
मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति को हिला देने वाली सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। महीनों से जारी अमेरिका और ईरान के भीषण युद्ध के बाद अब दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते की रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस महाडील के “लगभग तय” होने का मजबूत संकेत देकर दुनिया को चौंका दिया है। इस बेहद जटिल और हाई-प्रोफाइल बातचीत में खाड़ी देश कतर एक मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। वैश्विक संकट के बीच होने जा रही इस संभावित डील पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने वाला है।
क्या है कतर का ‘शांति फॉर्मूला’ और समझौते की प्रमुख शर्तें?
कतर और पाकिस्तान की बैकचैनल कूटनीति के जरिए तैयार किए गए इस शांति समझौते के मसौदे में सबसे पहले 60 दिनों के पूर्ण संघर्ष विराम (Ceasefire) का प्रस्ताव रखा गया है। डील के तहत अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह खत्म करने की बात स्वीकार की है।
इसके बदले में ईरान को दुनिया के सबसे संवेदनशील और सबसे बड़े समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों के लिए तुरंत खोलना होगा। कूटनीतिक सूत्रों का दावा है कि इस महाडील के सफल होते ही विदेशों के बैंकों में जब्त पड़ी ईरान की करीब 25 अरब डॉलर की भारी-भरकम संपत्ति को भी अनफ्रीज (बहाली) कर दिया जाएगा। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने समुद्री जल क्षेत्र की संप्रभुता और नियंत्रण से कोई समझौता नहीं करेगा। हाल ही में भारत का दौरा करके लौटे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समझौते के अंतिम ड्राफ्ट को फाइनल टच देने में जुटे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप की ‘नो न्यूक्लियर बम’ वाली सख्त जिद
शांति वार्ता टेबल पर होने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर बेहद आक्रामक हैं। मेमोरियल डे के खास मौके पर हालिया युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले 13 अमेरिकी जांबाजों को श्रद्धांजलि देते हुए ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी है। ट्रंप ने अपनी जिद दोहराते हुए स्पष्ट किया कि इस शांति समझौते का यह मतलब कतई नहीं है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन करके परमाणु हथियार विकसित कर ले। अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर बम बनाने की इजाजत नहीं देगा और इस शर्त पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। ट्रंप का यह सख्त रुख आज होने वाली फाइनल डील में सबसे बड़ा पेच साबित हो सकता है।
भारत के लिए क्यों गेमचेंजर साबित होगी यह अमेरिका-ईरान डील?
इस ऐतिहासिक शांति समझौते की सुगबुगाहट का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा। दरअसल, युद्ध की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह डगमगा गई थी।
अब इस रूट के दोबारा खुलने और ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आवक तेजी से बढ़ेगी। तेल की उपलब्धता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को मिलेगा। भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ी कटौती की संभावना जताई जा रही है, जो आम जनता के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं होगा।
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