकनीकी युग में डिजिटल ट्रैकिंग की बेहतर सुविधा देनी चाहिए थी। वे अब न्याय के लिए पुनर्मूल्यांकन का सहारा लेंगी।
आंसरशीट और पोर्टल देख देश भर के छात्र हैरान; उठा रहे ये 7 बड़े सवाल:
सीबीएसई के आधिकारिक पुनर्मूल्यांकन और ओएसएम पोर्टल की कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों ने निम्नलिखित तकनीकी सवाल खड़े किए हैं:
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धुंधली स्कैनिंग: सीबीएसई के परीक्षकों ने इतनी धुंधली और ब्लर (Blur) स्कैन कॉपियों की चेकिंग कैसे की? क्या इसी वजह से सही उत्तरों पर अंक कटे?
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MCQ मार्किंग में धांधली: ओएमआर और बहुविकल्पीय प्रश्नों के बिल्कुल सटीक जवाबों पर भी शून्य अंक क्यों दिए गए?
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फीस पोर्टल की विसंगति: री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर फीस को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं है? फीस बढ़ा-चढ़ाकर क्यों दिखाई जा रही है?
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उत्तरपुस्तिकाओं की अदला-बदली: कॉपियों की कोडिंग में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई कि एक छात्र की आंसरशीट दूसरे के अकाउंट में चली गई? पन्ने कैसे गायब हुए?
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स्टेप मार्किंग की अनदेखी: विज्ञान और गणित जैसे विषयों में सही फॉर्मूला और आधा सवाल सही हल करने पर मिलने वाले तय नंबर क्यों काटे गए?
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कॉपियों की पेंडेंसी: भुगतान के कई दिन बीत जाने के बाद भी हजारों छात्रों की स्कैन कॉपियां अब तक जारी क्यों नहीं की गईं?
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अधूरी रिपोर्ट: आवेदन किए गए सभी विषयों की कॉपियां एक साथ उपलब्ध कराने के बजाय किश्तों में क्यों दी जा रही हैं?
“सेंधमारी का दावा पूरी तरह फर्जी, हमारी प्रणाली अभेद्य”: CBSE का आधिकारिक रुख
इन तमाम आरोपों और सोशल मीडिया पर मचे घमासान के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली का पुरजोर बचाव किया है। बोर्ड ने पोर्टल के हैक होने या डेटा लीक होने के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सीबीएसई की वास्तविक मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित, गोपनीय और अभेद्य है, इसमें किसी भी प्रकार की सेंधमारी नहीं हुई है।
दरअसल, हाल ही में एक छात्र ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उसने 26 फरवरी को सीबीएसई के ओएसएम पोर्टल की सुरक्षा में कई तकनीकी कमियां खोजी थीं और केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दी थी। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए सीबीएसई ने कहा कि उक्त छात्र ने जिस यूआरएल (URL) का हवाला दिया है, वह केवल अंदरूनी टेस्टिंग (परीक्षण) के लिए इस्तेमाल होने वाली एक डमी साइट थी, न कि मुख्य मूल्यांकन डेटाबेस। मुख्य डेटा पूरी तरह सुरक्षित है।
29 मई तक लाइव होगा पुनर्मूल्यांकन पोर्टल; केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
बोर्ड ने छात्रों को राहत देते हुए घोषणा की है कि कॉपियों की दोबारा विस्तृत जांच और पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल 29 मई तक हर हाल में शुरू कर दिया जाएगा। बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 26 मई की शाम तक स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए देश भर से 4 लाख से अधिक डिजिटल आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इस साल छात्रों द्वारा कुल 11 लाख से ज्यादा उत्तरपुस्तिकाओं की मांग की गई थी, जिनमें से बोर्ड अब तक करीब नौ लाख कॉपियां डिजिटल माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध करा चुका है।
इस पूरे महा-विवाद पर संज्ञान लेते हुए देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “सीबीएसई की भुगतान और सेवा प्रणाली को अत्यधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तेज बनाया जाएगा। पुनर्मूल्यांकन और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए फीस चुकाने में छात्रों को किसी भी प्रकार की तकनीकी परेशानी नहीं होनी चाहिए। हमने सभी संबंधित बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि तकनीकी गड़बड़ी के कारण कोई भुगतान असफल होता है या किसी छात्र के खाते से अतिरिक्त राशि कटती है, तो बैंक स्वतः धनवापसी (Auto-Refund) की तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करें।”
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