
गोरखपुर के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का एक और बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला उजागर हुआ है। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को भेजे गए एक गोपनीय शिकायती ईमेल के बाद पूरे कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
इस शिकायत में वर्ष 2022, 2023 और 2024 बैच के करीब डेढ़ दर्जन (18) सीनियर छात्रों पर जूनियरों को बुरी तरह प्रताड़ित करने के सीधे आरोप लगाए गए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस शिकायत की एक कॉपी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को भी भेजी गई है। एनएमसी ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए कॉलेज प्रशासन को तुरंत निष्पक्ष जांच करने और दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी कानूनी (विधिक) कार्रवाई करने के सख्त आदेश जारी किए हैं। इसके बाद कॉलेज के प्राचार्य ने मंगलवार को आनन-फानन में एंटी रैगिंग कमेटी की आपात बैठक बुलाई।
राजेंद्र हॉस्टल बना टॉर्चर रूम: गाली-गलौज और सेक्सुअल संवाद के गंभीर आरोप
एनएमसी को भेजी गई विस्तृत शिकायत में बताया गया है कि मेडिकल कॉलेज के राजेंद्र हॉस्टल में एमबीबीएस 2025 बैच के नवप्रवेशित (प्रथम वर्ष) छात्र रहते हैं। आरोप है कि ये जूनियर छात्र पिछले काफी समय से सीनियरों की प्रताड़ना और रैगिंग का शिकार हो रहे हैं। शिकायत के मुताबिक, आरोपी सीनियर छात्र आए दिन देर रात हॉस्टल में जबरन एंट्री करते हैं।
इसके बाद वे जूनियर छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हैं, जिसमें अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल, भद्दी गाली-गलौज, जबरन सेक्सुअल संवाद (अश्लील बातें) करना और बेहद असहज करने वाली फिजिकल पोजिशन में घंटों तक खड़ा रखना शामिल है। इस शिकायती ईमेल में रैगिंग को अंजाम देने वाले डेढ़ दर्जन सीनियर छात्रों के नामों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
शिकायत मिलते ही आरोपी सीनियर हुए सक्रिय, जूनियरों को फोन पर दी धमकी
जैसे ही रैगिंग की शिकायत और एनएमसी के कड़े पत्र की बात कॉलेज परिसर में सार्वजनिक हुई, आरोपी सीनियर छात्रों के गुट में खलबली मच गई। खुद को फंसता देख कई सीनियर छात्रों ने अपने परिचितों और अन्य माध्यमों से प्रथम वर्ष के छात्रों को फोन लगवाए और शिकायत तुरंत वापस लेने का भारी दबाव बनाया।
सीनियरों ने जूनियर छात्रों को खुलेआम धमकी दी कि अगर यह मामला आगे बढ़ा या पुलिस तक पहुंचा, तो वे उनका करियर पूरी तरह बर्बाद कर देंगे। इन धमकियों के बाद से हॉस्टल में रहने वाले कई जूनियर छात्र बेहद डरे और सहमे हुए हैं। इसी डर के माहौल के बीच मंगलवार को प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों ने एक समूह बनाकर प्राचार्य से मुलाकात की और एक लिखित पत्र सौंपकर कहा कि यह शिकायत उनके द्वारा दर्ज नहीं कराई गई है।
एंटी रैगिंग कमेटी की सीक्रेट बैठक; बाहरी सदस्यों को रखा दूर
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्राचार्य के अलावा कॉलेज प्रबंधन से जुड़े डॉ. सुनील आर्या, डॉ. पवन प्रधान, डॉ. बिन्दू सिंह, डॉ. मनोज यादव और डॉ. राजकुमार यादव जैसे वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद रहे।
हालांकि, इस बैठक को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है क्योंकि नियम के मुताबिक कमेटी में शामिल बाहरी सदस्यों (जैसे स्थानीय प्रशासन या पुलिस के प्रतिनिधि) को इस आपातकालीन बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया। बैठक में केवल कॉलेज के आंतरिक शिक्षक ही शामिल हुए। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह समिति की पहली प्राथमिक बैठक थी, जिसमें एनएमसी के आधिकारिक पत्र और छात्रों की शिकायत को रिकॉर्ड पर लिया गया है और तत्काल प्रभाव से आंतरिक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
6 छात्रों पर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फेल साबित हुआ कॉलेज प्रशासन
कॉलेज सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एनएमसी द्वारा बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन को बीते 23 मई को ही ईमेल भेजकर इस पूरे मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ईमेल में जिन सीनियर छात्रों के नाम बतौर आरोपी लिखे गए हैं, उनमें से छह छात्र ऐसे हैं जिन पर पहले भी रैगिंग के गंभीर मामले दर्ज हो चुके हैं।
इन आरोपी सीनियरों ने पूर्व में भी वर्ष 2025 बैच के कुछ छात्रों के साथ रैगिंग की थी, जिसकी पुख्ता सीसीटीवी (CCTV) फुटेज आज भी कॉलेज प्रशासन के पास सुरक्षित मौजूद है। करीब सात महीने पहले कॉलेज प्रशासन ने इन छात्रों को दोषी मानते हुए महज कुछ जुर्माना लगाकर छोड़ दिया था। प्रशासन की वही ढीली कार्रवाई इस बार रैगिंग रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है और उन्हीं दागियों पर एक बार फिर से जूनियरों का उत्पीड़न करने का संगीन आरोप लगा है।
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